
100 दिन के एजेंडे से शिकायत निवारण तक/सुशासन, डिजिटल सेवा, भ्रष्टाचार पर सख्ती और विकास परियोजनाओं की निगरानी की पड़ताल
डा परविंदर सिंह चीफ एडिटर
काठमांडू। नेपाल में 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार ने कार्यभार संभाला। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली इस सरकार से सबसे बड़ा वादा था। पुरानी राजनीतिक व्यवस्था से अलग प्रशासन, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, सरकारी सेवाओं में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार। सरकार ने सत्ता संभालते ही 100 सूत्रीय शासन-सुधार एजेंडा लागू करने की घोषणा की। करीब पांच महीने बाद सरकार के कामकाज की तस्वीर मिश्रित है। एक तरफ सरकार ने प्रशासनिक सुधार, शिकायतों के निस्तारण, डिजिटल सेवा, परियोजनाओं की निगरानी और भ्रष्टाचार-विरोधी व्यवस्था को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश किया है। दूसरी तरफ संसद से दूरी, कुछ विवादित फैसलों और जनता की बढ़ती अपेक्षाओं के कारण सरकार को आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में केवल सरकार के दावों को उपलब्धियों की सूची नहीं माना गया है, बल्कि यह देखा गया है कि कौन-से कदम वास्तव में जनता के लिए उपयोगी व्यवस्था में बदलते दिखाई दे रहे हैं और कौन-से अभी लक्ष्य या नीति के स्तर पर हैं। सरकार ने काम को मापने योग्य बनाने की कोशिश की। नई सरकार का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती फैसला 100 सूत्रीय शासन-सुधार एजेंडा था। सरकार ने प्रत्येक लक्ष्य के लिए जिम्मेदार निकाय, समयसीमा और प्रदर्शन संकेतक निर्धारित करने की व्यवस्था बनाई। प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई। सरकार के अनुसार 100 सूत्रीय एजेंडे में जुलाई की शुरुआत तक 70 बिंदु लागू हो चुके थे, 17 में 80 प्रतिशत से अधिक प्रगति थी और 13 में 60 प्रतिशत से कम प्रगति थी। सरकार ने कुल प्रगति करीब 87.2 प्रतिशत बताई। 87.2 प्रतिशत का अर्थ यह नहीं है कि नेपाल की जनता को 87.2 प्रतिशत सुधार मिल गया। यह मुख्यतः सरकारी कार्यान्वयन-प्रगति का मापन है। इसलिए असली सवाल है- क्या सरकारी दफ्तर में काम कराने में लगने वाला समय घटा? क्या भ्रष्टाचार घटा? क्या सरकारी सेवाएं सस्ती और आसान हुईं? क्या अस्पताल और स्कूल बेहतर हुए? क्या युवाओं को रोजगार मिला? इन सवालों का पूर्ण स्वतंत्र मूल्यांकन अभी बाकी है। नई सरकार के शुरुआती महीनों में सबसे ठोस प्रशासनिक उपलब्धियों में से एक शिकायत निवारण व्यवस्था का प्रदर्शन है। प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल के मध्य से जुलाई के मध्य के तीन महीनों में 32,067 शिकायतों का समाधान किया गया। इसमें ‘‘हैलो सरकार’’ इलेक्ट्रॉनिक शिकायत प्रबंधन पोर्टल पर मिली शिकायतें भी शामिल थीं। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि ‘‘हैलो सरकार’’ जैसी व्यवस्था सीधे नागरिक और सरकार के बीच शिकायत दर्ज कराने का माध्यम बनती है। यदि शिकायत वास्तव में संबंधित विभाग तक पहुंचती है और उसके बाद कार्रवाई होती है तो इसका सीधा फायदा आम नागरिक को मिलता है। खोजी सवाल हालांकि यहां भी दूसरा आंकड़ा जरूरी है- 32,067 शिकायतों में कितनी शिकायतें वास्तव में समस्या के स्थायी समाधान तक पहुंचीं? मसलन, यदि किसी सड़क की खराबी की शिकायत पर केवल विभाग को पत्र भेज दिया गया तो उसे निस्तारित कहना और सड़क ठीक कर देना दो अलग बातें हैं। इसलिए भविष्य की निगरानी में शिकायतों का पहले-बाद का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। नई सरकार ने कैबिनेट के फैसलों और मंत्रालयों की कार्यप्रणाली को ज्यादा परिणाम-केंद्रित बनाने की कोशिश की। अप्रैल से जुलाई के बीच मंत्रिपरिषद की 21 बैठकें हुईं और 384 निर्णय लिए गए। सरकार ने बताया कि विभिन्न समितियों ने भी बैठकें कर फैसले लिए। सरकार का दावा है कि सचिव स्तर की बैठकों के माध्यम से सेवा वितरण और विकास कार्यों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी किए गए। यह सामान्य प्रशासनिक गतिविधि लग सकती है, लेकिन नेपाल जैसी व्यवस्था में इसका महत्व इसलिए है क्योंकि सरकार ने इसे केवल निर्णय लेने के बजाय फैसले की निगरानी से जोड़ने की कोशिश की है। सरकार ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘‘शून्य सहिष्णुता’’ को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल किया। पहले 100 दिनों के अपने मूल्यांकन में सरकार ने भ्रष्टाचार पर सख्ती, मितव्ययिता, योग्यता आधारित नियुक्ति और डिजिटल सेवा को प्रमुख सुधारों के रूप में प्रस्तुत किया। यह दिशा जनता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल की नई राजनीतिक व्यवस्था के पीछे युवाओं की नाराजगी का एक बड़ा कारण पारंपरिक राजनीतिक दलों और शासन व्यवस्था के प्रति अविश्वास रहा है। लेकिन यहां भी वास्तविक सफलता का पैमाना केवल बयान नहीं बल्कि- भ्रष्टाचार के कितने मामले पकड़े गए? कितने मामलों में चार्जशीट हुई? कितनी सरकारी राशि वापस आई? कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई? सरकारी खरीद में कितनी बचत हुई? जैसे आंकड़े होंगे। सरकार ने मितव्ययिता को अपनी प्रशासनिक नीति का हिस्सा बनाया। यह कदम सीधे जनता से जुड़ता है क्योंकि सरकारी खर्च का एक हिस्सा प्रशासनिक तंत्र पर खर्च होता है और बचत को स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे या सामाजिक सुरक्षा में लगाया जा सकता है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब सरकार वर्ष-दर-वर्ष प्रशासनिक खर्च की तुलना सार्वजनिक करे और बताए कि बचाई गई राशि कहां गई। नई सरकार की प्राथमिकताओं में डिजिटल शासन प्रमुख है। सरकार ने नागरिक सेवाओं को डिजिटल बनाने और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं तेज करने पर जोर दिया है। 100 सूत्रीय एजेंडे में डिजिटलाइजेशन और सार्वजनिक सेवा वितरण सुधार को प्रमुख स्थान दिया गया है। यह जनता के लिए संभावित रूप से सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है। यदि नागरिक को जन्म प्रमाणपत्र, भूमि संबंधी काम, कर, सामाजिक सुरक्षा, सरकारी शिकायत, लाइसेंस या अन्य सेवाओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालय न जाना पड़े, तो इसका सीधा फायदा समय और पैसे दोनों में होगा। लेकिन नेपाल अभी पूर्ण डिजिटल सरकारी व्यवस्था से दूर है। इसलिए इसे चल रहे सुधार के रूप में देखना ज्यादा सही होगा, न कि पूरा हो चुका काम। सरकार ने छठी राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्ययोजना पर विभिन्न प्रदेशों से सुझाव लिए। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार कोशी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेशों में इस पर चर्चा की गई। संघीय मंत्रालयों, संवैधानिक आयोगों और संबंधित सरकारी निकायों से भी विचार लिए गए। इसके बाद कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया और 8 जुलाई 2026 को मंत्रिपरिषद ने इसे मंजूरी दी। यह कदम खास तौर पर महिलाओं, बच्चों, दलितों, अल्पसंख्यकों, कमजोर वर्गों और मानवाधिकार से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार-विरोधी कन्वेंशन के क्रियान्वयन से संबंधित दूसरी राष्ट्रीय रणनीति और कार्ययोजना को भी मंजूरी दी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इसे भी 8 जुलाई को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ केवल राजनीतिक बयान से आगे जाकर संस्थागत नीति बनाने की दिशा है। अब असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी। नई सरकार ने विकास परियोजनाओं की निगरानी को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट में परियोजना मॉनिटरिंग और विकास कार्यों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों का उल्लेख है। सरकार ने सार्वजनिक निवेश को ज्यादा प्रभावी बनाने और अधूरी परियोजनाओं की गति बढ़ाने की बात भी कही है। प्रधानमंत्री शाह ने एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष से बातचीत में सार्वजनिक निवेश की प्रभावशीलता बढ़ाने, ऊर्जा विकास, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता बताया। नई सरकार के सामने नेपाल का सबसे बड़ा सामाजिक-आर्थिक सवाल रोजगार है। प्रधानमंत्री शाह ने आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। सरकार के राष्ट्रीय प्रतिबद्धता दस्तावेज में 7 प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि और 15 लाख नए रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन यह फिलहाल लक्ष्य है, उपलब्धि नहीं। इसलिए आने वाले वर्षों में रोजगार के वास्तविक आंकड़े ही बताएंगे कि यह सरकार युवाओं की सबसे बड़ी समस्या पर कितना असर डाल पाती है। सरकार का आर्थिक विजन घरेलू उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर भी केंद्रित है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने अंतरराष्ट्रीय निवेश और घरेलू रोजगार बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। सरकार आयात पर निर्भरता घटाकर नेपाल में निवेश और उत्पादन बढ़ाना चाहती है। कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश और सहयोग बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। यह नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दिशा हो सकती है, लेकिन इसके परिणाम तत्काल नहीं मिलेंगे। नई सरकार के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट भी आया। नेपाल के वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2083/84 का आधिकारिक बजट जारी किया है। बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता, बुनियादी ढांचे और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों को महत्व दिया गया है। इसका मतलब यह है कि सरकार ने अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को बजटीय प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की है। लेकिन यहां भी जांच का अगला चरण होगा- बजट में पैसा कितना रखा गया और वास्तव में खर्च कितना हुआ? नेपाल की अर्थव्यवस्था में जलविद्युत का महत्व बहुत बड़ा है। नई सरकार ने ऊर्जा विकास को आर्थिक विकास की रणनीति का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री ने एडीबी के साथ बातचीत में ऊर्जा विकास को प्राथमिकता बताया। भारत और चीन दोनों के साथ नेपाल ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है। यदि नेपाल बिजली उत्पादन बढ़ाकर निर्यात करता है तो इससे विदेशी मुद्रा, रोजगार, सरकारी राजस्व और व्यापार घाटे पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन बड़े ऊर्जा प्रोजेक्टों का लाभ तत्काल जनता की जेब तक नहीं पहुंचता; इसके लिए उत्पादन, ट्रांसमिशन और एक्सपोर्ट एग्रीमेंट का पूरा चक्र जरूरी है। नई सरकार की विदेश नीति में भी आर्थिक पहलू दिखाई देता है। भारत और चीन दोनों के साथ संबंधों को आर्थिक विकास, व्यापार, पर्यटन, ऊर्जा और निवेश से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। त्मनजमते के अनुसार सरकार भारत को संभावित ऊर्जा/निर्यात बाजार और चीन को पर्यटन व अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रही है। नेपाल के लिए यह व्यावहारिक दृष्टिकोण हो सकता है क्योंकि देश को दोनों बड़े पड़ोसियों के बाजार और निवेश की आवश्यकता है। अब तस्वीर का दूसरा पक्ष। नई सरकार की शुरुआत बड़ी उम्मीदों के साथ हुई थी। लेकिन चार-पांच महीने में ही आलोचनाएं भी सामने आने लगी हैं। काठमांडू पोस्ट ने सरकार की कार्यशैली, संस्थागत प्रक्रिया और कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठाए हैं। सबसे गंभीर राजनीतिक सवाल संसद से सरकार की दूरी को लेकर उठा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री शाह को 26 अगस्त को संसद में उपस्थित होकर सवालों का जवाब देने के लिए बुलाया गया है; रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने शुरुआती 39 बैठकों में केवल पांच में हिस्सा लिया। इससे यह सवाल पैदा होता है कि तेज प्रशासनिक सुधार और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। शहरी सुधार के नाम पर सरकार की कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ। बागमती नदी क्षेत्र में अनौपचारिक बस्तियों से जुड़े अभियान को लेकर विरोध हुआ। आलोचकों का आरोप रहा कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास की पर्याप्त व्यवस्था के बिना कार्रवाई की गई। यह उदाहरण बताता है कि किसी नीति का उद्देश्य अच्छा हो सकता है, लेकिन कार्यान्वयन का तरीका जनता के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। नदी संरक्षण जरूरी है। शहरी अतिक्रमण हटाना भी जरूरी हो सकता है। लेकिन गरीब परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास के बिना कार्रवाई सामाजिक तनाव पैदा कर सकती है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और स्वतंत्र रिपोर्टों को मिलाकर देखें तो बालेन सरकार के शुरुआती महीनों में जनता के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलें ये दिखाई देती हैं- क्षेत्र अब तक की स्थिति, जनता पर संभावित प्रभाव, 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा, लागू करने की निगरानी शुरू, जवाबदेही बढ़ सकती है, शिकायत निवारण, 32,067 शिकायतें निस्तारित होने का सरकारी दावा, सीधे नागरिकों को लाभ, डिजिटल सेवाएं, विस्तार की प्रक्रिया, समय और भ्रष्टाचार घट सकता है, भ्रष्टाचार-विरोध, संस्थागत एजेंडा, सरकारी तंत्र में सुधार की संभावना, मानवाधिकार, नई राष्ट्रीय कार्ययोजना मंजूर, कमजोर वर्गों के अधिकार मजबूत हो सकते हैं, भ्रष्टाचार-विरोधी रणनीति, नई रणनीति मंजूर, संस्थागत कार्रवाई का आधार, विकास परियोजनाएं, निगरानी पर जोर, अधूरे काम तेजी पकड़ सकते हैं, रोजगार, 15 लाख नए रोजगार का लक्ष्य, युवाओं के लिए बड़ा वादा, आर्थिक वृद्धि, 7 प्रतिशत का लक्ष्य, आय और निवेश बढ़ाने की संभावना, ऊर्जा, प्राथमिक क्षेत्र, बिजली निर्यात और रोजगार की संभावना, डिजिटल परिवर्तन, सरकार की प्रमुख प्राथमिकता, नागरिक सेवाओं में आसानी, लेकिन एक जरूरी अंतरः ‘काम’ और ‘वादा’ को अलग करना होगा, इस सरकार का मूल्यांकन करते समय तीन श्रेणियां बनाना जरूरी है। हली श्रेणी-वास्तव में किए गए प्रशासनिक काम, 32,067 शिकायतों के निस्तारण का सरकारी दावा, 100 सूत्रीय एजेंडे की निगरानी, मानवाधिकार कार्ययोजना की मंजूरी, भ्रष्टाचार-विरोधी राष्ट्रीय रणनीति को मंजूरी, मंत्रिपरिषद के निर्णयों की निगरानी, डिजिटल सेवा सुधार की शुरुआत, दूसरी श्रेणी-नीतिगत निर्णय, सार्वजनिक निवेश बढ़ाना, ऊर्जा विकास, डिजिटल नेपाल, आर्थिक सुधार, प्रशासनिक पुनर्गठन, तीसरी श्रेणी- अभी लक्ष्य, 7 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि, 15 लाख रोजगार, बड़े पैमाने पर निवेश, भ्रष्टाचार में वास्तविक गिरावट, सरकारी सेवाओं में व्यापक डिजिटल परिवर्तन, इन तीनों को एक साथ श्उपलब्धिश् कहना पत्रकारिता की दृष्टि से सही नहीं होगा। सबसे बड़ा सवालः क्या आम नेपाली को बदलाव महसूस हुआ? यही इस सरकार की असली परीक्षा है। सरकार की अपनी रिपोर्ट बताती है कि प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं। शिकायतों का निस्तारण हुआ है और शासन-सुधार के लिए संस्थागत एजेंडा बनाया गया है। लेकिन आम नागरिक के स्तर पर अंतिम मूल्यांकन के लिए अभी पांच संकेतकों की निगरानी करनी होगी- सरकारी कार्यालय में काम कराने का औसत समय कितना घटा? रिश्वत और भ्रष्टाचार की शिकायतों में कितनी कमी आई? युवाओं को वास्तव में कितनी नई नौकरियां मिलीं? स्वास्थ्य और शिक्षा की सरकारी सेवाओं में क्या सुधार हुआ? विकास परियोजनाओं में लागत, समय और गुणवत्ता कितनी सुधरी? अगर अगले छह से बारह महीनों में इन पांच क्षेत्रों के आंकड़े सकारात्मक आते हैं तो बालेन सरकार की शुरुआती प्रशासनिक पहलें वास्तविक जनकल्याणकारी परिवर्तन में बदलती दिखाई देंगी। बालेन सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि अभी कोई एक पुल, सड़क या बड़ी योजना नहीं है। उसकी सबसे महत्वपूर्ण कोशिश सरकार के काम को लक्ष्य, समयसीमा और परिणाम से जोड़ने की कोशिश है। 100 सूत्रीय एजेंडा, शिकायतों का ऑनलाइन निस्तारण, डिजिटल प्रशासन, भ्रष्टाचार-विरोधी रणनीति और परियोजनाओं की निगरानी इसी दिशा में हैं। लेकिन सरकार के सामने चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। सरकारी रिपोर्ट में 87.2 प्रतिशत प्रगति और जनता की जिंदगी में 87.2 प्रतिशत सुधार- दोनों एक चीज नहीं हैं। नई सरकार को अब अपने प्रशासनिक दावों को खुले डेटा, विभागवार खर्च, परियोजनावार प्रगति और नागरिकों के स्वतंत्र फीडबैक से साबित करना होगा। यही वह बिंदु होगा जहां नारे से निकलकर वास्तविक शासन मॉडल बनेगा। और फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सबसे ईमानदार निष्कर्ष यही है- नेपाल की नई सरकार ने शुरुआती महीनों में प्रशासनिक सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन उनके बड़े जनकल्याणकारी परिणामों का निर्णायक प्रमाण अभी सामने आना बाकी है। नेपाल सरकार/प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रगति रिपोर्ट, नेपाल वित्त मंत्रालय का 2083/84 बजट।