कल आईना साबुत था,तो हर चेहरा करीब आता था,
अपनी सूरत देखकर हर कोई खूब मुस्कुराता था,
आज आईना क्या टूटा,टुकड़े चुभे ना सरक कर जाते हैं,
मतलब के रिश्ते जनाब,हालात देखकर निभाए जाते हैं।
कल तक जिनकी महफ़िल में अपनेपन का शोर बहुत था
मुश्किल आई तो समझ आया,हर रिश्ता कितना कमज़ोर था
जो हाथ मिलाकर चलते थे,वही नज़रें चुराने लगे,
वक्त क्या बदला,अपने भी अपना असली चेहरा दिखाने लगे
मगर टूटे आईने को तुम उसकी आख़िरी हार मत समझना
आज गिरे इंसान को जीवन से लाचार मत समझना,
समय की चाल निराली है,पल में बाज़ी पलट जाती है,
जिसे दुनियाँ ठुकराती है,कभी दुनियाँ उसी के पीछे आती है।
आज तुम्हारा दौर है तो इसका इतना गुरूर मत करना,
किसी के बुरे वक्त पर हँसने का कसूर मत करना,
न सिंहासन स्थायी होता है,न ताज हमेशा रहता है,
वक्त जब हिसाब माँगता है,हर घमंड ज़मीन पर ढहता है।
इसलिए टूटे को जोड़ो,गिरते को हाथ देकर उठाओ,
वक्त की अदालत से पहले इंसानियत का फ़र्ज़ निभाओ,
किशन आज किसी और की रात है,कल तुम्हारी भी हो सकती है,
यह वक्त है जनाब,दिन सबके आते हैं,बस बारी बदलती रहती है।



