इंसानों की चौखट पर उम्मीदों के दीप जलाते हो,
मतलब की हवा चले तो किस्मत को दोष लगाते हो,
जो ख़ुद अपने वादों का बोझ उठा नहीं पाता यार,
उससे उम्रभर वफ़ा की उम्मीद,तुम भी कमाल करते हो।
चेहरों की मुस्कान को तुम अपनापन समझ लेते हो,
दो मीठे बोलों को सच्चा समर्पण समझ लेते हो,
जब मतलब पूरा होते ही रिश्तों के रंग बदल जाते हैं,
तब अपनी भूल छोड़कर रब से शिकायत करते हो।
सुख मिले तो कहते हो,मेरी मेहनत का कमाल है,
दुःख मिले तो कहते हो,रब तेरा कैसा इंसाफ़ है,
नेमतों की गिनती में याददाश्त अक्सर खो जाती है,
एक कमी क्या रह जाए,दुआ भी शिकवा बन जाती है।
रब ने कहा कर्म कर, हर चेहरे पर भरोसा मत कर,
प्रेम कर सबसे,मगर उम्मीदों का सौदा मत कर,
इंसान आखिर इंसान है,बदलना उसकी फितरत भी है,
मुझ पर यक़ीन रख,हर मोड़ पर शिकायत मत कर।
जिस दिन उम्मीदों से ज्यादा शुक्र करना सीख़ जाओगे,
टूटते रिश्तों में भी जीवन का सबक पा जाओगे,
किशन उम्मीद इंसानों से शिकायत रब से,ये कैसा यार
खुद की सोच बदलकर देखो,ज़िंदगी भी कमाल है यार!



