Hindi Editorials

कविता – ऊपरवाला जब हिसाब करेगा

ऊपरवाला जब खाता खोलेगा,दिखावा नहीं,कर्म देखेगा।कितने तीर्थ गए,नहीं देखेगा,किसका दिल दुखाया,देखेगा। केदारनाथ गए कितनी बार,हरिद्वार गए कितनी बार,मंदिरों का हिसाब...

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कविता – राह दिखाने वाले बहुत मिलेंगे,पर चलना स्वयं पड़ेगा

परिवार ने स्नेह दिया,तो मित्रों ने हौसला बढ़ाया,शिक्षक ने ज्ञान का दीप जलाकर,जीवन-पथ समझाया।समाज ने अपने अनुभवों से,कितने सबक सिखाए,बुजुर्गों...

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कविता – तू मेहरबाना मेहर करो, मैं नित नित गंदला होता

तू मेहरबाना मेहर करो,मैं नित नित गंदला होता,अपने ही कर्मों के कारण,अंदर से दुखड़ा रोता।माया-मोह ने घेर लिया,मन अपना राह...

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कविता – शाश्वत सुख की राह पकड़कर, जीवन सफल बनाएँ

हर पल सुख की चाह में,क्यों जग से उम्मीद लगाएँ,क्षणभंगुर खुशियों के पीछे,क्यों जीवन यूँ गँवाएँ।मन के भीतर दीप जलाकर,सत्य-प्रेम...

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