ख़ुश रहना है तो मन को,प्रेम का घर बनाइए,
ग़ुस्से और जलन को मन से दूर भगाइए।
चिंताओं की धूल को,विश्वास से हटाइए,
हर हाल में हँसकर,जीवन को महकाइए।
मन की छलनी से नफ़रत,ईर्ष्या छान दीजिए,
दिल के हर कोने में,प्रेम के दीप जला दीजिए।
जो बीत गया,उसे हँसकर विदा कीजिए,
आज के हर पल को,खुशियों से सजा लीजिए।
ग़ुस्सा जलाता हैँ मन को,धीरज शीतल छाँव है,
मुस्कान से बढ़कर न कोई सुखद ठाँव है।
चिंताओं में उलझकर,क्यों खोते हैं बहार,
हँसते हुए जीने में,जीवन का है सार।
न जलन को जगह दीजिए,न द्वेष को पालिए,
हर मुश्किल में धैर्य का,दीपक सँभालिए।
मन निर्मल हो तो हर राह आसान लगे,
होंठों की मुस्कान से हर दिन महान लगे।
मन की सफ़ाई से ही,खुशियों के फूल खिलते हैं,
प्रेम और संतोष से,जीवन के रंग निखरते हैं।
किशन ग़म आएँ तो हिम्मत से,उन्हें भी सह जाइए,
हँसते रहिए,मुस्कुराइए, जीवन सफ़ल बनाइए।

