किसी के दर्द को देखकर,कभी मुस्कुराया न करो,
गिरते हुए इंसान का,यूँ मज़ाक उड़ाया न करो।
वक़्त का पहिया घूमकर,कब किस ओर मुड़ जाएगा,
आज जो दूसरों पर हँसे,कल ख़ुद भी पछताएगा।
किसी की परेशानी को,मनोरंजन बनाया न करो,
किसी के बहते आँसुओं पर,जश्न मनाया न करो।
हर दर्द की आह में,एक अनकही फ़रियाद होती है,
रब के दरबार में,हर कर्म की अपनी बात होती है।
ईश्वर-अल्लाह सब देखते हैं,हर कर्म का हिसाब रखते हैं,
किसके दिल में दर्द कितना है,सबका जवाब रखते हैं।
जिस पीड़ा में आज तुम्हें,दूसरों का तमाशा दिखता है,
कल वही दर्द तुम्हारे द्वार आए,तो कैसा लगता है?
रब वही न दे दे तुमको,जिस दर्द पर हँसते हो,
जिस मुश्किल को तुच्छ समझकर,दूसरों को कसते हो।
जिस चीज़ में आनंद मिले,वही इम्तिहान न बन जाए,
हँसता हुआ चेहरा तुम्हारा,कहीं आँसुओं में न ढल जाए।
दूसरों के दर्द में मरहम बनो,ज़ख़्मों की चुभन न बनो,
गिरते हुए को हाथ दो,उसकी राह की अड़चन न बनो।
किशन याद रखो,रब की रहमत में,करुणा का ही मान है,
सुख-दुख में सहभागी बनना,इंसानियत की पहचान है।


