सभी को साथ रखिये,मगर स्वार्थ न पालिये,
रिश्तों की पवित्रता को दिल से संभालिये।
मतलब की दीवारों से रिश्ते टूट जाते हैं,
निस्वार्थ प्रेम से ही अपने दिल में उतर आते हैं।
सोच अगर मैली हो,तो अपनापन भी छलता है,
गलत अंदाज रिश्तों में धीरे-धीरे जहर घोलता है।
बातों में मिठास रखिये,व्यवहार में सम्मान,
यही रिश्तों की दौलत,यही जीवन की पहचान।
किसी को जीतना हो तो प्रेम से जीत जाइये,
अहंकार की आग को मन से बुझाइये।
हर रिश्ते में विश्वास का दीप जलाइये,
अपनों की कमियों को प्रेम से समझाइये।
जहाँ स्वार्थ प्रवेश करे,वहाँ अपनापन खो जाता है,
जहाँ अहंकार बढ़े, वहाँ रिश्ता रो जाता है।
सच्चे मन से निभाइये हर रिश्ते का संसार,
निस्वार्थ भाव से ही मिलता है सच्चा प्यार।
साथ रहना ही काफी नहीं,साथ निभाना सीखिये,
अपनेपन की राह में खुद को मिटाना सीखिये।
किशन सही सोच,सच्चा व्यवहार और निर्मल मन रखिये,
सभी को साथ रखिये,मगर साथ में स्वार्थ मत रखिये।
