जो योग्य नहीं,उसे भी सम्मान दिया करो,
अपने संस्कारों का सदा मान रखा करो,
दूसरों की कमी से अपना स्तर मत गिराओ,
अपने उजले चरित्र का दीप जलाया करो।
कड़वे शब्द सुनकर भी मधुर बोल बोलो,
अहंकार के बदले विनम्रता के मोती घोलो,
जो जैसा करता है, उसका कर्म वही जाने,
तुम अपने हृदय में प्रेम की गंगा ही ढालो।
सम्मान देना कमजोरी नहीं,महानता है,
कटुता के बीच मुस्कान रखना उदारता है,
दूसरों के व्यवहार से खुद को मत बदलो,
सच्चे इंसान की यही तो पहचानता है।
जो अपमान करे,उसे भी दुआ दे देना,
बदले की अग्नि को हृदय से विदा कर देना,
किसी के दोषों को अपना स्वभाव न बनाना,
अपने चरित्र को हर पल निर्मल बनाए रखना।
याद रखो, सम्मान तुम्हारी शान बनेगा,
हर अच्छा कर्म तुम्हारी पहचान बनेगा,
किशन लोगों का चरित्र वे स्वयं लिखेंगे कर्मों से,
तुम्हारा चरित्र तुम्हारे व्यवहार से महान बनेगा।
