बुजुर्गों से ही घर की पहचान होती है,
उनकी दुआओं से हर राह आसान होती है,
वे अनुभव के दीपक,ज्ञान का सागर होते हैं,
उनके रहते घर में संस्कारों के उजाले होते हैं।
उनकी झुर्रियों में जीवन का इतिहास होता है,
हर अनुभव में छिपा कोई अनमोल एहसास होता है,
वे ठोकरों से बचना,गिरकर सँभलना सिखाते हैं,
अँधेरों में भी सही रास्ता दिखाते हैं।
वे घर की नींव हैं,रिश्तों की मज़बूत दीवार,
उनके धैर्य से खिलता है प्रेम का संसार,
वे टूटते रिश्तों को अपनत्व से जोड़ते हैं,
बिखरते परिवार को संस्कारों से सँजोते हैं।
उनकी ख़ामोशी में भी सीख हज़ार होती है,
उनकी हर सलाह में जीवन की बहार होती है,
जो उनके अनुभव को अपना आधार बनाते हैं,
वे मुश्किल तूफ़ानों में भी राह बना जाते हैं।
बुजुर्गों का सम्मान ही परिवार की शान है,
उनकी सेवा और आदर ही सच्चा संस्कार है,
किशन धन-दौलत से नहीं,दुआओं से घर आबाद होता है,
जहाँ बुजुर्गों का मान हो,वहाँ स्वर्ग का एहसास होता है।



