
कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता बॉक्सर अरुंधति चौधरी का ऐतिहासिक स्वागत, बेटियों को दिया बड़ा संदेश—”सपनों को उड़ान दो, खेल और शिक्षा दोनों में आगे बढ़ो”
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली बॉक्सर अरुंधति चौधरी का गुरुवार को उनके पैतृक गांव कुराडिया में ऐतिहासिक स्वागत हुआ। गांव की सीमा से लेकर बालाजी मंदिर तक हर ओर उत्साह का माहौल देखने को मिला। देशभक्ति गीतों, डीजे, पुष्पवर्षा और जयघोष के बीच निकले भव्य अभिनंदन जुलूस ने पूरे गांव को गौरव के रंग में रंग दिया।
मोरला चौराहे से कुराडिया तक निकले स्वागत जुलूस में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और स्कूली छात्र-छात्राएं शामिल हुए। जगह-जगह विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने फूल बरसाकर अपनी स्वर्णिम बेटी का अभिनंदन किया। गांव पहुंचने पर अरुंधति ने सबसे पहले बालाजी मंदिर में हनुमानजी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर सरपंच अजीत सिंह मीणा, वर्धमान जैन, रामपाल मीणा, धर्मराज जाट, रामरतन जाट, राधेश्याम सेन सहित अनेक ग्रामीणों ने साफा पहनाकर और पुष्पमालाओं से उनका सम्मान किया।
अपने संबोधन में अरुंधति चौधरी ने कहा कि बचपन से ही उनका सपना था कि वह ऐसा कार्य करें जिससे परिवार और देश का नाम रोशन हो। उन्होंने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेल को चुना और इस सफर में माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैदान में मैंने मुकाबला लड़ा, लेकिन मेरे माता-पिता ने जीवन की हर कठिनाई से लड़कर मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया। स्वर्ण पदक जीतने के बाद सबसे पहला फोन मैंने अपने पिता को किया।”
उन्होंने गांव की बेटियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कोई भी लड़की स्वयं को कमजोर न समझे। शिक्षा के साथ खेलों में भी आगे बढ़ें और अपने परिवार, गांव तथा देश का नाम रोशन करें।
उल्लेखनीय है कि अरुंधति चौधरी के दादाजी मूल रूप से कुराडिया गांव के निवासी थे। बाद में उनका परिवार कोटा में बस गया, लेकिन आज स्वर्णिम उपलब्धि के साथ पैतृक गांव लौटने पर पूरे क्षेत्र ने उन्हें अपनी बेटी मानकर अभूतपूर्व सम्मान दिया।

