कुछ देकर,कुछ लेकर,ज़िंदगी ने फ़र्ज़ निभाया है,
कभी आँसू,कभी मुस्कान देकर जीना सिखाया है।
जिसे अपना समझ बैठे थे,वह भी राह में छूट गया,
वक़्त ने धीरे से कहा,कुछ भी पराया-अपना कहाँ रह पाया है
जो मिल रब की रहमत समझ,जो गया तक़दीर मान,
हर इच्छा पूरी हो ज़रूरी नहीं,इतना-सा सच पहचान।
कुछ रिश्ते दुआ बनकर मिले,कुछ दर्द देकर गुज़र गए,
पर हर शख़्स ने जाते-जाते दे दिया ज़िंदगी का नया ज्ञान।
खाली हाथ आए थे जग में,खाली हाथ ही जाना है,
किस बात का अहंकार,किस दौलत पर इतराना है।
जो बाँट दिया अपना है,जो जोड़ लिया यहीं रह जाएगा,
इस छोटे-से सफ़र में बस प्रेम और दुआएँ कमाना है।
हर चीज़ तेरी नहीं है,हर चीज़ तेरे लिए बनी नहीं,
हर दुआ उसी पल कबूल हो,ऐसी कोई गारंटी नहीं।
कभी रब छीनकर भी देता है, रोककर राह दिखाता है,
जिसे हम सज़ा समझतें हैं,उसमें भी सीख छिपी कहीं।
अब न पाने की बेचैनी है,न खोने का कोई गिला रहा,
जो मिला शुक्र किया,जो बिछड़ा उसे भी दुआ कहा।
किशन ज़िंदगी ने सबसे खूबसूरत सबक इतना सिखाया अपना करने वाले नहीं,सबमें अपना बाँटने वाले नें पाया



