किसी की राह में फूल,किसी के हिस्से घाव होता है,
किसी के सिर पर छत,किसी पर खुला आकाश होता है,
पर आँसू की हर बूँद में दर्द का रंग समान होता है,
विषमताओं में भी समता का भाव होता है।
किसी की थाली भरी,कोई भूख से रात गुज़ारता है,
कोई वैभव में भी रोता,कोई अभाव में मुस्कुराता है,
सुख-दुःख की धूप-छाँव में जीवन का ठहराव होता है,
विषमताओं में भी समता का भाव होता है।
मिट्टी नहीं पूछती किसका ऊँचा,किसका नाम छोटा है,
सूरज नहीं देखता किसका महल,किसका घर टूटा है,
कुदरती चौखट पर हर प्राणी का समान ठहराव होता है
विषमताओं में भी समता का भाव होता है।
दौलत से कद ऊँचा हो जाए,इंसान बड़ा नहीं होता,
निर्धनता से कोई मनुष्य कभी सम्मान में छोटा नहीं होता,
जहाँ करुणा बसती है,वहीं मानवता का प्रभाव होता है,
विषमताओं में भी समता का भाव होता है।
एक दिन पद,प्रतिष्ठा,वैभव सब यहीं छूट जाना है,
मुट्ठी बाँधकर आए थे,खाली हाथ ही लौट जाना है,
किशन भेद मिटाकर दिल जीते,उसी जीवन का सद्भाव होता है
विषमताओं में भी समता का भाव होता है।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318



