हिंदी हो या तमिल,मराठी हो या कन्नड़ की वाणी,
बंगाली,पंजाबी,गुजराती सिंन्धी,हर बोली अपनी कहानी।
तेलुगु,मलयालम,असमिया,उड़िया का भी मान करें,
भारत की हर भाषा को दिल से अपना सम्मान करें।
भाषाएँ अलग-अलग सही,भाव हमारे एक रहें,
शब्द भले हों भिन्न मगर,दिल से दिल के नेक रहें।
भाषा दीवार नहीं बने,यह प्रेम का सेतु बन जाए,
भारत का हर नागरिक,हर भारतीय से जुड़ जाए।
किसी जुबान को ऊँचा कहकर,दूजी को छोटा न करें,
हर भाषा की मधुर ध्वनि को,श्रद्धा से स्वीकार करें।
बोलियाँ हमारी धरोहर हैं,इनका गौरव जीवित रखें,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनी भाषाई संस्कृति को सुरक्षित रखें।
उत्तर से दक्षिण तक गूँजे,पूरब-पश्चिम का सम्मान,
हर भाषा में बसता अपना,भारत का सुंदर अरमान।
शब्द अनेक, स्वर अनेक,फिर भी भारत एक रहे,
भाषा चाहे कोई भी हो,दिल में भारत नेक रहे।
भाषा को हथियार न बनाएं,इसे प्यार की आवाज़ करें,
विविध सुरों को साथ मिलाकर,एकता का साज़ करें।
किशन भारतीय भाषाओं का सम्मान हमारा धर्म बने,
भाषा विभाजन नहीं,भारत के जुड़ाव का पर्व बने।
