दबंगई से नहीं,विनम्रता से अपनी पहचान बनाओ,
मीठे बोलों से हर दिल में सम्मान जगाओ।
अहंकार की राह छोड़,संस्कारों की राह अपनाओ,
अपने श्रेष्ठ आचरण से जीवन में उजियारा लाओ।
चेहरे की चमक नहीं,चरित्र की रोशनी साथ रखो,
मुश्किल घड़ी में भी इंसानियत का हाथ रखो।
ऊँचा उठो तो अपने भीतर विनम्रता का भाव रखो,
हर रिश्ते में प्रेम,सम्मान और विश्वास रखो।
ताकत का अभिमान नहीं,सहने का हुनर दिखाओ,
जो गिर जाए राह में,उसे उठाकर गले लगाओ।
जीतकर भी किसी के दिल को कभी मत दुखाओ,
अपने सद्व्यवहार से विरोधी को भी अपना बनाओ।
ऐसा चरित्र बनाओ जिसे दुनियाँ मिसाल कहे,
तुम्हारी विनम्रता हर दिल की आवाज़ कहे।
तुम दूर रहो फ़िर भी तुम्हारी याद पास रहे,
तुम्हारा व्यवहार ही तुम्हारी सबसे बड़ी पहचान रहे।
ऐसा मूल्यवान बनो कि खोने वाला पछताए,
तुम जैसा विनम्र इंसान फिर दुनियाँ में न पाए।
किशन धन-दौलत मिट जाए,मगर चरित्र अमर रह जाए,
तुम्हें खोकर कोई उम्रभर तुम्हें ही ढूँढ़ता रह जाए।
