अपने मन को इतना निर्मल,इतना विशाल बनाओ,
सुख हो या दुःख जीवन में,समभाव का दीप जलाओ।
बदलावों के तूफ़ानों में भी धैर्य की शरण में रहना,
रब की रज़ा में राज़ी रहकर,हर पल हँसते रहना।
कभी धूप मिले जीवन में,कभी छाँव का साथ मिले,
कभी फूलों की राह मिले,कभी काँटों की सौगात मिले।
जो हर मौसम में मुस्काए,वही सच्चा इंसान है,
जिसका मन संतोषी हो,उसका हृदय ही महान है।
हर परिवर्तन को जीवन का नया संदेश समझना,
हर कठिनाई में छिपे हुए अनुभव को पहचानना।
मन की शांति को कभी हालातों पर मत हारने देना,
हृदय के पावन आँगन में शिकायतों को मत ठहरने देना।
जो मिला उसे प्रसाद समझो,जो छूटा उसे जाने दो,
रब की मर्ज़ी पर विश्वास रखो,मन को सहज हो जाने दो।
हर इच्छा पूरी हो,यह जीवन का दस्तूर नहीं,
रज़ा में राज़ी रहने जैसा कोई सुख भरपूर नहीं।
मन ऐसा हो कि आँधियों में भी विश्वास न डगमगाए,
हृदय ऐसा हो कि पीड़ा में भी प्रेम का दीप जल जाए।
किशन हर परिस्थिति में खुश रहना सबसे बड़ी कला
रज़ा में राज़ी रहना ही आत्मशांति की निर्मल धारा।



