आजक़ल गरीब की मदद भी कैमरे के सामने होती है,
सेवा से ज्यादा तस्वीरों की चर्चा होती है।
जिस हाथ में दान हो,उसी हाथ में कैमरा रहता है,
इंसान कम,सोशल मीडिया का चेहरा ज्यादा दिखता है।
भूखे को रोटी मिले,इससे पहले वीडियो बनता है,
दर्द से ज्यादा अब लाइक और कमेंट का हिसाब चलता है।
जिसे सहारे की जरूरत है,उसे प्रचार मिल जाता है,
नेकी का छोटा सा काम भी दुनियाँ भर में दिखाया जाता है।
सच्ची सेवा तो वो है,जिसका कोई गवाह न हो,
जिसमें उपकार का एहसास हो,मगर अहंकार न हो।
दाएं हाथ से दो तो बाएं हाथ को खबर न हो,
किसी की मज़बूरी बिके,ऐसा कोई हुनर न हो।
किसी की गरीबी को अपनी प्रसिद्धि का साधन मत बनाओ,
मदद करो तो उसके सम्मान को भी साथ बचाओ।
जिसके पास कुछ नहीं,उसका स्वाभिमान तो रहने दो,
रोटी के साथ उसके चेहरे की मुस्कान भी रहने दो।
सेवा कैमरे की मोहताज नहीं,दिल की आवाज़ होती है,
नेकी की ख़ुशबू हमेशा ख़ामोशी में भी खास होती है।
किशन वीडियो मिट जाएगा,मगर कर्मों की छाप रहेगी,
दिखावे की वाहवाही नहीं,सच्ची सेवा ही साथ रहेगी।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318


