दर्द अपना हो तो आँखों में आँसू आ जाते हैं,
अपने ज़ख्म हों तो हम रातों को जाग जाते हैं।
अपने दर्द को महसूस करना तो सहज-सा एहसास है,
पर पराए दर्द में रो पड़ना इंसानियत की आस है।
जो केवल अपने घावों की पीड़ा समझ पाता है,
वह जीवन तो जीता है,मगर दिल कहाँ जी पाता है।
किसी और की कराह सुनकर जो ठहर जाता है,
वही भीड़ में सच्चा इंसान कहलाता है।
किसी भूखे की आँखों में जब खालीपन दिखाई दे,
किसी बेबस के चेहरे पर छिपा दर्द सुनाई दे।
जो अपने सुख से पहले उसका दुःख बाँटने लगे,
समझो उसके भीतर इंसानियत के दीप जलने लगे।
दूसरों के आँसू पोंछना ही सबसे बड़ी बंदगी है,
किसी टूटे दिल को संभालना ही सच्ची जिंदगी है।
जिस हृदय में पराए दर्द के लिए भी जगह रहती है,
वहीं इंसानियत हर साँस में जीवित रहती है।
अपने दर्द का एहसास कहता है,हाँ,हम जीवित हैं,
पर दूसरों का दर्द समझें तो जानें,हम संवेदनशील हैं।
किशन धड़कना तो हर दिल की मजबूरी और पहचान है,
पर किसी और के दर्द में धड़क उठे,वही इंसान है।
