प्रार्थनाओं में छिपी पुकार,वह सुनता हर बार है,
संघर्षों में टूटे मन का,उसे पूरा समाचार है।
तकलीफ़ों में कितना सहा,वह सब रखता हिसाब है,
ऊपरवाले की अदालत में,न कोई झूठा जवाब है।
किसने आँसू पीकर भी,चेहरे पर मुस्कान रखी,
किसने मुश्किल राहों में,उम्मीद की पहचान रखी।
किसने संयम थाम लिया,जब हालात हुए विकराल,
सबका लेखा लेकर ही,उसके दरबार में फैसला कमाल
कर्म हमारे मौन सही,पर उनकी आवाज़ गहरी है,
नेकी हो या गुनाह,हर बात वहाँ ठहरी है।
दुनियाँ से छिप जाए चाहे,अपना कोई भी कर्म,
उसकी नज़र से नहीं छिपता,जीवन का कोई धर्म।
इसलिए अँधेरों में भी,विश्वास का दीप जलाए रखना,
दर्द मिले तो सब्र रखकर,कर्म की राह अपनाए रखना।
दुआ के साथ मेहनत करना,नीयत साफ़ बनाए रखना,
जजमेंट ऊपरवाले पर छोड़,खुद को सच्चा बनाए रखना।
वहाँ न धन की चलती,न पद का कोई अभिमान,
न चेहरा काम आता है,न झूठी पहचान।
किशन प्रार्थना,संघर्ष,तकलीफ़,संयम कर्म,सबका होगा हिसाब,
ऊपरवाले की अदालत में,न्याय होगा,बिना किसी पक्षपात।
