हरिपुरा में हुई साढ़े 5 लाख की आॅनलाइन ठगी का 2 साल पुराना मामला
फ़िरोज़ खान
बारां। साढ़े 5 लाख रूपए की आॅनलाइन ठगी के 2 साल पुराने मामले में कार्यवाही नहीं होने पर पीड़ित ने शुक्रवार को कोटा पहुंचकर आईजी को दूसरी बार ज्ञापन सौंपा और न्याय दिलाने की गुहार की। ज्ञापन में पीड़ित ने बताया कि घटना को 2 साल होने को आए, लेकिन न तो मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया और न ही शेष राशि दिलाई गई। पुलिस ने मामला ही ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
ज्ञापन में हरिपुरा निवासी पीड़ित कौशल कुमार मीणा ने बताया कि 20 जून 2024 को उसके साथ 5 लाख 66 हजार 500 रूपए की आॅनलाइन ठगी हो गई थी। लेकिन पुलिस साइबर ठग से मात्र एक लाख 10 हजार रूपए ही बरामद कर सकी है। शेष 4 लाख 56 हजार 500 रूपए अभी तक बरामद नहीं किए जा सके और न ही मुख्य आरोपी को पकड़ा जा सका है।
पीड़ित ने बताया कि 10 अप्रैल को भी उसने कोटा जाकर आईजी के मौजूद नहीं होने पर अधीनस्थ अधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। तब उसे जल्दी ही कार्यवाही करने का भरोसा दिया गया था। लेकिन उसके बाद कोई ध्यान नहीं दिया गया। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। कौशल ने ज्ञापन में बताया कि वह गरीब व्यक्ति है। उसकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को ठगों ने एक पल में उड़ा दिया। लेकिन पुलिस आश्वासन देकर उसे टालती आ रही है।
यह था मामला-
उल्लेखनीय है कि 22 जून 2024 को प्रार्थी के मोबाइल नम्बर 9928599306 पर अनजान नम्बर 8235879169 से काॅल आया। जो ट्रू काॅलर पर अभिषेक बैरागी, एयू बैंक क्रेडिटकार्ड डिपार्टमेंट प्रदर्शित हो रहा था। काॅल करने वाले ने खुद को बैंककर्मी बताते हुए कहा कि आपका अनावश्यक चार्ज कट रहा है। मैं लिंक भेज रहा हूं, जिसे डाउनलोड करने पर अनावश्यक चार्ज कटना बंद हो जाएगा और जो अब तक कटा है, वह भी वापस आपके खाते में आ जाएगा। प्रार्थी को समझ मंे नहीं आने पर उसने मोबाइल अपने 15 वर्षीय पुत्र को सौंप दिया और मामला समझने को कहा।
इसके बाद उसके पुत्र को झांसे में लेकर ठग ने बारां में चारमूर्ति चैराहा स्थित एयू बैंक की शाखा मंे प्रार्थी व उसकी पत्नी के नाम एफडी के रूप में जमा 5 लाख 38 हजार रूपए की उड़ा लिए। उसी दिन शाम 6 बजे बैंक से मिली सूचना पर हम दोनों पति-पत्नी गांव से तुंरत बारां पहंुचे और बैंक में जानकारी ली। ठग द्वारा बैंक खाते हैक कर 50,000-50,000 हजार रूपए 10 और एक बार 33 हजार 500 रूपए निकाल लिए गए। जो अलग-अलग 7 बैंक खातों में ट्रांसफर करके निकाले जाना प्रदर्शित हो रहा था। प्रार्थी खेती-बाड़ी व मजदूरी करके परिवार का गुजर बसर कर रहा है। एफडी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके भविष्य के लिए कराई थी। उसके पांच बच्चे हैं।
