सारिमुल लस्कर, सिलचर :- एक समय बराक घाटी के विकास का प्रतीक माना जाने वाला काटिगोरा आज अवैध सिंडिकेट माफियाओं का अंधेरा साम्राज्य बन चुका है। नेशनल हाईवे NH-6 से लेकर दूर-दराज के गाँवों की धूल भरी सड़कों तक मेघालय से आने वाले भारी-भरकम ओवरलोडेड चूना पत्थर वाले ट्रकों की अनवरत कतारें बिना किसी रोक-टोक के दौड़ रही हैं।
स्थानीय अवैध स्टोन क्रशर और ईंट भट्टों के अनियंत्रित संचालन ने पूरे इलाके की हवा को जहरीला बना दिया है, जिससे आम नागरिकों का रोजमर्रा का जीवन नरक बन गया है।
पिछले कुछ वर्षों में ओवरलोडेड चूना पत्थर और कोयला ट्रकों की बेलगाम आवाजाही ने काछार जिले के दो महत्वपूर्ण पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। काटिगोरा के निकट बाराक नदी पर स्थित गेमेन ब्रिज (गेमन ब्रिज) बराक घाटी का प्रमुख संचार मार्ग था। भारी ट्रकों के अत्यधिक दबाव से यह पुल कई इंच धंस गया है, जोड़ों में दरारें पड़ गई हैं और वाहन गुजरते ही जोर-जोर से हिलने लगता है। इससे जनजीवन को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सबसे दर्दनाक घटना भंगरपार (भंगरपार) पुल की है। जून 2025 में हरांग नदी पर बना यह पुल दो ओवरलोडेड चूना पत्थर वाले ट्रकों के गुजरते ही पूरी तरह ढह गया। पुल नदी में समा गया, जिससे बाराक घाटी का त्रिपुरा, मिजोरम और मणिपुर से संपर्क पूरी तरह कट गया और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इन हादसों के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाए।
ओवरलोडेड वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध, पुलों पर वजन सीमा, नियमित वजन जांच और दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। लेकिन अफसोस, ये सारे निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए। ओवरलोडेड चूना पत्थर सिंडिकेट के ट्रक आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।
काटिगोरा अब सिंडिकेट माफिया और कुछ प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं का ATM बन चुका है। दिगरखाल टोल गेट पर जो कुछ हो रहा है, उसे हर कोई जानता है, लेकिन बोलने की हिम्मत किसी में नहीं। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता इन माफियाओं से गहरे संबंध रखते हैं। ओवरलोडेड ट्रक बिना किसी रोक-टोक के गुजर रहे हैं और चूना पत्थर की तस्करी खुलेआम जारी है।
माननीय परिवहन मंत्री, आपके दिगरखाल टोल गेट पर असल में क्या चल रहा है? आम लोगों का सवाल है — क्या यह टोल गेट जनता की सुविधा के लिए है या सिंडिकेट के हितों की रक्षा के लिए?
NH-6 की हालत अत्यंत दयनीय है। लगातार ओवरलोडेड ट्रकों के दबाव से सड़क उखड़ गई है, बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और चारों ओर धूल के गुबार छाए रहते हैं। काटिगोरा-बदरपुर खंड और दिगरखाल क्षेत्र लगभग आवागमन के अयोग्य हो चुके हैं। क्षतिग्रस्त पुल अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। रोजाना आवागमन, सामान परिवहन और आपात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
इसके अलावा काटिगोरा में पहाड़ियां काटी जा रही हैं, अभयारण्य क्षेत्र नष्ट किए जा रहे हैं।
घनी आबादी वाले इलाके में स्टार सीमेंट की नई फैक्ट्री स्थापित की गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि फैक्ट्री बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पहाड़ काटे गए। वन विभाग के एक हिस्से पर मिलीभगत का गंभीर आरोप है।
उदाहरण- लक्ष्मीपुर पार्ट-3 क्षेत्र में आवासीय घरों और सरकारी स्कूलों के ठीक बगल में क्रशर यूनिट और ईंट भट्ठे खुल गए हैं।
असम स्टोन क्रशर स्थापना एवं नियमन नियम 2013 के अनुसार आवासीय क्षेत्रों और स्कूलों से कम से कम 500 मीटर दूरी अनिवार्य है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और प्रदूषण नियंत्रण कानूनों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
स्कूल जाते बच्चे सुबह से धूल और शोर में घिरे रहते हैं। बुजुर्ग श्वसन रोग से जूझ रहे हैं। भूजल दूषित हो गया है, फसलें बर्बाद हो रही हैं और स्थानीय जैव-विविधता तेजी से खत्म हो रही है।
एक ईंट भट्ठे में पहले ही बहुत मौत हो चुकी है, फिर भी दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
यह सारी अराजकता प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की आँखों के सामने हो रही है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भ्रष्टाचार विरोधी छवि और पारदर्शी शासन की तारीफ की जा रही है, लेकिन उनके ही क्षेत्र में चल रहा यह सिंडिकेट राज उनके शासन की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है।
स्थानीय लोग अब चुपचाप तमाशा देखने को तैयार नहीं हैं। वे अवैध चूना पत्थर के स्रोत की सख्त जांच, तस्करी पर पूर्ण रोक, ओवरलोडेड ट्रकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, दिगरखाल टोल गेट में पारदर्शिता, पहाड़ियों और जंगलों की कटाई बंद करने तथा लापरवाह अधिकारियों पर सख्त एक्शन की मांग कर रहे हैं।
यदि अवैध क्रशर, ईंट भट्ठों और सीमेंट यूनिटों की पर्यावरणीय मंजूरी की जांच नहीं की गई और सभी अवैध गतिविधियाँ तुरंत बंद नहीं की गईं, तो इस क्षेत्र में बड़ा पर्यावरणीय आपदा और जन आक्रोश अपरिहार्य हो जाएगा।
काटिगोरा अपनी खोई हुई शान, स्वच्छ हवा, स्वस्थ जीवन और हरे-भरे पहाड़ों को वापस पाने का इंतजार कर रहा है। यदि प्रशासन इस अवैध साम्राज्य के खिलाफ तुरंत सख्त अभियान नहीं चलाता, तो यह क्षेत्र अगली पीढ़ी के लिए सिर्फ खंडहर बनकर रह जाएगा।
बारक घाटी के आम लोग अब सिर्फ एक उम्मीद लगाए बैठे हैं
अगली रिपोर्ट में कटिगोरा और कालाईन के -पत्थर माफिया के नाम सामने लाए जाएंगे।
