• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Monday, May 25, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

यूजीसी के नए समानता विनियम 2026:- सामाजिक न्याय बनाम संवैधानिक संतुलन -एक समग्र, संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
January 29, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

RelatedPosts

शिक्षकों को चुनावी प्रक्रिया, जनगणना,आर्थिक सर्वेक्षण, पल्स पोलियो अभियान, स्थानीय निकायों के डाटा संकलन, आवारा कुत्तों की गणना जैसे कार्यों में लगाना- बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप- 31 जुलाई 2026 तक रोक-क्या शिक्षक शिक्षा दें या शासन के गैर- शैक्षणिक कार्य करें? -समग्र व्यापक विश्लेषण

इबोला का नया वैश्विक खतरा- कोरोना के बाद दुनियाँ फिर एक भयावह स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर?- डब्ल्यूएचओ ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया -भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई,2026 स्थगित-समग्र व्यापक विश्लेषण

सुंदरता बनाम सुरक्षा-औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (सीडीएससीओ) की सख़्ती- कॉस्मेटिक इंजेक्शन के नाम पर बढ़ते स्वास्थ्य खतरे पर बड़ा प्रहार- समग्र व्यापक विश्लेषण

यदि झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान नहीं जोड़ा गया, तो यह नियम सामाजिक न्याय के बजाय सामाजिक विभाजन का कारण बन सकते हैं?

सामाजिक न्याय के नाम पर बनाए जाने वाले कानूनों नियमों में संविधान के अनुच्छेद 21 तथा 14 (समानता का अधिकार) और नेचुरल जस्टिस (प्राकृतिक न्याय) की मूल भावना का पालन करना जरूरी -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में दिनांक 28 जनवरी 2026 को संसद के बजट सत्र के प्रथम दिन माननीय राष्ट्रपति ने संसद के सभी सदनों को संबोधित करते हुए कहा 2014 की शुरुआत में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं केवल 25 करोड़ नागरिकों तक ही पहुंच पा रही थीं। मेरी सरकार के निरंतर प्रयासों से आज लगभग 95 करोड़ भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है,तो दूसरी ओर शिक्षा क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा के लिए सवर्णो का आंदोलन छिड़ाहुआ है।हम जानते हैं कि वैश्विक स्तरपर भारत का उच्च शिक्षा तंत्र केवल ज्ञान का केंद्र नहीं है,बल्कि यह सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों का संवाहक भीहै।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) इस पूरे ढांचे का नियामक स्तंभ है,जिसके नियम देश के लाखों छात्रों, शिक्षकों और प्रशासकों के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। 13 जनवरी 2026 को यूजीसी द्वारा अधिसूचित और 15 जनवरी से प्रभावी किए गए उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026 इसी परंपरा का हिस्सा हैं। इन नियमों का घोषित उद्देश्य एससी,एसटी और अब पहली बार ओबीसी समुदायों के छात्रों व शिक्षकों को जातिगत भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करना है। उद्देश्य निस्संदेह संवैधानिक है,किंतु जिस प्रकार से दो महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं,मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि उन्होंने पूरे देश में गंभीर संवैधानिक, कानूनी और नैतिक बहस को जन्म दे दिया है।इन नियमों के लागू होते ही बिहार,उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश,राजस्थान सहित कई राज्यों में सवर्ण समाज के संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। विरोध का कारण आरक्षण नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया में असमानता और झूठी शिकायतों पर दंड के प्रावधान का पूर्ण अभाव है।आलोचकों का कहना है कि ये नियम सामाजिक न्याय के नाम पर संविधान के अनुच्छेद 21 तथा 14 (समानता का अधिकार) और नेचुरल जस्टिस (प्राकृतिक न्याय) की मूल भावना को कमजोर करते हैं।
साथियों बात अगर हम यूजीसी का अधिकार क्षेत्र और उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी को समझने की करें तो यूजीसी जिसे अंग्रेज़ी में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन कहा जाता है,देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था का केंद्रीय नियामक निकाय है। 12वीं के बाद स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी या शोध, हर स्तर पर छात्र-छात्राएं किसी न किसी रूप में यूजीसी के नियमों के अधीन आते हैं। यूजीसी का दायित्व केवल फंडिंग या मान्यता देना नहीं है,बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि शिक्षा प्रणाली संवैधानिक मूल्यों, न्याय, समानता और मानव गरिमा के अनुरूप संचालित हो।इसी दायित्व के तहत पहले एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून,आंतरिक शिकायत समितियां और समान अवसर केंद्र बनाए गए। अब 2026 के विनियमों में दो बड़े संशोधन किए गए हैं,पहला ओबीसी समुदाय को भी औपचारिक रूप से जातिगत भेदभाव के दायरे में शामिल किया गया है,यह एक ऐतिहासिक कदम है परंतु दूसरा झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत पाए जाने पर शिकायतकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी,यह इसके क्रियान्वयन में संतुलन की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। बस इसी बात पर सारे देश में स्वर्ण संगठन आंदोलन कर रहे हैं और हंगामा आगे और बढ़ाने की संभावना ज़ोरो से व्यक्ति के जारी है।
साथियों बात अगर हम इन संशोधनों को गहराई से समझने की करें तोपहला संशोधित प्रावधान:ओबीसी को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल करना,यूजीसी द्वारा किया गया पहला बड़ा संशोधन यह है कि अब अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) के छात्र और शिक्षक भी उसी तरह जातिगत भेदभाव के संरक्षण दायरे में आ गए हैं,जैसे एससी और एसटी समुदाय पहले से थे। यह निर्णय सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ओबीसी समुदाय की बड़ी आबादी आज भी शिक्षा संस्थानों में सूक्ष्म और अप्रत्यक्ष भेदभाव का सामना करती है।हालांकि, आलोचना यह नहीं है कि ओबीसी को सुरक्षा क्यों दी गई, बल्कि यह है कि सुरक्षा का दायरा एकतरफा बना दिया गया है। यदि किसी सामान्य (जनरल कैटेगरी) वर्ग केछात्र या शिक्षक पर ओबीसी, एससी या एसटी से जुड़े किसी व्यक्ति द्वारा जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया जाता है,तो उस पर कठोर संस्थागत प्रक्रिया शुरू हो जाती है जांच, निलंबन, प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक बदनामी,ये सभी उस व्यक्ति के जीवन को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकते हैं।समस्या तब और गहरी हो जाती है जब अंततः शिकायत झूठी सिद्ध हो जाए। नियमों में ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। यह एकतरफा संरचना न केवल असंतुलित है, बल्कि संविधान की आत्मा के विरुद्ध भी है। दूसरा संशोधित प्रावधान:-झूठी शिकायतों पर दंड कापूर्ण अभाव,यूजीसी विनियम 2026 का दूसरा और सबसे विवादास्पद संशोधन यह है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत पाए जाने पर शिकायतकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। पहले के नियमों और कई विश्वविद्यालयीय कोड ऑफ कंडक्ट में कम से कम अनुशासनात्मक कार्रवाई का विकल्प खुला रहता था। अब उसे पूरी तरह हटा दिया गया है। यह प्रावधान आलोचकों के अनुसार कानूनी दुरुपयोग को संस्थागत वैधता देता है। किसी भी जनरल कैटेगरी के व्यक्ति के खिलाफ यदि जातिगत भेदभाव का आरोप लगता है, तो वह दोषी सिद्ध होने से पहले ही सामाजिक रूप से अपराधी मान लिया जाता है। उसकी नौकरी, शोध, पदोन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा सब कुछ दांव पर लग जाता है। लेकिन यदि वर्षों बाद वह निर्दोष साबित होता है, तब भी न्याय अधूरा रह जाता है, क्योंकि जिसने झूठा आरोप लगाया, उस पर कोई जवाबदेही नहीं होती।
साथियों बात अगर हम नेचुरल जस्टिस और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन इसको समझने की करें तो,भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है। नेचुरल जस्टिस का मूल सिद्धांत है,कोई भी व्यक्ति बिना सुनवाई के दोषी नहीं ठहराया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर ही दंड मिलेगा। यूजीसी के नए विनियम इन दोनों सिद्धांतों को कमजोर करते प्रतीत होते हैं।जब एक वर्ग को पूर्ण संरक्षण और दूसरे वर्ग को केवल दंड का सामना करना पड़े, तो यह समानता नहीं, बल्कि संरक्षित असमानता बन जाती है। न्यायपालिका ने भी कई फैसलों में कहा है कि सामाजिक न्याय का अर्थ प्रतिशोध नहीं, बल्कि संतुलन है। यदि झूठी शिकायतों पर कोई अंकुश नहीं होगा,तो यह व्यवस्था अंततः उसी सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाएगी, जिसे बचाने के लिए यह नियम बनाए गएहैं।
साथियों बात अगर हम संशोधन की स्थिति के बाद शिक्षा क़े माहौल और सामाजिक ध्रुवीकरण को समझने की करें तो,इन संशोधित नियमों का सबसे बड़ा प्रभाव विश्वविद्यालय परिसरों के शैक्षणिक वातावरण पर पड़ेगा। शिक्षक और प्रशासक निर्णय लेने से डरेंगे, छात्र खुलकर संवाद करने से हिचकेंगे और हर असहमति को जातिगत चश्मे से देखा जाने लगेगा। इससे विश्वास का संकट पैदा होगा, जो किसी भी ज्ञान- आधारित संस्थान के लिए घातक है।साथ ही, सवर्ण और आरक्षित वर्गों के बीच पहले से मौजूद सामाजिक तनाव और गहरा हो सकता है। यदि न्याय एकतरफा प्रतीत होगा,तो प्रतिक्रिया भी सामाजिक स्तर पर असंतुलित होगी। यह स्थिति अंततः उसी सामाजिक न्याय के उद्देश्य को कमजोर कर देगी, जिसके लिए ये नियम बनाए गए हैं।
साथियों बात अगर हम यूजीसी समानता विनियम, 2026:- सुप्रीम कोर्ट में संभावित चुनौती क़े संक्षिप्त ढांचे को समझने की करें तो (1)अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन, यूजीसी के नए विनियम जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों में एकतरफा संरक्षण प्रदान करते हैं। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के शिकायतकर्ताओं को पूर्ण सुरक्षा दी गई है, जबकि जनरल कैटेगरी के आरोपी व्यक्ति को समान कानूनी संरक्षण नहीं मिलता। झूठी शिकायत सिद्ध होने पर भी शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक प्रावधान न होना, कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण के सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है।(2) नेचुरल जस्टिस (प्राकृतिक न्याय) का हनन,विनियमों में आरोपी के लिए प्रभावी सेफगार्ड्स का अभाव है। बिना प्रारंभिक जांच के कठोर संस्थागत कार्रवाई, तथा अंततः शिकायत झूठी पाए जाने पर भी शिकायतकर्ता की जवाबदेही न तय करना, (3) आधार केवल शिकायतकर्ता की जाति और आरोपी की सामाजिक श्रेणी है, न कि कृत्य की गंभीरता या प्रमाण। सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांत के अनुसार, कोई भी वर्गीकरण,बुद्धिसंगत आधार और उद्देश्य से तार्किक संबंध पर खरा उतरना चाहिए। यह विनियम इस कसौटी पर विफल होते हैं। (4) न्यायिक समीक्षा से बचने का प्रयास,झूठी शिकायतों पर दंड हटाना संस्थागत दुरुपयोग को बढ़ावा देता है और न्यायिक हस्तक्षेप को अप्रभावी बनाता है। यह रूल ऑफ़ लॉ और डयू प्रोसेस की अवधारणा को कमजोर करता है।(5) अनुपातहीनता का सिद्धांत, भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बनाए गए उपाय अत्यधिक कठोर हैं और कम दखल वाले विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं अपनाया गया। इससे अधिकारों पर अनावश्यक और अनुपातहीन प्रतिबंध लगता है।
साथियों बात अगर हम इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के संदर्भ से समझने की करें तो यदि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें,तो संयुक्त राष्ट्र की यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स और इंटरनेशनल कोवनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स दोनों ही यह स्पष्ट करते हैं कि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष,संतुलित और जवाबदेह होनी चाहिए। किसी भी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कानून में फ्रिवोलस या मैलिशियस शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा तंत्र मौजूद होता है। यूरोप अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी नस्लीय या जातीय भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून हैं, लेकिन वहाँ झूठे आरोपों पर दंड का स्पष्ट प्रावधान होता है। भारत में यदि यूजीसी के नियम इस संतुलन को नहीं अपनाते, तो यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सवाल खड़े कर सकता है कि क्या भारत का उच्च शिक्षा तंत्र निष्पक्षता के वैश्विक मानकों पर खरा उतरता है।
अतः अगर हम अपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यूजीसी के समानता विनियम, 2026 का उद्देश्य सही है,जातिगत भेदभावका अंत और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण लेकिन उद्देश्य की पवित्रता, साधनों की त्रुटियों को नहीं ढकसकती ओबीसी को सुरक्षा देना जरूरी है,लेकिन उसी के साथ न्यायिक संतुलन,उत्तरदायित्व और समानता भी उतनी हीआवश्यक है।यदि झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान नहीं जोड़ा गया, तो यह नियम सामाजिक न्याय के बजाय सामाजिक विभाजन का कारण बन सकते हैं। संविधान का अनुच्छेद 14 और नेचुरल जस्टिस केवल कानूनी शब्द नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हैं। यूजीसी और सरकार की जिम्मेदारी है कि वे इस आत्मा का सम्मान करें और नियमों में आवश्यक संशोधन कर न्याय को संतुलित, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाएं।

kishan2 1
संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

शिक्षकों को चुनावी प्रक्रिया, जनगणना,आर्थिक सर्वेक्षण, पल्स पोलियो अभियान, स्थानीय निकायों के डाटा संकलन, आवारा कुत्तों की गणना जैसे कार्यों में लगाना- बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप- 31 जुलाई 2026 तक रोक-क्या शिक्षक शिक्षा दें या शासन के गैर- शैक्षणिक कार्य करें? -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 24, 2026
0
16

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्णय शिक्षा की गरिमा, संवैधानिक सीमाओं और विधि के शासन, तीनों की एक साथ रक्षा करने...

इबोला का नया वैश्विक खतरा- कोरोना के बाद दुनियाँ फिर एक भयावह स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर?- डब्ल्यूएचओ ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया -भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई,2026 स्थगित-समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 23, 2026
0
10

इबोला- दुनियाँ में भय का पर्याय-संक्रमण की बढ़ती रफ्तार, बड़े शहरों तक पहुंचना, अंतरराष्ट्रीय स्तरपर गंभीर चिंता का विषय व...

सुंदरता बनाम सुरक्षा-औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (सीडीएससीओ) की सख़्ती- कॉस्मेटिक इंजेक्शन के नाम पर बढ़ते स्वास्थ्य खतरे पर बड़ा प्रहार- समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 22, 2026
0
8

सुंदरता की अंधी दौड़ पर सरकार की रोक- औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और सीडीएससीओ की नई चेतावनी 21...

जातिगत जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक मुहर चुनौती याचिका 20 मई 2026 को खारिज- संवैधानिक वैधता, सामाजिक न्याय और भारत की नई नीति- व्यवस्था की दिशा क़ा व्यापक समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 21, 2026
0
10

भारत की जनगणना 2027 डिजिटल इंडिया और डेटा- आधारित गवर्नेंस के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियानों में से एक माना जा...

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख-19 मई 2026 को सभी याचिकाएं खारिज- संविधान के अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या- जनसुरक्षा बनाम पशु अधिकार की बहस में नया मोड़

by Page 3 News International Desk
May 20, 2026
0
14

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 मई 2026 को दिया गया निर्णय आने वाले समय में नगर निकायों, राज्य सरकारों, पशु कल्याण...

अरावप्युचितं कार्यमातिथ्यं गृहमागते। छेत्तुः पार्श्वगताच्छायां नोपसंहरते द्रुमः॥-शत्रु भी यदि अपने घर पर आ जाए तो उसका भी उचित आतिथ्य सत्कार करना चाहिए

by Page 3 News International Desk
May 20, 2026
0
8

आओ रिश्ते,आतिथ्य सत्कार मज़बूती से निभाएं कुछ कह गए कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए - मैं सही...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

May 2026
MTWTFSS
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
« Apr    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • E-Magazine
  • Management Team
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.