-‘साफ सरयू सप्ताह’ के तहत तुलसी घाट से श्रीराम मंदिर क्षेत्र तक चला जनजागरूकता अभियान
-31 को सरयू घाट पर जुटेंगे पांच हजार लोग
महेंद्र त्रिपाठी
अयोध्या। रामनगरी की सांस्कृतिक गरिमा, मंदिरों की पवित्रता और मां सरयू की निर्मलता बनाए रखने के लिए चिंतन संस्था जनजागरूकता अभियान चला रही है। दीपोत्सव-2026 से पूर्व आयोजित ‘साफ सरयू सप्ताह’ के तहत बुधवार को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से यह समझाने का प्रयास किया कि अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए आस्था के साथ स्वच्छता को भी जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
तुलसी घाट, मां सरयू आरती स्थल, लता मंगेशकर चौक और श्रीराम मंदिर क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कचरा प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों से अपील की गई कि पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट नदी अथवा घाटों पर न फेंकें। कचरे का निस्तारण निर्धारित स्थानों पर ही करें, ताकि सरयू की निर्मल धारा और घाटों की स्वच्छता बनी रहे।
महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में तथा आलोक सिंह राना के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में स्वच्छता को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त भारत भार्गव और मुख्य सफाई निरीक्षक राजेश झा भी उपस्थित रहे।
चिंतन संस्था की संस्थापक, निदेशक एवं लेखिका भारती चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में संचालित ‘वेस्ट नो मोर इन अयोध्या’ परियोजना का उद्देश्य कचरे के स्रोतों की पहचान, जनजागरूकता और बेहतर कचरा प्रबंधन के माध्यम से मां सरयू की स्वच्छता के लिए स्थायी प्रयास करना है। अभियान में विमल कुमार, विनय यादव, अरविंद सोनू, रवि सिंह, सुलभ मिश्र और जितेंद्र कुमार ने सक्रिय सहभागिता की।
31 को सरयू तट पर होगा स्वच्छता का महाअभियान का समापन
-31 अक्टूबर को मां सरयूघाट पर मेगा क्लीनअप ड्राइव के साथ होगा। नगर निगम और आमजन की संयुक्त भागीदारी से आयोजित होने वाले इस अभियान में पांच हजार लोगों की सहभागिता का लक्ष्य रखा गया है। आयोजकों ने संत समाज, सामाजिक संगठनों, युवाओं, व्यापारियों, श्रद्धालुओं और अयोध्यावासियों से अभियान में शामिल होने की अपील की है।
संदेश दिया कि रामनगरी की स्वच्छता केवल सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक आस्था का विषय है।

