102 डॉलर पार तेल ने बजाई खतरे की घंटी! क्या दुनियाँ फ़िर 1970 के दशक जैसे तेल संकट की ओर बढ़ रही है,जिसने पूरी अर्थव्यवस्था को हिला दिया था?
क़्या दुनियाँ एक और बड़े तेल संकट की ओर बढ़ रहीहै? – महंगाई पेट्रोल-डीजल की कीमत और अमेरिका-ईरान युद्ध मानवीय जीवन के रोजमर्रा क़ी आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच फ़िर तेज हुआ सैन्य टकराव अब केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है,बल्कि इसके प्रभाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा,समुद्री व्यापार, महंगाई,शेयर बाजार और अमेरिकी राजनीति तक को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।10 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेन्ट कच्चा तेल लगभग 102.59 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।यह जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार जाने की स्थिति है।सवाल अब यह है कि क्या दुनियाँ 1970 के दशक जैसे किसी नए बड़े तेल संकट की ओर बढ़ रही है? उधर ट्रंप की हुंकार,सुनाई दे रही है के नवंबर चुनाव के बाद युद्ध खत्म हो जाएगा, इस पूरे संकट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की राजनीति भी महत्वपूर्ण हो गई है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह जानकारी देना चाहूंगा क़ि संभावतः 3 नवंबर 2026 अमेरिका में मध्यवर्ती चुनाव होने वाले हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि के मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद ईरान युद्ध समाप्त हो जाएगा।उनका आरोप है कि तेहरान जानबूझकर संघर्ष को चुनाव तक खींचना चाहता हैताकि अमेरिका में ईंधन की ऊंची कीमतें बनी रहें, महंगाई बढ़े और रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो।ट्रंप का दावा है कि ईरान एक ऐसी अमेरिकी सरकार चाहता है जो कमजोर हो और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने में सक्षम न हो।ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि युद्ध खत्म होते ही तेल और गैस की कीमतें तेजी से नीचे आ सकती हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा है कि चुनाव के बाद तेल की कीमतें नीचे गिरेंगी और अमेरिकी गैसोलीन कीमत 2 डॉलर प्रति गैलन से नीचे जा सकती है। लेकिन यह राजनीतिक दावा है, बाजार की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
साथियों बात अगर हम चुनाव और तेल,क्या दोनों का सीधा कनेक्शन है? इसको समझने की करें तो,अमेरिकी मध्यावधि चुनाव अब ट्रंप के लिए केवल कांग्रेस का चुनाव नहीं रह गया है। महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमत और ईरान युद्ध मतदाताओं के रोजमर्रा के आर्थिक अनुभव को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए ट्रंप युद्ध को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ नेतृत्व और राजनीतिक क्षमता के प्रश्न के रूप में भी प्रस्तुत कर रहे हैं,यानी संदेश यह कि ईरान के सामने मजबूती से खड़ा होने वाला नेता कौन है? लेकिन दूसरी तरफ यही रणनीति जोखिम भी पैदा करती है।यदि युद्ध लंबा खिंचता है तेल 102 डॉलर से ऊपर बना रहता है और अमेरिकी परिवारों को पेट्रोल, परिवहन और खाद्य पदार्थों की महंगाई झेलनी पड़ती है, तो युद्ध की राजनीतिक कीमत रिपब्लिकन पार्टी को चुकानी पड़ सकती है।ट्रंप की लोकप्रियता में कमजोरी और कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवारों का उनसे दूरी बनाए रखना इसी राजनीतिक चिंता का सटीकता से संकेत माना जा रहा है।
साथियों बात अगर हम होर्मुज में बढ़ता खतरा,तेल की दुनियाँ की सबसे संवेदनशील नस पर दबाव को समझने की करें तो, इस संकट का सबसे खतरनाक केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। दुनियाँ के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और गैस व्यापार से जुड़ा यह समुद्री मार्ग यदि लंबे समय तक बाधित होता है तो इसका असर केवल अमेरिका या ईरान पर नहीं,बल्कि एशिया,यूरोप और भारत समेत पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।हालिया घटनाक्रम में अमेरिका ने पांच ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट करने की घोषणा की,जबकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने जवाब में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों समेत 10 जहाजों को निशाना बनाया। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने अमेरिकी जहाजों पर हमले के ईरानी दावे से इनकार किया है, इसलिए इन दावों को सावधानी से देखा जाना चाहिए।स्थिति को और गंभीर बनाते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चाबहार से आगे ओमान की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों तक प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र बनाने की बात कही है। ईरान का कहना है कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों पर कार्रवाई या प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यदि ऐसा क्षेत्र व्यावहारिक रूप से लागू होता है तो समुद्री बीमा, जहाजों की आवाजाही और माल ढुलाई की लागत पर सटीकता से भारी दबाव पड़ सकता है।
साथियों बात अगर हम,क्या यह एक और बड़ा तेल संकट बन सकता है? इसको समझने की करें तो,सबसे बड़ा खतरा केवल तेल की कीमत बढ़ना नहीं है, बल्कि तेल की वास्तविक आपूर्ति में व्यवधान है। यदि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या लंबे समय तक कम रहती है, टैंकरों को वैकल्पिक और लंबे मार्ग अपनाने पड़ते हैं तथा बीमा कंपनियां युद्ध-जोखिम प्रीमियम बढ़ाती हैं, तो प्रति बैरल कीमत में केवल युद्ध का जोखिम नहीं बल्कि परिवहन और आपूर्ति की अतिरिक्त लागत भी जुड़ जाती है।यही वजह है कि बाजार 102 डॉलर के स्तर को केवल एक मनोवैज्ञानिक सीमा के रूप में नहीं देख रहा। कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि समुद्री मार्ग और ऊर्जा अवसंरचना पर हमले जारी रहे तो कीमत 120 डॉलर या उससे भी ऊपर जा सकती है।दूसरी ओर, युद्धविराम और होर्मुज में सामान्य जहाजरानी बहाल होने पर जोखिम प्रीमियम सटीकता से तेजी से घट सकता है।
साथियों बात अगर हम 5,000 डॉलर का ट्रम्प डिविडेंड चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव, इसको समझने की करें तो,इसी राजनीतिक माहौल में डलास में रिपब्लिकन मध्यावधि सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने एक और बड़ा चुनावी वादा किया। उन्होंने कहा कि यदि रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर नियंत्रण बनाए रखती है तो हर अमेरिकी वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर का ट्रम्प डिविडेंड दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस धन को अमेरिका के भीतर खर्च करना होगा।लेकिन इसके सामने सबसे बड़ा प्रश्न है,पैसा आएगा कहां से? अभी योजना का पूरा वित्तीय ढांचा स्पष्ट नहीं किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार सभी वयस्कों को 5,000 डॉलर देने की लागत 1 ट्रिलियन डॉलर से काफी अधिक हो सकती है;एक अनुमान इसे लगभग 1.35 ट्रिलियन डॉलर तक रखता है। इसे लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी भी आवश्यक होगी। आलोचकों का कहना है कि इतना बड़ा खर्च पहले से भारी बजट घाटे और लगभग 40 ट्रिलियन डॉलर के राष्ट्रीय ऋण पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है तथा महंगाई को सटीकता से बढ़ा सकता है।
साथियों बात अगर हम ट्रम्प एकाउंट्स क्या हैं,और क्या ये 5,000 डॉलर वाले वादे से क़्या अलग हैं? इसको समझने की करें तो,यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ट्रम्प एकाउंट्स और नया 5,000 डॉलर वाला ट्रम्प डिविडेंड एक ही योजना नहीं हैं। ट्रम्प एकाउंट्स बच्चों के लिए बनाए गए कर-लाभ वाले निवेश खाते हैं। पात्र बच्चों के लिए अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से एक बार 1,000 डॉलर का योगदान किया जाता है और परिवार अतिरिक्त धन जमा कर सकते हैं; सामान्य योगदान की वार्षिक सीमा 5,000 डॉलर है। यह पैसा बच्चे के नाम निवेश खाते में बढ़ता है और 18 वर्ष की उम्र के बाद उसके उपयोग के नियम लागू होते हैं।इसके विपरीत नया 5,000 डॉलर ट्रम्प डिविडेंड चुनाव जीतने की स्थिति से जुड़ा वयस्क नागरिकों के लिए प्रस्तावित भुगतान है। इसलिए दोनों योजनाओं को मिलाना सही नहीं होगा।
साथियों बात अगर हम दुनिया के लिए असली खतरा,तेल से आगे की महंगाई को समझने की करें तो, तेल 100 डॉलर के पार जाने का अर्थ केवल पेट्रोल महंगा होना नहीं है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से डीजल, विमान ईंधन,समुद्री परिवहन, औद्योगिक उत्पादन, उर्वरक, प्लास्टिक और अंततः रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। पहले से ऊंची महंगाई वाले देशों के लिए यह नया झटका केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती से रोक सकता है।यही कारण है कि होर्मुज का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इतना महत्वपूर्ण है। एक ओर युद्ध समाप्त होने पर जोखिम प्रीमियम तेजी से घट सकता है और तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है; दूसरी ओर यदि संघर्ष लंबा चलता है, जहाजों पर हमले बढ़ते हैं और वैकल्पिक समुद्री मार्ग भी खतरे में आते हैं तो 100 डॉलर अब ऊपरी सीमा नहीं, बल्कि नई सामान्य कीमत का सटीकता से शुरुआती बिंदु बन सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि क्या दुनियाँ एक नए तेल संकट के मुहाने पर है?फिलहाल इसे पूर्ण वैश्विक तेल संकट कहना जल्दबाजी होगी,लेकिन तेल संकट की सभी महत्वपूर्ण चेतावनियां दिखाई देने लगी हैं 102 डॉलर से ऊपर ब्रेन्ट,होर्मुज में सैन्य तनाव,टैंकरों पर हमले,समुद्री बीमा का जोखिम,वैकल्पिक शिपिंग मार्गों पर दबाव और मध्य-पूर्व के अन्य समुद्री चौकेपॉइंट्स तक फैलता संघर्ष।सबसे निर्णायक सवाल अब यह नहीं है कि तेल 102 डॉलर पार करेगा या नहीं,वह पार कर चुका है। असली सवाल यह है कि क्या 102 डॉलर अस्थायी युद्ध-जोखिम की कीमत है या एक लंबे वैश्विक ऊर्जा संकट की शुरुआत? यदि नवंबर के अमेरिकी चुनाव के बाद युद्ध वास्तव में समाप्त होता है और होर्मुज सामान्य होता है, तो तेल में तेज गिरावट संभव है। लेकिन यदि युद्ध जारी रहता है, तो 120 डॉलर की संभावना से लेकर उससे भी ऊंचे स्तरों तक बाजार का जोखिम खुला रहेगा।इसलिए आने वाले सप्ताह केवल अमेरिका और ईरान के लिए नहीं, बल्कि भारत, चीन, यूरोप और पूरी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा की परीक्षा बनने वाले हैं। होर्मुज में एक जहाज पर हमला अब केवल एक जहाज की घटना नहीं,वह दुनियाँ भर में पेट्रोल,डीजल, महंगाई और आर्थिक विकास की कीमत तय करने वाली घटना बन सकता है।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

