राहों में पत्थर हों तो कदम रुक नहीं जाते हैं,
अँधेरों के डर से कभी सूरज झुक नहीं जाते हैं,
जो पसीने से अपने सपनों की तक़दीर लिखते हैं,
उनके आगे मुश्किलों के पहाड़ भी टिक नहीं पाते हैं।
मंज़िलें विरासत में नहीं,संघर्ष से कमाई जाती हैं,
ठोकरों की चोट से ही हिम्मतें तराशी जाती हैं,
नसीब भी आखिर कब तक मेहनत का रास्ता रोकेगा,
बंद दरवाज़ों में भी कोशिश से राह बनाई जाती है।
किसी को महल मिले जन्म से,किसी को छत नहीं मिलती
किसी को थाली भरी मिले,किसी को रोटी नहीं मिलती,
फिर भी मेहनत की मशाल थामे जो चलता रहता है,
उसके हौसलों के आगे मुफ़लिसी भी नहीं टिकती।
मत पूछो किसके भाग्य में कितनी लकीरें लिखी हैं,
देखो किसकी हथेलियों पर मेहनत की तस्वीरें लिखी हैं,
समाज उसे कमजोर समझकर चाहे जितना ठुकरा दे,
वक़्त ने कर्मवीरों के नाम ही नई तक़दीरें लिखी हैं।
इसलिए गिरकर उठो,हर हार को अपना ज्ञान बनाओ,
दर्द को शक्ति,आँसुओं को संघर्ष की पहचान बनाओ,
किशन जहाँ कोशिशों का कद बड़ा होता है मेरे दोस्त,
वहाँ नसीबों को भी एक दिन झुकना पड़ता है।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318


