दुनियाँ में कितने लोग आज भी भूखे सो जाते हैं,
कितने घरों के चूल्हे बिना जले रह जाते हैं,
इसलिए हर निवाले से पहले मालिक का शुक्र करो,
जो मिला है थाली में,उसका दिल से सम्मान करो।
न खाने में नुक़्स निकालो,न अन्न को ठुकराओ,
हर दाने में मालिक की नेमत का नूर पाओ,
जिस अन्न से जीवन चलता,उसका मान करो,
हर निवाले को मालिक की रहमत जान करो।
मंडी से जो दाना निकलता,वो भी अरदास करता है,
“हे मालिक! किस मुख में जाऊँ?”यही सवाल करता है,
“मुझे सद्बुद्धि वाले इंसान के मुख में डालना,
मेरे जीवन को नेक कर्मों से सफ़ल बनाना।”
“विकारों से भरे मनुष्य का हिस्सा मुझे न बनाना,
लोभ, क्रोध और अहंकार के मुख में मुझे न डालना,
जिसके कर्मों में नेकी हो,उसके घर मुझे पहुँचाना,
जिसके दिल में इंसानियत हो,उसी का अन्न बनाना।”
इसलिए मन के विकारों से हर पल दूर रहो,
अन्न का सम्मान करो और मालिक का शुक्र करो,
किशन दाने की अरदास को जीवन का संदेश बनाओ,
सद्बुद्धि,सद्कर्म इंसानियत से जीवन सफ़ल बनाओ।

