हे प्रभु! सुख इतना देना कि मन में अभिमान न आए,
दुःख इतना देना कि विश्वास कभी डगमगा न जाए।
मिले यश तो चरणों में उसे अर्पित कर दूँ सदा,
मिले अपयश तो भी तेरी राह से हटूँ न ज़रा।
हे प्रभु! खुशियाँ देना,मगर विवेक साथ रखना,
आँखों में सपने देना,मगर पाँव ज़मीन पर रखना।
जब सफ़लता सिर चढ़े,तो विनम्रता जगाते रहना,
जब असफ़लता घेर ले, तो हौसला बढ़ाते रहना।
हे प्रभु! दुःख देना तो सहने की शक्ति भी देना,
आँसू देना तो उन्हें पोंछने की भक्ति भी देना।
राह कठिन हो तो कदमों में ठहराव न आने देना,
अँधेरा कितना भी हो,विश्वास का दीप बुझने न देना।
हे प्रभु! धन देना तो दान का भाव भी देना,
ज्ञान देना तो उसमें विनय का प्रभाव भी देना।
रिश्तों में प्रेम रहे,मन में किसी का द्वेष न रहे,
तेरी कृपा में ऐसा रख कि स्वयं से कोई क्लेश न रहे।
हे प्रभु! जीवन में सुख-दुःख का संतुलन बनाए रखना,
हर परिस्थिति में मुझे अपना होना समझाए रखना।
किशन सुख में तेरा नाम न भूलूँ,न दुःख में तुझसे दूर रहूं
अंतिम साँस तक बस तेरे चरणों की ओर ही देखता रहूँ।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

