घर अदालत नहीं,जहाँ हर बात पर फैसला सुनाए
घर प्रेम का पावन आँगन है,जहाँ रिश्तों को निभाए।
हर छोटी भूल पर तर्कों की तलवार चलाना उचित नहीं,
कुछ बातों को मुस्कुराकर छोड़ देना भी कम महान नहीं।
घर मंदिर है,यहाँ अहंकार का नहीं,संस्कारों का वास हैँ
हर रिश्ते के हृदय में प्रेम और विश्वास का प्रकाश हैँ
जहाँ शब्दों से घाव मिलें,वहाँ मौन ही मरहम बन जाता है,
चुप रह जाना भी रिश्तों को टूटने से बचाता है।
हर बहस में जीतने वाला इंसान महान नहीं होता,
अपनों की खातिर झुक जाए,वह कभी नादान नहीं होता।
रिश्तों में हारकर भी जो प्रेम की बाजी जीत जाता है,
वही घर के मंदिर में सच्ची पूजा का दीप जलाता है।
न हर बात का जवाब दो,न हर गलती का हिसाब रखो,
अपनों की कमजोरियों पर भी थोड़ा प्रेम का गुलाब रखो।कटु वचनों से घर की दीवारें तो खड़ी रह जाती हैं,
मगर दिलों के बीच की दूरियाँ उम्रभर बढ़ती जाती हैं।
घर में ऊँची आवाज़ नहीं, ऊँचे विचारों का सम्मान हो
रिश्तों में फैसलों से अधिक,भावनाओं का स्थान हो
किशन याद रखो!मौन कमजोरी नहीं,प्रेम की पराकाष्ठा हैँ
अपनों की खुशी के लिए अहंकार झुक़े, तों घर स्वर्ग बनें


