• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Sunday, September 13, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

डिजिटल भारत में सर्पदंश का कहर :स्कूल में सर्पदंश से तीन मासूम बच्चों की मौत की गूँज -9 राज्यों में अधिसूचित बीमारी घोषित -केंद्र सहित बाकी राज्य कब करेंगे?

by Page 3 News International Desk
August 19, 2026
in Hindi Editorials, Hindi News
0
0
SHARES
11
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

भारत सर्पदंश को दुर्भाग्यपूर्ण ग्रामीण घटना समझने की मानसिकता से बाहर निकले और इसे राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में देखे

यदि 2047 का विकसित भारत वास्तव में सबका विकास, सबकी सुरक्षा और सबका स्वास्थ्य चाहता है,तो सर्पदंश के खिलाफ़ लड़ाई को भी विकास के एजेंडे का हिस्सा बनाना होगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

RelatedPosts

हिंदी दिवस 2026:अनुच्छेद 343 से राजभाषा कानून तक: हिंदी क़ा संवैधानिक सफ़र -भाषाई विविधता से वैश्विक डिजिटल युग तक हिंदी की नई यात्रा -समग्र व्यापक विश्लेषण

रायपुर के नवाचारों को देखने पहुंची असम की टीम, जाना कैसे मिल रहा लोगों को फायदा

कविता – भाषा बने प्रेम की पहचान

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की महत्वाकांक्षी यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधुनिक चिकित्सा, टेलीमेडिसिन डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अत्याधुनिक संचार व्यवस्था के इस दौर में देश की विकास -गाथा तभी पूर्ण मानी जा सकती है,जब एक गरीब, ग्रामीण,आदिवासी अथवा दूरदराज के परिवार की जिंदगी भी उतनी ही मूल्यवान समझी जाए जितनीकिसी महानगर में रहने वाले नागरिक की। इसी कसौटी पर सर्पदंश आज भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक असहज लेकिन अत्यंत गंभीर प्रश्न बनकर खड़ा है।अनुमानित रूप से भारत में हर वर्ष लाखों लोग सर्पदंश का सामना करते हैं और लगभग 50 हजार या उससे अधिक मौतों का अनुमान लगाया गया है; उपलब्ध शोध भारत को वैश्विक सर्पदंश मृत्यु-भार के लगभगआधे से जोड़ता है?।हालांकि सरकारी निगरानी के आंकड़े इससे बहुत कम हैं,और यही अंतर बताता है कि समस्या केवल मृत्यु की नहीं,बल्कि अंडर-रिपोर्टिंग, समय पर उपचार न मिलने और कमजोर निगरानी व्यवस्था की भी है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह जानकारी देना चाहूंगा क़ि महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सर्पदंश को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित बीमारी घोषित किया है और इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी हो चुका है। मार्च 2026 में संसद में दिए गए उत्तर के अनुसार उस समय आठ राज्यों,कर्नाटक, तमिलनाडु,मेघालय,नागालैंड त्रिपुरा,केरल,ओडिशा और अब महाराष्ट्र में सर्पदंश को अधिसूचित किया गया है सवाल उठता है कि, केंद्री व बाकी राज्यों द्वारा इसको सूची में समाहित क़ी घोषणा कब की जाएगी? क्या वहां किसी घटना का इंतजार किया जा रहा है? इस संकट की भयावहता को महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका स्थित जपतलाई की अनुदानित आदिवासी आश्रमशाला की घटना ने एक बार फिर देश के सामने ला खड़ा किया है। अगस्त 2026 में इस आवासीय विद्यालय के छात्रावास में रात के समय विषैले सांप के काटने से छह छात्राएं प्रभावित हुईं।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार तीन छात्राओं 8, 12 और 14 वर्ष की मृत्यु हो गई,जबकि तीन अन्य छात्राओं का उपचार किया गया। घटना के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू की और आश्रमशाला की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। यह केवल तीन परिवारों की त्रासदी नहीं है; यह उस भारत के सामने खड़ा प्रश्न है जो 2047 में विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा रखता है। यदि हमारे आवासीय विद्यालयों में सो रहे बच्चों की सुरक्षा सर्पदंश जैसी रोकथाम योग्य और उपचार योग्य आपातस्थिति के सामने सुनिश्चित नहीं हो सकती, तो विकास के हमारे मॉडल को केवल डिजिटल कनेक्टिविटी से नहीं,बल्कि जीवन- सुरक्षा की अंतिम मील तक पहुंच से भी परिभाषित करना होगा। होली पर मेरी पूरी नजर लगी हुई थी महाराष्ट्र सरकार लगातार एक्शन ले रही थी और अब 18 अगस्त 2026 को अधिचित बीमारी की सूची में डालने का नोटिफिकेशन जारी किया जो सराहनीय कार्यवाही है।
साथियों बात अगर हम सर्पदंश की त्रासदी का दूसरा पहलू और भी चिंताजनक है इसको समझने की करें तो अंधविश्वास और उपचार में देरी।आज भी अनेक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सांप के काटने के बाद पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय ओझा,तांत्रिक, झाड़- फूंक या पारंपरिक उपचार के लिए ले जाने की प्रवृत्ति मौजूद है।इसके पीछे केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों से दूरी,परिवहन की कमी, एंटी- स्नेक वेनम की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता और चिकित्सा व्यवस्था पर अविश्वास जैसे कारण भी हैं। परिणाम यह होता है कि वह महत्वपूर्ण समय, जिसमें मरीज को जीवनरक्षक चिकित्सा मिल सकती थी, समाप्त हो जाता है। इसलिए सर्पदंश को केवल सांप और इंसान के बीच की घटना मानना गलत होगा; यह स्वास्थ्य व्यवस्था, सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, परिवहन, डिजिटल निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बहुआयामी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।
साथियों बात अगर हम यहीं सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी बनाने की आवश्यकता सामने आती है इसको समझने की करें तो, अधिसूचना का मूल महत्व यह है कि स्वास्थ्य संस्थानों में दर्ज होने वाले मामलों और मौतों की व्यवस्थित सूचना सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी तंत्र तक पहुंचे। कर्नाटक ने फरवरी 2024 में इस दिशा में ऐतिहासिक पहल की और सर्पदंश के मामलों तथा मौतों की रिपोर्टिंग को अनिवार्य किया। राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों तथा चिकित्सा संस्थानों को मामलों को इंटेग्राटेड हेल्थइनफार्मेशन प्लेटफार्म पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया।कर्नाटक का अनुभव यह दिखाता है कि अधिसूचना के बाद आंकड़े बढ़ते दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि सर्पदंश अचानक बढ़ गया है; बेहतर रिपोर्टिंग के कारण पहले छिपे हुए मामले सामने आने लगते हैं। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में कर्नाटक में 2023 से 2025 के बीच रिपोर्ट किए गए मामलों में तेज वृद्धि का उल्लेख करते हुए बताया गया कि बेहतर सर्वेलेंस और डेथ ऑडिट ने समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में मदद की।
साथियों बात अगर हम भारत सरकार ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, इसको समझने की करें तो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 मार्च 2024 को नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रेवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ़ स्नेकबाईट इनवेनोमिंग (एनएपी -एसई ) लॉन्च किया। इसका घोषित विजन 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को आधा करना है। योजना में उपचार की उपलब्धता, स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता- वृद्धि, रेफरल व्यवस्था, जन- जागरूकता और सर्पदंश की निगरानी जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र भी सर्पदंश निगरानी, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की आपात सेवाओं को मजबूत करने, एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता की डिजिटल मैपिंग तथा सामुदायिक जागरूकता को प्रमुख रणनीतियों में रखता है।लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न है। यदि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2030 तक मृत्यु और विकलांगता को आधा करना है, तो इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देशभर में विश्वसनीय और तुलनीय डेटा भी चाहिए।
साथियों,मार्च 2026 में लोकसभा में दिए गए सरकारी उत्तर के अनुसार 2023, 2024 और 2025 में आईडीएसपी -आईएचआईपी के माध्यम से रिपोर्ट की गई सर्पदंश मौतें क्रमशः183, 370 और 431 थीं।उसी उत्तर में केंद्र सरकार ने बताया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपने संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों के अंतर्गत सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी घोषित करने की सलाह दी गई है। इन आंकड़ों और अनुमानित वास्तविक भार के बीच का विशाल अंतर अपने आप में एक चेतावनी है, सरकारी सर्वेलेंस में दर्ज आंकड़े ही पूरी समस्या नहीं हैं।इसलिए केंद्र सरकार के लिए अब अगला कदम केवल सलाह जारी करना नहीं, बल्कि राज्यों के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय, एकरूप और बाध्यकारी सर्वेलेंस फ्रेमवर्क तैयार करना होना चाहिए। स्वास्थ्य मुख्यतः राज्य का विषय होने के बावजूद सर्पदंश का प्रभाव राज्य की सीमाओं में सीमित नहीं है। सांपों का प्राकृतिक आवास, ग्रामीण आजीविका,कृषि क्षेत्र, जंगल, प्रवासी श्रमिक, आदिवासी आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच,ये सभी अंतरराज्यीय आयाम रखते हैं। केंद्र सरकार राज्यों को उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए एक समान न्यूनतम मानक, डिजिटल रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल, उपचार प्रोटोकॉल, एंटी- वेनम की उपलब्धता और इमरजेंसी रेफेररल व्यवस्था के लिए स्पष्ट ऑपरेशनल फ्रेमवर्क दे सकती है।
साथियों बात अगर हम सर्पदंश को अधिसूचित करने का सबसे बड़ा लाभ सटीक डेटा है,इसको समझने की करें तो, जब सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों से मामलों की व्यवस्थित सूचना आएगी तो सरकार यह जान सकेगी कि कौन-से जिले,तहसील, गांव और मौसम सर्पदंश के लिहाज से अधिकसंवेदनशील हैं।इसके आधार परस्नेकबाईट हॉटस्पॉट्स का डिजिटल मानचित्र तैयार किया जा सकता है।यही डेटा यह तय करने में मदद करेगा कि किस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में कितना एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होना चाहिए,कहां एम्बुलेंस नेटवर्क मजबूत करना है और किन क्षेत्रों में विशेष जन- जागरूकता अभियान चलाना है।सर्पदंश के बाद प्राथमिक उपचार के संबंध में भी देशव्यापी वैज्ञानिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।पीड़ित को शांत रखना, काटे गए अंग की अनावश्यक मूवमेंट रोकना, अंगूठी,घड़ी और अन्य कसाव वाली वस्तुएं हटाना तथा उसे तत्काल ऐसे चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना जहां उचित उपचार उपलब्ध हो,जीवन बचाने में महत्वपूर्ण है। इसके विपरीत घाव काटना, मुंह से जहर चूसना, बर्फ या बिजली का प्रयोग करना, घरेलू लेप लगाना अथवा कसकर टूरनिक्वेट बांधना नुकसानदायक हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण संदेश स्पष्ट होना चाहिए, झाड़ -फूंक में समय न गंवाएं; सर्पदंश एक चिकित्सा आपातस्थिति है। एंटी-स्नेक वेनम और आवश्यक सपोर्टिंवे केयर तक शीघ्र पहुंच जीवन बचाने की कुंजी है।
साथियों बात अगर हम सर्पदंश की रोकथाम बहुत ही महत्वपूर्ण है इसको समझने की करें तो, खेतों, जंगलों और झाड़ियों में जाने वाले लोगों को उचित जूते पहनने, रात में टॉर्च का इस्तेमाल करने,घास या झाड़ियों में कदम रखने से पहले सावधानी बरतने और घर के आसपास कूड़ा,लकड़ी, पत्थर तथा अनावश्यक ढेर न जमा करने की जानकारी दी जानी चाहिए।चूहों कानियंत्रण भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सांपों के लिए भोजन का स्रोत बन सकते हैं।स्कूलों और आश्रमशालाओं के लिए इससे आगे बढ़कर विशेष स्नेकबाईट सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाया जाना चाहिए,बेड/सोने की सुरक्षित व्यवस्था, कमरे और परिसर की नियमित जांच, दरवाजों-खिड़कियों की सुरक्षा, रात में रोशनी, स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से इमरजेंसी लिंकेज और कर्मचारियों की प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण अनिवार्य किया जा सकता है।
साथियों बात अगर हम डिजिटल भारत के पास इस समस्या से लड़ने के लिए साधन भी मौजूद हैं, इसको समझने की करें तो मोबाइल- आधारित रिपोर्टिंग , जीपीएस -इनेबलड हॉटस्पॉट मैपिंग, रियल टाइम दशबोर्ड्स अस्पतालों में एएसवी स्टॉक अलर्टस, एम्बुलेंस ट्रैकिंग, टेलीमेडिसिन कंसल्टेशन और स्थानीय भाषाओं में व्हाट्सएप्प अथवा अन्य डिजिटल जागरूकता अभियान सर्पदंश नियंत्रण को नई गति दे सकते हैं। कर्नाटक में रिपोर्टिंग और डेथ ऑडिट के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल सर्वेलेंस केवल आंकड़े जमा करने का माध्यम नहीं,बल्कि मृत्यु के कारणों और स्वास्थ्य-व्यवस्था की कमियों को पहचानने का उपकरण भी प्रतिष्ठा से बन सकता है।
साथियों अब समय है कि भारत सर्पदंश को दुर्भाग्यपूर्ण ग्रामीण घटना समझने की मानसिकता से बाहर निकले और इसे राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में देखे। केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सर्पदंश की अनिवार्य रिपोर्टिंग,मृत्यु की ऑडिट, एएसवी अवेलेबिलिटी, इमरजेंसी रेफेररल , हेअल्थीकेयर – वर्कर ट्रेनिंग और कम्युनिटी अवेयरनेस के लिए न्यूनतम राष्ट्रीय मानक लागू हों। राज्यों को अपनी- अपनी विधिक व्यवस्था के तहत इसे अधिसूचित करने की दिशा में तेजी लानी चाहिए। इससे केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का टकराव नहीं, बल्कि साझी सार्वजनिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी मजबूत होगी।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

WhatsApp Image 2026 08 19 at 18.06.23

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

हिंदी दिवस 2026:अनुच्छेद 343 से राजभाषा कानून तक: हिंदी क़ा संवैधानिक सफ़र -भाषाई विविधता से वैश्विक डिजिटल युग तक हिंदी की नई यात्रा -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
September 13, 2026
0
2

एआई और इंटरनेट के दौर में हिंदी की अगली क्रांति? मोबाइल से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक बदल रही है भाषा की...

रायपुर के नवाचारों को देखने पहुंची असम की टीम, जाना कैसे मिल रहा लोगों को फायदा

by Page 3 News International Desk
September 13, 2026
0
0

ब्यूरों चीफ़ - अनादि पाण्डेयछत्तीसगढ़ रायपुरमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश तथा कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में...

कविता – भाषा बने प्रेम की पहचान

by Page 3 News International Desk
September 13, 2026
0
2

हिंदी हो या तमिल,मराठी हो या कन्नड़ की वाणी,बंगाली,पंजाबी,गुजराती सिंन्धी,हर बोली अपनी कहानी।तेलुगु,मलयालम,असमिया,उड़िया का भी मान करें,भारत की हर भाषा...

कविता – जीते-जी पिता की कद्र करो

by Page 3 News International Desk
September 13, 2026
0
4

पापा वो छत हैं,जो धूप में साया बन जाते हैं,खुद दर्द सहकर भी बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं।जब...

ब्रिक्स सम्मेलन 2026:मोदी- शी-पुतिन एक मंच पर, तेल 108 डॉलर पार -क़्या ब्रिक्स से भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को मिलेगी ऑक्सीजन? -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
September 13, 2026
0
5

ब्रिक्स के मंच पर भारत का बड़ा दांव -क़्या रूस का तेल, चीन का बाजार और यूपी आई बदल देंगे...

कविता – कर्मफ़ल की अदालत

by Page 3 News International Desk
September 12, 2026
0
3

ऐ मेरे मन,पापों और गुनाहों से अब तौबा कर लो,अंतर की मैली गलियों को पश्चाताप से धो लो।आज सँभल जाओ,कल...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
« Aug    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.