• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Friday, August 21, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

चीनी की मिठास पर महंगाई का वार: ईंधन के लिए गन्ना या थाली के लिए चीनी? -ई-20 नीति ने खड़ा किया खाद्य बनाम ईंधन का बड़ा सवाल? -ई-20 के दौर में चीनी क्यों हुई इतनी कड़वी!

by Page 3 News International Desk
August 21, 2026
in Hindi Editorials, Hindi News
0
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

ईंधन आत्मनिर्भर भारत बनाम महंगी रसोई :क्या ई-20 नीति की कीमत चुका रहा है आम आदमी?

क्या ई-20 की दौड़ में देश की रसोई पड़ गई भारी?- चीनी बनाम ईंधन: क्या ई-20 एथेनॉल नीति ने बढ़ा दी गन्ने की मिठास की कीमत? सोचनीय प्रश्न -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

RelatedPosts

अयोध्या में नमस्कार भारत फाउंडेशन ने शुरू की 24 घंटे निःशुल्क अन्न सेवा

अयोध्या के मिल्कीपुर में सर्पडँस से युवक की मौत

कोतवाली नगर पुलिस ने किया अंतर्जनपदीय गिरोह का खुलासा

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में दुनियाँ एक ऐसे दौर से गुजर रही है,जहां ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुके हैं।पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना,कार्बन उत्सर्जन घटाना और घरेलू ऊर्जा संसाधनों का विस्तार करना आज भारत सहित हर बड़ी अर्थव्यवस्था की प्राथमिकता है।इसी व्यापक रणनीति के तहत भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एथनोल सप्लाई ईयर 2024-25 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 19.24 प्रतिशत तक पहुंच चुका था और 2025-26 के लिए 20 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है। एथेनॉल उत्पादन क्षमता भी अक्टूबर 2025 तक बढ़कर लगभग 1,953 करोड़ लीटर हो चुकी थी। लेकिन अगस्त 2026 में चीनी की कीमतों में आई असाधारण तेजी ने इस नीति के दूसरे पहलू पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, क्या ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दौड़ में कहीं भारत कीखाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ता की रसोई तो महंगी नहीं हो रही?मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जैसा विशाल और घनी आबादी वाला देश खाद्य पदार्थों की उपलब्धता के मामले में किसी भी प्रकार का जोखिम लंबे समय तक वहन नहीं कर सकता।ऊर्जा और भोजन दोनों आवश्यकताएं हैं, लेकिन प्राथमिकता के स्तर पर भोजन जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है।यदि किसी नीति के कारण ईंधन सस्ता, आयात बिल कम और पर्यावरणीय लाभ बेहतर होते हैं,लेकिन उसी प्रक्रिया में रोजमर्रा की खाद्य सामग्री महंगी होने लगती है, तो नीति की सफलता को केवल ऊर्जा के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। उसे किसान,उद्योग, उपभोक्ता,महंगाई और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा,सभी कसौटियों पर परखना होगा। आज चीनी का बाजार इसी बहुआयामी परीक्षा के सामने खड़ा दिखाई दे रहा है।
साथियों,अगस्त 2026 इस चिंता को और गंभीर बनाता हैं। चीनी की कीमतें पिछले महीनों में तेजी से बढ़ी हैं और सरकार को घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए असाधारण कदम उठाने पड़े हैं। 20 अगस्त को केंद्र ने एक दशक में पहली बार 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी,जिसका उद्देश्य घरेलू उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो महीनों में घरेलू चीनी कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।सरकार ने इससे पहले निर्यात पर रोक और स्टॉक-सीमा जैसे कदम भी उठाए थे।इसका अर्थ स्पष्ट है कि समस्या केवल किसी एक व्यापारी,किसी एक राज्य या किसी एक दिन की कीमत वृद्धि नहीं है; देश के चीनी आपूर्ति तंत्र में वास्तविक दबाव पैदा हुआ है।मेरी अपनी राइस सिटी गोंदिया में पिछले लगभग 20 दिनों से चीनी के खुदरा भाव पर नजर रखने के दौरान शुक्रवार 21 अगस्त 2026 को लगभग 70 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव बताया गया। यदि यह स्थानीय खुदरा बाजार का वास्तविक लेन-देन मूल्य है, तो लगभग 20 दिनों में 45 रुपये के आसपास के स्तर से 70 रुपये तक पहुंचना करीब 25 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि है। इसे राष्ट्रीय औसत मानना उचित नहीं होगा,क्योंकि अलग-अलग शहरों में थोक, खुदरा, ब्रांड, गुणवत्ता, परिवहन और स्थानीय आपूर्ति के कारण कीमतें अलग हो सकती हैं।फिर भी गोंदिया का यह अनुभव उस राष्ट्रीय मूल्य-दबाव की स्थानीय तस्वीर अवश्य प्रस्तुत करता है जिसकी पुष्टि राष्ट्रीय बाजार में तेजी से भी होती है। मुंबई में भी हाल में चीनी के भाव में एक सप्ताह में लगभग 8 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई। यह अकेले ई-20 की कीमत नहीं है; इसमें उत्पादन की कमी, मौसम, कम शुरुआती स्टॉक, त्योहारी मांग, व्यापारिक अपेक्षाएं, परिवहन, स्थानीय मार्जिन और संभव जमाखोरी जैसे कई तत्व शामिल हो सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि संकट बहु-कारकीय है। सरकार का 10 लाख टन शुल्क- मुक्त आयात का निर्णय इस बात का प्रमाण है कि घरेलू आपूर्ति बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता महसूस हुई है। इसलिए गोंदिया में 70 रुपये का भाव यदि लगातार कई दुकानों और अलग-अलग लेन-देन में मिल रहा है, तो इसे स्थानीय आपूर्ति-श्रृंखला में असामान्य तनाव का सटीकता से संकेत माना जाना चाहिए।
साथियों,सबसे पहले भारत का चीनी नियामक ढांचा भी इस संकट को समझने में महत्वपूर्ण है। चीनी और गन्ना एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट,1955 के दायरे में आते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के अनुसार शुगरक़ेन (कंट्रोल ) आर्डर ,1966 के तहत सरकार गन्ने के एफआरपी सहित कई पहलुओं को नियंत्रित करती है, जबकि शुगर (कंट्रोल ) आर्डर 2025 उत्पादन, बिक्री, स्टॉक, आयात -निर्यात और न्यूनतम बिक्री मूल्य जैसे विषयों पर सरकार को नियामक शक्तियां देता है।इसलिए चीनी को पूरी तरह मुक्त बाजार की वस्तु समझना सही नहीं होगा। यह ऐसा क्षेत्र है जहां सरकार किसान, मिल, व्यापारी और उपभोक्ता के बीच संतुलन बनाने के लिए लगातार हस्तक्षेप करती है।यही कारण है कि चीनी की कीमत बढ़ने का असर केवल उपभोक्ता की चाय तक सीमित नहीं रहता।मिठाई उद्योग, बिस्कुट, बेकरी,शीतल पेय,आइसक्रीम होटल- रेस्तरां और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की लागत बढ़ती है। अंततः इसका कुछ हिस्सा उपभोक्ता तक पहुंचता है और व्यापक खाद्य महंगाई को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, यदि चीनी की कीमत बहुत कम रखी जाती है तो मिलों की नकदी स्थिति कमजोर हो सकती है और किसानों के गन्ना भुगतान में देरी हो सकती है। इसलिए सरकार के सामने चुनौती चीनी सस्ती करो जितनी सरल नहीं है;उसे किसान को उचित मूल्य, मिल को आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता को वहनीय कीमत,तीनों उपलब्ध कराने हैं।
साथियों, इस परिस्थिति को केवल एथेनॉल बनाम चीन के सरल समीकरण से समझना अधूरा होगा।वास्तव में भारतीय चीनी अर्थव्यवस्था गन्ना, चीनी, शीरा, एथेनॉल, किसान भुगतान, मिलों की नकदी स्थिति, सरकारी कोटा, निर्यात-आयात, मौसम और त्योहारों की मांग—इन सभी के बीच बनी एक जटिल आर्थिक श्रृंखला है। एथेनॉल इस श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा अवश्य है, लेकिन वही अकेला कारण नहीं है। यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।गन्ने से चीनी और एथेनॉल बनने की प्रक्रिया को समझना यहां जरूरी है। गन्ने से चीनी बनाने के बाद अलग-अलग प्रकार के शीरे प्राप्त होते हैं।सी -हैवी मोलासेज मुख्यतः चीनी निर्माण की अंतिम अवस्था का उप-उत्पाद है, जबकि बी – हैवी मोलासेज में अधिक सुक्रोज रहता है। सरकार ने एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए बी – हैवी मोलासेज , गन्ने के रस, सिरप और यहां तक कि चीनी-आधारित फीडस्टॉक से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी है। आधिकारिक नीति के अनुसार 2024-25 में गन्ने के रस/चीनी/शुगर सिरप से बने एथेनॉल का एक्स-मिल मूल्य 65.61 रुपये प्रति लीटर और बी – हैवी मोलासेज आधारित एथेनॉल का 60.73 रुपये प्रति लीटर निर्धारित था। इससे मिलों के लिए एथेनॉल एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक राजस्व स्रोत बन गया।यहीं फूड बनाम फ्यूल का प्रश्न सटीकता से वास्तविक रूप लेता है।
साथियों, 21 अगस्त 2026 को यहीं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा उठाया गया राजनीतिक आरोप बहस को और तीखा बनाता है। उन्होंने केंद्र की ई-20 नीति को चीनी की कीमतों में तेजी से जोड़ते हुए दावा किया कि एथेनॉल के लिए गन्ने और चीनी की दिशा बदलने से बाजार में कमी पैदा हुई। उनके आरोप को राजनीतिक बयान के रूप में अलग रखा जा सकता है,लेकिन जिस मूल आर्थिक प्रश्न की ओर वे संकेत करते हैं,यानी वैकल्पिक उपयोग के कारण किसी वस्तु की घरेलू उपलब्धता पर दबाव उसे आंकड़ों के आधार पर जांचना आवश्यक है।दूसरी ओर, सरकार की नीति का मूल उद्देश्य भी केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना नहीं था; इसका एक उद्देश्य चीनी उद्योग में अतिरिक्त स्टॉक, मिलों की नकदी समस्या और किसानों के बकाये का समाधान करना भी रहा है। सरकार ने 2021 में स्पष्ट किया था कि एथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई मात्रा को चीनी मिलों के मासिक रिलीज कोटा में प्रोत्साहन दिया जाएगा।इसलिए आज की महंगाई के लिए केवल ई -20 को विलेन घोषित करना आर्थिक रूप से उतना ही सरलीकरण होगाजितना उसे पूरी तरह निर्दोष मान लेना।वास्तविकता कई कारणों का संगम है।पहला बड़ा कारण उत्पादन में कमजोरी है।मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र,कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम ने उत्पादन और उपलब्धता पर दबाव डाला है।इसके परिणाम स्वरूप अक्टूबर 2026 की शुरुआत में चीनी का शुरुआती स्टॉक लगभग 35 लाख टन तक गिरने का अनुमान लगाया गया है, जिसे करीब तीन दशकों का निम्न स्तर बताया गया है।जब शुरुआती स्टॉक कमजोर हो, तब मामूली मांग वृद्धि भी कीमतों पर असाधारण प्रभाव डाल सकती है।
साथियों दूसरा कारण है त्योहारी मांग।भारत में रक्षाबंधन से लेकर गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली तक मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ, धार्मिक प्रसाद और घरेलू उपभोग में चीनी की मांग बढ़ती है। अगस्त से नवंबर का समय इसलिए चीनी बाजार के लिए संवेदनशील है। सरकार ने भी इसी कारण थोकउपभोक्ताओं की स्टॉक सीमा को 30 दिनों से घटाकर 15 दिनों तक करने का निर्णय लिया है, ताकि बड़े खरीदार अत्यधिक स्टॉक जमा करके बाजार में कृत्रिम कमी न पैदा करें। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार स्वयं मांग, आपूर्ति और जमाखोरी के संयुक्त दबाव को गंभीर मान रही है।तीसरा कारण है व्यापारिक मनोविज्ञान। जब बाजार में यह धारणा बन जाती है कि आने वाले दिनों में चीनी और महंगी होगी, तो व्यापारी सामान्य आवश्यकता से अधिक खरीद सकते हैं। उपभोक्ता भी भविष्य की कीमतों से डरकर अग्रिम खरीदारी कर सकते हैं। इस तरह वास्तविक कमी से अधिक ‘कमी की आशंका’ कीमत बढ़ा सकती है। सरकार ने 28 जुलाई 2026 को चीनी डीलरों पर स्टॉक- होल्डिंग सीमा लागू करते हुए स्पष्ट किया था कि हाल की एक्स-मिल कीमत वृद्धि मौजूदा मांग-आपूर्ति फंडामेन्टलस से पूरी तरह समर्थित नहीं थी और इसका उद्देश्य जमाखोरी तथा सट्टेबाजी पर रोक लगाना था। इसलिए बिचौलियों और जमाखोरों की भूमिका की सटीकता से जांच भी उतनी ही जरूरी है जितनी एथेनॉल नीति की।
साथियों,चौथा कारण है पूर्ववर्ती व्यापार नीति। यदि किसी समय घरेलू उपलब्धता के अनुमान के आधार पर निर्यात की अनुमति दी गई हो और बाद में उत्पादन अनुमान कमजोर साबित हों, तो घरेलू बाजार में स्टॉक तेजी से घट सकता है। वर्तमान संकट में पिछले निर्यात और कमजोर शुरुआती स्टॉक को प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। Reuters ने लगभग 8 लाख टन के पूर्व निर्यात को भी उपलब्धता के दबाव से जोड़ा है। यही कारण है कि आज सरकार को एक तरफ घरेलू बाजार में कीमत रोकने के लिए आयात खोलना पड़ रहा है और दूसरी तरफ स्टॉक सीमा तथा व्यापार नियंत्रण जैसे कदम सटीकता से उठाने पड़ रहे हैं।
साथियों, सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या भारत को ईंधन की आत्मनिर्भरता भोजन की कीमत पर हासिल करनी चाहिए? इसका उत्तर स्पष्ट रूप से नहीं होना चाहिए। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि एथेनॉल नीति गलत है।सही निष्कर्ष यह है कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और खाद्य आत्मनिर्भरता को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि परस्पर संतुलित राष्ट्रीय लक्ष्य बनाया जाए। जिस वर्ष गन्ने का उत्पादन मजबूत हो, घरेलू चीनी स्टॉक पर्याप्त हो और खपत की जरूरत सुरक्षित हो, उस समय एथेनॉल के लिए अधिक म डायवर्जन किया जा सकता है। लेकिन जब शुरुआती स्टॉक ऐतिहासिक रूप से नीचे जा रहा हो और त्योहारी मांग सामने हो, तब खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना अधिक विवेकपूर्ण होगा।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

WhatsApp Image 2026 08 21 at 18.27.14

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

अयोध्या में नमस्कार भारत फाउंडेशन ने शुरू की 24 घंटे निःशुल्क अन्न सेवा

by Page 3 News International Desk
August 21, 2026
0
9

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या। रामनगरी अयोध्या में श्रीराम भक्तों की सेवा के उद्देश्य से नमस्कार भारत स्पिरिचुअलिटी फाउंडेशन की ओर से नई...

अयोध्या के मिल्कीपुर में सर्पडँस से युवक की मौत

by Page 3 News International Desk
August 21, 2026
0
3

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या।मिल्कीपुर में सर्पडँस से किराना दुकान में काम कर रहे 20 वर्षीय युवक की मौत,मृतक शिवम पुत्र उदयराज 20...

कोतवाली नगर पुलिस ने किया अंतर्जनपदीय गिरोह का खुलासा

by Page 3 News International Desk
August 21, 2026
0
1

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या।कोतवाली नगर पुलिस को बड़ी सफलता, लूट और टप्पेबाजी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का खुलासा। पुलिस ने 4 पुरुष...

रामकोट की नित्य परिक्रमा का एक वर्ष हुआ पूरा

by Page 3 News International Desk
August 21, 2026
0
8

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या।रामकोट की नित्य परिक्रमा का एक वर्ष पूरा हुआ।एक वर्ष पूर्ण होने पर हजारों रामभक्तों ने रामकोट की परिक्रमा...

कविता – मुस्कुराहट से शुरू होती हर रिश्ते की शुरुआत है

by Page 3 News International Desk
August 21, 2026
0
9

मुस्कुराते रहिए,यही जीवन का मधुर श्रृंगार है,मुस्कान में छिपा प्रेम,अपनापन और संसार है।जो दिलों के द्वार खोल दे,वह सबसे प्यारी...

अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से बाइक चोरी

by Page 3 News International Desk
August 20, 2026
0
4

ट्रेन में भाई को चढ़ाने गए व्यक्ति की मोटरसाइकिल हुई चोरी महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पर तेज नारायण तिवारी...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

August 2026
MTWTFSS
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31 
« Jul    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.