चंदन सिंह | पेज 3 न्यूज़ वर्ल्डवाइड | नई दिल्ली
नई दिल्ली: विवेक विहार स्थित अरवाचिन भारती भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक मैत्री एवं आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सकुरा संगम: जहाँ संस्कृतियाँ मिलती हैं और मित्रता के पुष्प खिलते हैं’ शीर्षक से भव्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर जापान के नारा शहर स्थित निशियामातो गाकुएन (Nishiyamato Gakuen) के 80 विद्यार्थियों एवं उनके साथ आए शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस यात्रा का संयोजन इंडस एडवाइजर एंड ट्रैवल कंपनी लिमिटेड ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत, पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने आकर्षक वाद्यवृंद प्रस्तुति और देवी स्तुति पर आधारित मनमोहक कथक नृत्य प्रस्तुत किया। विद्यालय की हेड ऑफ स्कूल सुश्री सौम्या अनुरूप शर्मा ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान विद्यार्थियों में वैश्विक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘बडी प्रोग्राम’ रहा, जिसमें भारतीय और जापानी विद्यार्थियों ने योग, रस्साकशी, शतरंज, मिट्टी के बर्तन बनाने, मेहंदी, कला एवं शिल्प तथा संगीत जैसी विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और रुचियों को समझने के साथ आपसी सहयोग एवं मित्रता के नए रिश्ते बनाने का अवसर मिला।
जापानी विद्यार्थियों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को विशेष आकर्षण प्रदान किया। इस दौरान दोनों संस्थानों के बीच स्मृति-चिह्नों का आदान-प्रदान भी किया गया, जो आपसी सम्मान, सद्भावना और मजबूत होते संबंधों का प्रतीक बना।
इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन श्री अनुरूप शर्मा, डायरेक्टर डॉ. उर्मिला शर्मा तथा हेड ऑफ स्कूल सुश्री सौम्या अनुरूप शर्मा उपस्थित रहे। विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और विभिन्न संस्कृतियों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
धन्यवाद ज्ञापन और जापानी अतिथियों के प्रति शुभकामनाओं के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ‘सकुरा संगम’ ने भारत-जापान सांस्कृतिक मित्रता, पारस्परिक सम्मान और अंतरराष्ट्रीय सद्भाव का सुंदर संदेश देते हुए यह साबित किया कि सच्ची मित्रता भौगोलिक सीमाओं से परे होती है।


