सच का रास्ता नहीं रोक सकतीं साजिशें,
झूठ की दीवारें भी ढह जाएँगी एक दिन सारी कोशिशें।
सच की लौ आँधियों में भी ज़लती रहेगी रात-दिन,
झूठ चाहे जितना गरजे,जीतता आखिर सच ही हर दिन।
काँटों से भरी राह हो,कदम फ़िर भी रुकते नहीं,
सच्चे इरादों वाले तूफानों से कभी झुकते नहीं।
दुनियाँ चाहे राहों में कितने पत्थर बिछा दे,
सच अपने उजाले से हर अँधेरे को मिटा दे।
साजिशों के जाल भले पल-पल गहरे होते जाएँ,
सत्य के मजबूत कदम मंजिल की ओर बढ़ते जाएँ।
झूठ के चेहरे पर चाहे कितने मुखौटे हों आज,
वक्त की अदालत खोल देती है हर राज।
सच को दबाने वाले खुद अपने जाल में फँस जाते हैं,
कर्मों के आईने में अपने चेहरे से घबरा जाते हैं।
सत्य भले कुछ पल के लिए खामोश दिखाई दे,
पर उसका उजाला अंततःहर अंधकार को मात दे।
इसलिए सच की राह पर विश्वास लिए चलते रहना,
मुश्किल आए तो भी अपने सिद्धांतों पर अटल रहना।
किशन साजिशें थक जाएँगी,झूठ भी हार जाएगा
सच का सूरज देर से सही,मगर जरूर उग आएगा।

