हर पल सुख की चाह में,क्यों जग से उम्मीद लगाएँ,
क्षणभंगुर खुशियों के पीछे,क्यों जीवन यूँ गँवाएँ।
मन के भीतर दीप जलाकर,सत्य-प्रेम को अपनाएँ,
शाश्वत सुख की राह पकड़कर,जीवन सफल बनाएँ।
धन-दौलत सब छूट जाएगा,साथ न कुछ भी जाना,
रिश्ते, यश और वैभव भी,है जग का आना-जाना।
जो सुख आत्मा में बस जाए,वही सच्चा खजाना,
प्रेम, दया और संतोष से,जीवन को महकाना।
कल की चिंता छोड़ मनुज,आज को सुंदर कर ले,
बीते दुःख की राख हटाकर,नव आशाओं को भर ले।
लोभ-मोह के बंधन काटे,निर्मल मन से जी ले,
जिसमें शांति मिले आत्मा को,वही सुख सदा चुन ले।
दूसरों की खुशियों में अपनी,खुशियों का संसार खोजें,
टूटे दिल को प्रेम से जोड़ें,काँटों में भी फूल खोजें।
सेवा, करुणा, सत्य की राहें,जीवन में उजियारा भरें,
बाँटें जितना प्रेम जगत में,उतना ही आनंद उभरें।
शाश्वत सुख न धन में मिलता,न मिलता संसार में,
वह तो खिलता निर्मल मन के,शांत और विश्वास में।
किशन मन भीतर सत्य जगाएँ,प्रभु को हर श्वास में पाएँ,
क्षणिक सुख को छोड़ सदैव,शाश्वत सुख की चाह रखें।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

