भाग्य से जितनी आशाएँ बाँधोगे,उतनी राहें सूनी पाओगे
प्रतीक्षा की लंबी साँझ में,अनेक इच्छाएँ अधूरी पाओगे
कर्म की ज्योति मन में जलती,वही अँधियारा हर लेती।
ऱब उसी का हाथ थामते हैं,जिसकी निष्ठा सच्ची होती।
भाग्य लिखता है केवल संभावना,मंज़िल नहीं बनाता।
कर्म ही पसीने की हर बूँद को,सफलता में बदल जाता।
श्रम को अपना धर्म समझे,कभी पराजित नहीं होता
समय स्वयं उनके चरण चूमे,जिसका विश्वास कर्म मेंहोता
अपेक्षाओं का बोझ उठाकर,जीवन अक्सर थक जाता
निस्वार्थ कर्म का साधक लेकिन,हर पल मुस्काता जाता
फल की चिंता छोड़ जो चलता,वही सच्चा योगी कहलाता
प्रकृति उसका मान बढ़ाकर,उम्मीदों से अधिक लौटाता
धर्म यही है,सत्य के पथ पर,हर दिन कर्म का दीप जलाना
सेवा,करुणा,प्रेम त्याग से,अपना जीवन सफल बनाना
भाग्य बदलने की चाह नहीं,स्वयं को बदलने संकल्प करो
फिर देखो,हर बंद द्वार पर भी,ईश्वर अवसर का द्वार धरो।
याद रखो भाग्य प्रतीक्षा कराता है,कर्म इतिहास रचाता
भाग्य सीमाएँ गिनवाता,कर्म आकाश तक ले जाता।
इसलिए जीवन का एक ही मंत्र,हर श्वास में सदा अपनाना
भाग्य से कम उम्मीद रखो, कर्म से अटूट प्रेम करो;तब ईश्वर भी तुम्हें, तुम्हारी हर अपेक्षा से कहीं अधिक देगा
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
