महेंद्र त्रिपाठी
अयोध्या। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, अयोध्या की अदालत द्वारा आरोपी को मुकदमे के विचारण के लिए तलब किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक अपील को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने खारिज कर दिया है। मामला क्रिमिनल अपील नंबर 2167/2026 से संबंधित है डॉ. आर.पी. पांडेय उर्फ राम प्रकाश पांडेय की ओर से दाखिल अपील में 29 जून 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें विशेष न्यायाधीश ने शिकायत मामले में आरोपी को धारा 354-A, 504, 506 आईपीसी तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V-A) के तहत मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया, उसे पीछे से पकड़कर आपत्तिजनक हरकत की तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी दी। हाई कोर्ट ने कहा कि समन के स्तर पर आरोपों की सत्यता का परीक्षण नहीं किया जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि अभियोजन सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने का प्रथमदृष्टया आधार बनता है या नहीं अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता के धारा 200 सीआरपीसी के बयान और गवाहों के धारा 202 सीआरपीसी के बयान रिकॉर्ड पर मौजूद हैं और आरोपों का समर्थन करते हैं। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने 12 अगस्त 2026 को अपील में कोई त्रुटि या अवैधानिकता न पाते हुए इसे प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब निचली अदालत में आरोपी के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, यह आदेश आरोपी को दोषी ठहराने का फैसला नहीं है; मामले का अंतिम निर्णय ट्रायल के बाद होगा।
कविता – सबसे बड़ा न्यायालय-हमारा मन
मन ही सबसे बड़ा न्यायालय,यहीं सत्य का फैसला होता है,दुनियाँ चाहे कुछ भी कह दे,मन सब सच पहचानता है। अंतरात्मा...