तेरा भाणा मीठा लागे,हर पल तेरा नाम,
सुख हो चाहे दुःख की बेला,तू ही मेरा धाम।
तेरी रज़ा में शांति मिलती,मिटता मन का भार,
तेरे चरणों में ही बसता,जीवन का संसार।
तेरी इच्छा ही विधि मेरी,तेरा ही विश्वास,
तेरे बिन सब शून्य लगता,तू जीवन की आस।
आंधी आए या तूफ़ाँ उठे,डिगे न मेरा मन,
तेरी कृपा से खिल उठता,हर सूना उपवन।
तेरे भाणे जो भी पाया,माना तेरा दान,
हानि-लाभ सब तुझको अर्पण,तुझमें मेरी शान।
अहंकार का दीप बुझाकर,प्रेम-दीप जल जाए,
तेरी रहमत की वर्षा से,अंतर्मन मुस्काए।
सेवा, सिमरन, सत्य की राह,तेरा ही उपहार,
करुणा, क्षमा, दया से महके,जीवन का व्यवहार।
हर प्राणी में तेरा चेहरा,हर श्वास में तेरा राग,
तेरे भाणे जीना सीखूँ,यही रहे अनुराग।
तेरा भाणा मीठा लागे,यही अमर अरदास,
किशन तेरे नाम से जग उजियारा,मिटे हृदय की प्यास।
जब तक साँसें साथ निभाएँ,गाऊँ तेरी शान,
तेरी रज़ा में ही समर्पित,मेरा तन-मन-प्राण।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

