परिवार ने स्नेह दिया,तो मित्रों ने हौसला बढ़ाया,
शिक्षक ने ज्ञान का दीप जलाकर,जीवन-पथ समझाया।
समाज ने अपने अनुभवों से,कितने सबक सिखाए,
बुजुर्गों ने आशीष देकर, मंज़िल के संकेत बताए।
हर कोई अपनी दृष्टि से,राह का सच बतलाएगा,
कोई काँटों से बचाएगा,कोई गिरकर उठना सिखाएगा।
पर दूसरों के सहारे कब तक,जीवन आगे बढ़ पाएगा,
कदम आपका ही होगा,जो मंज़िल तक ले जाएगा।
सलाह मिले तो सुन लेना,अनुभव को मन में बसाना,
सही लगे तो अपना लेना,गलत हो तो आगे बढ़ जाना।
रास्ते चाहे कठिन मिलें,हिम्मत को मत हारने देना,
अपने कर्मों की पतवार से,जीवन-नैया पार लगाना।
दुनिया राह दिखा सकती है,पर कदम नहीं बढ़ा सकती,
कोई पीड़ा समझे,पर दर्द स्वयं ही सहना पड़ता है।
सपनों को सच करने का श्रम, कोई और नहीं कर पाएगा,
जीवन की इस परीक्षा में,हमको स्वयं उतरना पड़ेगा।
परिवार,मित्र,गुरु और बुजुर्ग,सबका सम्मान करते चलना,
उनके अनुभवों से सीखकर,अपने विवेक से राह चुनना।
किशन दुनिया चाहे जितना थामे,आत्मबल रखना पड़ेगा,
राह दिखाने वाले बहुत मिलेंगे,पर चलना स्वयं पड़ेगा।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318