शरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,
मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।
थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,
गलती को सीख बनाएँ अपने व्यवहार से।
नन्हे कदम हैं,राह अभी अनजानी है,
हर भूल में सीख की एक नई कहानी है।
कठोर शब्द नहीं,अपनापन बरसाइए,
भटके हुए कदमों को प्रेम से राह दिखाइए।
डर से बच्चा चुप होगा,सुधरेगा नहीं,
मार से उसका कोमल मन निखरेगा नहीं।
समझ की रोशनी से अँधेरा मिटाइए,
प्यार की भाषा में अनुशासन सिखाइए।
आज की शरारत कल हुनर बन सकती है,
नन्ही-सी भूल बड़ी खबर बन सकती है।
डाँट में भी स्नेह का स्पर्श बनाए रखिए,
हर बच्चे के भीतर विश्वास जगाए रखिए।
बच्चे तो ईश्वर की प्यारी सौगात हैं,
इनकी मुस्कानों में खुशियों की बरसात हैं।
किशन मार नहीं,प्यार से व्यक्तित्व सँवारें,
डाँटें भी तो प्यार से,ताकि बच्चे निखरें-सँवरें।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
