पुलिस को रिश्वत देकर कानून से बच जाओगे,
अदालत में तर्कों से अपना पक्ष सजाओगे,
दुनियाँ की अदालत में बेगुनाह कहलाओगे,
ईश्वर-अल्लाह की अदालत में कहाँ बच पाओगे।
दौलत के सहारे हर दरवाज़ा खुलवा लोगे,
झूठे तर्कों से सच का चेहरा भी ढक दोगे,
दुनियाँ के सामने चाहे पाक-साफ़ बन जाओगे,
ईश्वर-अल्लाह के आगे क्या सच छुपा पाओगे?
कागज़ों की चाल से मुकदमा जीत भी जाओगे,
गवाहों को मोड़कर इल्ज़ाम से छूट भी जाओगे,
कानून की पकड़ से खुद को आज़ाद कर जाओगे,
ईश्वर-अल्लाह के हिसाब से कैसे निकल पाओगे?
यहाँ रिश्वत चल सकती है,वहाँ नहीं चल पाएगी,
यहाँ चालाकी चल सकती है,वहाँ नहीं चल पाएगी,
यहाँ झूठ की परतें सच को कुछ पल ढक पाएँगी,
ईश्वर-अल्लाह की नज़र से मगर कहाँ छुप पाएँगी?
दुनियाँ की अदालत में फैसला चाहे हक़ में आए,
झूठ का परदा चाहे बरसों तक सच को छिपाए,
किशन अंतिम अदालत में हर कर्म गवाही बन जाए,
ईश्वर-अल्लाह से क़ोई न बच पाए,क़ोई न बच पाए।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
