• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Saturday, July 4, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

पर्यावरण संरक्षण- प्राकृतिक संसाधनों को माफियाओं से मुक्त कराने शासन प्रशासन की चुनौती: संवैधानिक दायित्व, कानूनी व्यवस्था और मानवता का भविष्य समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
June 5, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
10
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

RelatedPosts

चेहरा नहीं,चरित्र की पहचान बनो

क्या हमारी थाली सुरक्षित है? -महाराष्ट्र के चौंकाने वाले खाद्य नमूना आँकड़ों से पूरे भारत के लिए सबक -पूरे भारत में जीरो टॉलरेंस टू फूड एडल्टरेशन की नीति लागू की जाए -समग्र व्यापक विश्लेषण

क्या शिक्षा सेवा है या बाज़ार? स्कूलों में कॉपी- किताब, यूनिफॉर्म और शैक्षणिक सामग्री की अनिवार्य खरीद पर राष्ट्रीय विमर्श की आवश्यकता

पर्यावरण संरक्षण केवल एक नीति विषय नहीं बल्कि नैतिक, संवैधानिक, सामाजिक और मानवीय दायित्व बन चुका है।

प्राकृतिक संसाधनों को ज़ब माफियाओं और अवैध दोहन से मुक्त किया जाएगा,तभी एक स्वच्छ, सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानपूर्ण भारत तथा टिकाऊ विश्व व्यवस्था का निर्माण संभव होगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष हमें यह स्मरण कराता है कि स्वच्छ पर्यावरण केवल प्रकृति का विषय नहीं बल्कि मानव अस्तित्व, संवैधानिक मूल्यों और सभ्यता के भविष्य का प्रश्न है। जल, जंगल, जमीन, स्वच्छ वायु और जैव विविधता केवल संसाधन नहीं हैं, बल्कि जीवन के आधार स्तंभ हैं। दुर्भाग्यवश आज भारत सहित विश्व के अनेक देशों में प्राकृतिक संसाधनों का अवैध और अनियंत्रित दोहन गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।अवैध रेत खनन,जंगलों की कटाई भूजल का अंधाधुंध दोहन,नदियों के तटों का विनाश तथा वन्य संसाधनों की तस्करी ने पर्यावरणीय संतुलन को गहरा आघात पहुंचाया है।अनेक स्थानों पर तथाकथित रेती माफिया,वन माफिया,जल माफिया और भूमि माफिया संगठित रूप से कार्य कर रहे हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक स्थिति तब उत्पन्न होती है,जब शासन और प्रशासन के कुछ तत्वों पर इन अवैध गतिविधियों के प्रति उदासीनता या मिली भगत के आरोप लगते हैं। परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाए गए कानून और नीतियां कागजों तक सीमित रह जाती हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र सीनियर एडवोकेट ओम मेठी साहब को समर्पित इस आर्टिकल के माध्यम से कहना चाहूंगा क़ि यदि प्राकृतिक संसाधनों को इन अवैध तंत्रों से मुक्त कर प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जाए,तो पर्यावरण संरक्षण अभियान को वास्तविक गति और सुचारिता प्राप्त हो सकती है।पृथ्वी केवल वर्तमान पीढ़ी की संपत्ति नहीं है; यह आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि सटीक रूप से नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।
साथियों भारतीय संविधान की मूल भावना केवल शासन संचालन तक सीमित नहीं है। संविधान का उद्देश्य ऐसा समाज स्थापित करना है जिसमें प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक, सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।इसी कारण पर्यावरण संरक्षण को भारतीय संवैधानिक दर्शन का अभिन्न अंग बनाया गया।वर्ष1976 में हुए 42 वें संविधान संशोधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को विशेष संवैधानिक महत्व प्रदान किया गया। संविधान के अनुच्छेद 48(क) में राज्य को निर्देश दिया गया कि वह पर्यावरण, वन तथा वन्यजीवों की रक्षा और संवर्धन करेगा। इसी प्रकार अनुच्छेद 51(क)(ग) प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण, जिसमें वन, झीलें, नदियां और वन्यजीव शामिल हैं, की रक्षा और संवर्धन करे तथा जीवधारियों के प्रति करुणा रखे। इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है,की न्यायिक व्याख्या ने स्वच्छ पर्यावरण को जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। अनुच्छेद 47 सार्वजनिक स्वास्थ्य के संवर्धन को राज्य का कर्तव्य घोषित करता है।इस प्रकार संविधान स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण कोई वैकल्पिक नीति नहीं बल्कि राज्य और नागरिक दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
साथियों भारतीय न्यायपालिका ने पर्यावरणीय न्यायशास्त्र के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ मामलों की श्रृंखला ने पर्यावरणीय कानूनों के क्रियान्वयन को नई दिशा दी।गंगा प्रदूषण,ताजमहल संरक्षण, औद्योगिक प्रदूषण और वाहन उत्सर्जन से जुड़े मामलों में न्यायालय ने कठोर निर्देश जारी किए। सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि स्वच्छ जल और प्रदूषणमुक्त वायु का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित है। वेल्लोर सिटीजन्स वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ मामले में न्यायालय ने सतत विकास, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत तथा पूर्व सावधानी सिद्धांत को भारतीय कानून का हिस्सा माना। टी.एन. गोदावर्मन प्रकरण में वन संरक्षण की व्यापक व्याख्या की गई और वनों की अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण आदेश दिए गए। विभिन्न उच्च न्यायालयों ने भी नदियों, झीलों, भूजल और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को नागरिकों के जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। न्यायपालिका का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि मौलिक अधिकारों का प्रश्न है।
साथियों, पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने समय-समय पर अनेक कानून बनाए हैं। प्रमुख कानूनों में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974; वन संरक्षण अधिनियम, 1980; वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; जैव विविधता अधिनियम, 2002; राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 तथा विभिन्न खनन और वन्यजीव संरक्षण संबंधी कानून शामिल हैं। राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, भूजल प्राधिकरण तथा स्थानीय निकाय पर्यावरणीय नियमों के पालन हेतु जिम्मेदार हैं। परंतु समस्या कानूनों के अभाव की नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है।अनेक क्षेत्रों में अवैध खनन अतिक्रमण और प्राकृतिक संसाधनों की लूट यह संकेत देती है कि निगरानी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की आवश्यकता है।उपग्रह निगरानी,ड्रोन सर्विलांस, डिजिटल खनन ट्रैकिंग, ई- परमिट व्यवस्था और सामाजिक लेखा परीक्षा जैसे उपायों को मजबूत बनाना होगा। साथ ही, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में संलिप्त संगठित अपराध समूहों तथा उनके संरक्षणकर्ताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है। जब तक कानून का निष्पक्ष और समान रूप से पालन नहीं होगा, तब तक पर्यावरणीय न्याय का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
साथियो, पर्यावरण संरक्षण केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय-समय पर अनेक संधियों और समझौतों के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने का प्रयास किया है। वर्ष 1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन आधुनिक वैश्विक पर्यावरण आंदोलन की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है। इसके बाद 1992 का रियो अर्थ समिट, जैव विविधता सम्मेलन (सीबीडी), संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय,क्योटो प्रोटोकॉल, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, रामसर कन्वेंशन,संयुक्त राष्ट्र
मरुस्थलीकरण निरोधक अभिसमय तथा पेरिस जलवायु समझौता वैश्विक पर्यावरण शासन के प्रमुख स्तंभ बने। विशेष रूप से पेरिस समझौते ने वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने का सामूहिक लक्ष्य निर्धारित किया।मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को ओजोन परत संरक्षण के क्षेत्र में सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय समझौतों में गिना जाता है। इन सभी संधियों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके। भारत इन अधिकांश अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का सक्रिय भागीदार रहा है और उसने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित विकास तथा जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहलें भी की हैं।
साथियों अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद इसके बावजूद वर्तमान समय में पर्यावरणीय संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन आज मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। वैश्विक तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा,अत्यधिक गर्मी,लंबे सूखे, असामान्य ठंड, समुद्र स्तर में वृद्धि तथा जैव विविधता का क्षरण विश्वभर में दिखाई दे रहा है।कई बार गर्मियों में ओलावृष्टि वर्षा ऋतु में असामान्य शुष्कता, शीतकाल में असामान्य गर्मी और मौसम चक्रों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। हाल के वर्षों में विश्व ने अनेक विनाशकारी चक्रवातों और तूफानों का सामना किया है, जिनमें भारत और आसपास के क्षेत्र में आए चक्रवात अम्फान, ताउते,यास, बिपरजॉय, मिचौंग, रेमल तथा अन्य उष्णकटिबंधीय तूफान उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के अनेक हिस्सों में भीषण बाढ़, जंगलों में आग, हीटवेव और सूखे की घटनाएं बढ़ी हैं।हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों का पिघलना, भू-स्खलन, बादल फटना और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं नई चिंताएं उत्पन्न कर रही हैं,इसपर वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का वर्तमान स्वरूप में दोहन जारी रहा, तो आने वाले दशकों में जल, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर सटीकता से गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
साथियों, आज आवश्यकता केवल पर्यावरण दिवस मनाने की नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को व्यवहार में उतारने की है। यदि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए, अवैध खनन और वन विनाश में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई हो, प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाए, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयास कहीं अधिक प्रभावी हो सकते हैं।पर्यावरणीय अपराधों को केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि भावी पीढ़ियों के अधिकारों के विरुद्ध अपराध के रूप में देखने की आवश्यकता है। शासन, न्यायपालिका, प्रशासन, वैज्ञानिक समुदाय, नागरिक समाज और आम नागरिकों को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक बन सकें।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह समझना होगा कि स्वच्छ पर्यावरण संविधान का मूल्य है, मानव अधिकार है और सभ्यता के अस्तित्व का आधार है। प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। जब प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएगा,जब प्रशासन पारदर्शी और जवाबदेह होगा, जब कानूनों का कठोर और निष्पक्ष पालन होगा तथा जब प्राकृतिक संसाधनों को माफियाओं और अवैध दोहन से मुक्त किया जाएगा, तभी एक स्वच्छ, सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानपूर्ण भारत तथा टिकाऊ विश्व व्यवस्था का निर्माण संभव होगा। यही आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सच्ची जिम्मेदारी और सबसे बड़ी पर्यावरणीय विरासत होगी।

WhatsApp Image 2026 06 01 at 6.18.22 PM
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

चेहरा नहीं,चरित्र की पहचान बनो

by Page 3 News International Desk
July 4, 2026
0
5

चेहरे की चमक पलभर में,समय कभी भी हर लेता है,चरित्र का उजियारा लेकिन,युग-युग तक साथ रहता है।रूप नहीं, व्यवहार बताता,इंसान...

क्या हमारी थाली सुरक्षित है? -महाराष्ट्र के चौंकाने वाले खाद्य नमूना आँकड़ों से पूरे भारत के लिए सबक -पूरे भारत में जीरो टॉलरेंस टू फूड एडल्टरेशन की नीति लागू की जाए -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
July 4, 2026
0
4

भारत को अब केवल मिलावट मुक्त अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षित भोजन मिशन की आवश्यकता -अब हर राज्य में चाहिए...

क्या शिक्षा सेवा है या बाज़ार? स्कूलों में कॉपी- किताब, यूनिफॉर्म और शैक्षणिक सामग्री की अनिवार्य खरीद पर राष्ट्रीय विमर्श की आवश्यकता

by Page 3 News International Desk
July 3, 2026
0
9

अभिभावक विद्यालय प्रबंधन के ग्राहक नहीं, शिक्षा के साझेदार हैं -विश्वास, सहयोग और पारदर्शिता पर आधारित संबंध ही किसी भी...

किसी के दिल को तोड़ना आसान समझ न लेना

by Page 3 News International Desk
July 2, 2026
0
4

किसी के दिल को तोड़ना आसान समझ न लेना,हर आँसू वक्त की किताब में दर्ज़ हो जाता है।दर्द देकर जो...

कविता – किसी को दुःख देना,एक क़र्ज़ है,

by Page 3 News International Desk
July 2, 2026
0
20

किसी को दुःख देना, एक ऐसा क़र्ज़ है,जिसका हिसाब रखता स्वयं सृष्टि का फ़र्ज़ है।समय की अदालत में हर कर्म...

कन्या भ्रूण हत्या पर निर्णायक प्रहार-क्या अब पीसीपीएनडीटी अधिनियम (संशोधित) 2003 के साथ कठोर आपराधिक कानूनों का संयोजन बनेगा, अवैध लिंग परीक्षण माफिया के अंत का सबसे प्रभावी हथियार? -सभी राज्यों को अपनाने की ज़रूरत -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
July 2, 2026
0
10

सिर्फ डॉक्टर नहीं,पूरा सिंडिकेट निशाने पर: पीसीपीएनडीटी अधिनियम को और कठोर बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का संभावित बड़ा...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

July 2026
MTWTFSS
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031 
« Jun    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.