• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Saturday, September 5, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi News

डिजिटल नशा:क़्या सिगरेट- शराब- तंबाकू की तरह सोशल मीडिया पर भी लगे वैधानिक चेतावनी?-मानसिक सेहत पर मंडराता खतरा?- समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
August 11, 2026
in Hindi News, Hindi Editorials
0
0
SHARES
16
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

सोशल मीडिया का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य, नींद और जीवन- शैली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, सावधानी से उपयोग ज़रूरी

डिजिटल युग में माता-पिता की जिम्मेदारी के साथ-साथ प्लेटफॉर्म डिजाइनर,टेक कंपनी, नियामक और सरकार सभी की जवाबदेही आवश्यक है -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज सोशल मीडिया हमारे जीवन का केवल संचार माध्यम नहीं रह गया है।फेसबुक, इंस्टाग्राम व्हाट्सऐप,यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म अबसूचना मनोरंजन, कारोबार, शिक्षा, राजनीति और सामाजिक संपर्क की हमारी रोजमर्रा की व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इसी सुविधा के साथ गंभीर प्रश्न तेजी से सामने आ रहा है क्या सोशल मीडिया का अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल भी सार्वजनिक स्वास्थ्य का विषय बन चुका है? जिस तरह कभी सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू और शराब को केवल व्यक्ति की निजी पसंद कहा जाता था,लेकिनसमय के साथ यह स्वीकार किया गया कि इनके दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते,उसी प्रकार अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन, एल्गोरिदम और हानिकारक कंटेंट को लेकर कंपनियों की जवाबदेही का सवाल उठ रहा है। विशेषकर बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और भारत में बढ़ती कानूनी एवं नियामकीय सक्रियता संकेत दे रही है कि डिजिटल दुनिया में भी व्यक्तिगत पसंद’ से ‘कॉरपोरेट जवाबदेही’ की यात्रा शुरू हो चुकी है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सोशल मीडिया पर भी सिगरेट जैसी वैधानिक चेतावनी जरूरी है? इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा जाना चाहिए कि अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है’? मेरे विचार से इस विचार को पूरी तरह खारिज करने के बजाय इसे आधुनिकडिजिटल सुरक्षा व्यवस्था का एक हिस्सा बनाया जाना चाहिए।लेकिन केवल चेतावनी लिख देना पर्याप्त नहीं होगा। जिस तरह तंबाकू पर चेतावनी के साथ एडवरटाइजिंग रेस्ट्रिक्टओन्स ,ऐज रेस्ट्रिक्टओन्स और पैकेजग रूल्स बनाए गए,उसी प्रकार सोशल मीडिया के लिए भी बहुस्तरीय व्यवस्था चाहिए।पहला कदम हो सकता है, नाबालिगों के लिए स्पष्ट स्वास्थ्य और सुरक्षा चेतावनी। दूसरा उम्र सत्यापन और चाइल्ड-सेफ डिफाल्ट सेटिंग्स । तीसरा, रात के समय पुश नोटिफिकेशन्स और एडिक्टिव इंगेजमेंट फीचर्स पर नियंत्रण। चौथा,बच्चों के लिए पर्सनालिज्ड रेकमेंडेशन सिस्टमस की स्वतंत्र ऑडिट । पांचवां,सीएसएएम , डीपफेक और सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन सामग्री के खिलाफ अत्यंत तेज डिटेक्शन और रिमूवल व्यवस्था। छठा,कंपनियों की आंतरिक रिस्क रिपोर्ट्स और अलगोरिथमिक सेफ्टी असेसमेंट्स की स्वतंत्र निगरानी। और सातवां उल्लंघन होने पर ऐसा आर्थिक दंड जो कंपनी के लिए केवल ‘व्यावसायिक खर्च बनकर न रह जाए।
साथियों बात अगर हम न्यू मैक्सिको का ऐतिहासिक फैसला: 942 मिलियन डॉलर (लगभग 9000 करोड़ ) की कानूनी चोट और पब्लिक न्यूसेंस का सवाल इस बहस को सबसे बड़ा कानूनी आधार अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य में 6 अगस्त 2026 को देखने को मिला। जहां जूरी ने मेटा प्लेटफार्मस को बच्चों को नुकसान पहुंचाने और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के बारे में उपभोक्ताओं को गुमराह करने के मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए,इस मामले के दूसरे चरण में जज ब्रायन बिएडशीड ने मेटा को अतिरिक्त 567 मिलियन डॉलर देने का आदेश दिया। इससे दोनों चरणों की राशि मिलाकर कुल कानूनी देनदारी 942 मिलियन डॉलर हो गई। इस दूसरी राशि में से लगभग 420 डॉलर मिलियन युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए इस्तेमाल किए जाने हैं, जबकि शेष धनराशि जागरूकता, रोकथाम स्क्रीनिंग और संबंधित कार्यक्रमों पर खर्च होगी। इसके पहले 24 मार्च 2026 को न्यू मैक्सिको की जूरी ने मेटा प्लेटफार्मस को बच्चों को नुकसान पहुंचाने और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के बारे में उपभोक्ताओं को गुमराह करने के मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए 375 मिलियन डॉलर का सिविल पेनल्टी लगाया। न्यू मैक्सिको डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने इसे किसी बड़े टेक प्लेटफॉर्म के खिलाफ राज्य द्वारा ट्रायल में हासिल की गई ऐतिहासिक जीत बताया।
साथियों, इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल जुर्माने की राशि नहीं है, बल्कि अदालत द्वारा प्लेटफॉर्म के सामाजिक प्रभाव को देखने का नजरिया है। जज ने मेटा को पब्लिक नूईसन्स के रूप में जिम्मेदार ठहराया और प्लेटफॉर्म के डिजाइन तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर कठोर रुख अपनाया। अदालत ने नाबालिगों के लिए नोटिफिकेशन, उम्र सत्यापन, स्क्रीन-टाइम और अन्य डिजाइन फीचर्स में बदलाव जैसे उपायों का आदेश दिया। यह वही बिंदु है जहां सोशल मीडिया को केवल ‘एक ऐप’ न मानकर उसके पूरे व्यावसायिक डिजाइन और सामाजिक प्रभाव को कानूनी जांच के दायरे में लाया जा रहा है,यहां एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक सावधानी भी जरूरी है। सोशल मीडिया को सीधे तौर पर सिगरेट जितना नुकसानदायक घोषित करना अभी वैज्ञानिक या कानूनी रूप से स्थापित निष्कर्ष नहीं है। लेकिन यह तुलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों मामलों में बहस इस प्रश्न पर पहुंचती है कि यदि किसी व्यावसायिक उत्पाद के डिजाइन से पूर्वानुमेय नुकसान पैदा होता है, तो क्या निर्माता केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच सकता है कि इस्तेमाल करना उपभोक्ता की सटीकता से व्यक्तिगत पसंद थी?
साथियों बात अगर हम 5 अगस्त 2026 का भारत कनेक्शन :मेटा के सामने कंटेंट, एल्गोरिदम और जवाबदेही की चुनौती इसको समझने की करें तो अमेरिका में कानूनी कार्रवाई के समानांतर भारत में भी मेटा के लिए जवाबदेही का दबाव बढ़ा है। 5 अगस्त 2026 को भारत सरकार और मेटा के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा, हानिकारक कंटेंट, डीपफेक और संचालन संबंधी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित एक फेसबुक वीडियो के हटाए जाने के विवाद ने भी इस व्यापक बहस को राजनीतिक और नियामकीय महत्व दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मेटा की ओर से भारत में बातचीत जारी रखने और एल्गोरिदम तथा कानूनी अनुपालन संबंधी मुद्दों पर काम करने की बात सामने आई।यहां यह अंतर करना जरूरी है कि मेटा द्वारा भारत सरकार से मार्क जुकरबर्ग की व्यक्तिगत औपचारिक माफी और प्लेटफॉर्म पर सीएसएएम , डीपफेक अथवा ऑपरेशनल एररस के संबंध में मेटा की ओर से खेद व्यक्त किए जाने के दावों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग में इन घटनाओं का विवरण पूरी तरह एक जैसा नहीं है। इसलिए इसे अंतिम रूप से यह कहना उचित नहीं होगा कि जुकरबर्ग ने केवल प्रधानमंत्री की पोस्ट हटाए जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी।लेकिन इससे मूल प्रश्न कम गंभीर नहीं होता। भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में जहां करोड़ों लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, वहां प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी केवल ‘कंटेंट हटाने’ तक सीमित नहीं रह सकती।बच्चों को यौन शोषण सामग्री, डीपफेक, साइबर बुलिंग, खतरनाक चुनौतियों, आत्महानि से संबंधित सामग्री अथवा अत्यधिक उत्तेजक कंटेंट से बचाने के लिए एल्गोरिदमिक जवाबदेही, तेज शिकायत निवारण, आयु सत्यापन और मानव निगरानी जैसे उपाय महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
साथियों बात अगर हम 12 अगस्त से अमेरिका में अगला बड़ा मोर्चा: क्या पूरा बिजनेस मॉडल कटघरे में आएगा?इसको समझने की करें तो न्यू मैक्सिको का फैसला अकेला मामला नहीं है। अमेरिका में मेटा के खिलाफ अनेक राज्यों द्वारा दायर मुकदमों का व्यापक कानूनी दबाव जारी है। आपके लेख के संदर्भ में 12 अगस्त 2026 से शुरू होने वाली कार्यवाही विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसमें अनेक राज्यों की ओर से सोशल मीडिया के कथित एडिक्टिव डिज़ाइन और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित आरोपों पर सुनवाई आगे बढ़ने वाली है। इसके बाद 18 अगस्त 2026 से शुरुआती दलीलें शुरू होने की योजना बताई गई है।इन मामलों का असली महत्व संभावित जुर्माने से भी बड़ा है। यदि अदालतें यह मानती हैं कि किसी प्लेटफॉर्म नेजानबूझकर या लापरवाही से ऐसे डिजाइन फीचर्स बनाए जिनका उद्देश्य उपयोगकर्ता को अधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना था, जबकि कंपनी को बच्चों पर संभावित नुकसान की जानकारी थी, तो भविष्य में टेक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने का पूरा कानूनी ढांचा सटीकता से बदल सकता है।
साथियों,यानें सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि बच्चे ने कितने घंटे इंस्टाग्राम चलाया?बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि प्लेटफॉर्म ने उसे बार-बार लौटने के लिए कितना डिजाइन किया? इंफीनिट स्क्रॉल ऑटोप्ले,लगातार नोटिफिकेशन्स, हाईली पर्सनालिज्ड रेकमेंडानिओन्स और इंगेजमेंट – बेस्ड अलगोरिथम्स इसी बहस के केंद्र में हैं।यूरोपीय आयोग ने भी 10 जुलाई 2026 को प्रारंभिक निष्कर्ष में मेटा के इंस्टाग्राम और फेसबुक के एडिक्टिव डिज़ाइन को डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत संभावित उल्लंघन माना। आयोग ने इंफीनिट स्क्रॉल ,ऑटोप्ले , पुश नोटिफिकेशन्स और पर्सनालिज्ड रेकमेंडर सिस्टमस को जांच के केंद्र में रखा।
साथियों बात अगर हम दुनियाँ का रुख बदल रहा है: इसको समझने की करें तोऑस्ट्रेलिया से ब्रिटेन तक बच्चों के लिए डिजिटल सीमाएं सोशल मीडिया रेगुलेशन अब किसी एक देश की कहानी नहीं है। ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दुनिया के सबसे कठोर मॉडलों में से एक लागू किया है। वहां प्लेटफॉर्मों पर यह जिम्मेदारी डाली गई है कि वे अंडर -16 यूजरस के अकाउंट रोकने के लिए उचित कदम उठाएं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है; बच्चों या उनके अभिभावकों पर दंड नहीं है।ब्रिटेन ने भी जून 2026 में घोषणा की है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लाया जाएगा। सरकार के अनुसार प्रस्तावित बदलावों के लागू होने का लक्ष्य स्प्रिंग 2027 है। साथ ही लाइवस्ट्रीमिंग और स्ट्रागर्स कांटेक्टग चिल्ड्रन जैसे कुछ जोखिमपूर्ण फीचर्स पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध प्रस्तावित हैं। यहां से एक नई नीति-दृष्टि उभरती है बच्चे को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं कि ‘फोन कम चलाओ’; प्लेटफॉर्म को भी ऐसा डिजाइन करना होगा कि वह बच्चे को अनावश्यक रूप से स्क्रीन पर बांधे रखने के लिए प्रेरित न करे।
साथियों बात अगर कर हम भारत के लिए बड़ा सवाल: चेतावनी लिखें, उम्र सत्यापित करें या डिजाइन ही बदलें? इसको समझने की करें तो भारत में इस बहस का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यहां सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं होता। शिक्षा, रोजगार, व्यापार, समाचार, राजनीतिक संवाद और सामाजिक संपर्क तक इसकी पहुंच है। इसलिए अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया की तरह सीधा प्रतिबंध भारत में लागू करना एक जटिल प्रश्न होगा। भारत के लिए शायद अधिक व्यावहारिक रास्ता प्रतिबंध से पहले जवाबदेही का हो सकता है। भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को विशेष सुरक्षा देता है। इसके साथ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट और इंटरमीडिएरी रूल्स प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारियों का आधार बनते हैं। ऐसे में बच्चों के लिए ऐजअसन्शुरन्स पेरेंटल कण्ट्रोलस , प्राइवेसी- बाई – डिफाल्ट ,हरमफुल- कंटेंट डिटेक्शन और तेज शिकायत निवारण को और मजबूत किया जा सकता है।लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना होगा सेफ हर्बर का मतलब यह नहीं कि प्लेटफॉर्म हर कंटेंट के लिए स्वतः दोषी है,और केवल किसी एक विवाद से सेफ हर्बर अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। भारत में इंटरमीडिएरी प्रोटेक्शन विशिष्ट वैधानिक शर्तों और ड्यू डिलीजेंस से जुड़ा हुआ है। इसलिए सोशल मीडिया कंपनियों पर कार्रवाई भी कानून की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए।इसी प्रकार अमेरिका का सीओंपीपीए मुख्य रूप से बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी और व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह से संबंधित है; इसे सोशल मीडिया एडिक्शन के लिए कोई सार्वभौमिक ‘प्रतिबंध कानून’ समझना सही नहीं होगा। यूरोपीय संघ का डीएसए इससे कहीं व्यापक प्लेटफार्म – रिस्क फ्रेमवर्क प्रदान करता है। वहां बच्चों को बेहेवियरल एडवरटाइजिंग से बचाने और प्लेटफार्म रिस्क्स का आकलन करने जैसे प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। हालिया मेटा जांच इस बात का संकेत है कि अब एल्गोरिदम स्वयं नियामकीय जांच का विषय बन चुका है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

RelatedPosts

कविता – बच्चोँ क़ो मारें नहीं,प्यार से सँवारें

3,800 बच्चों की मुक्ति ने खोला बड़ा सवाल: बचपन बिक रहा है,कानून देख रहा है? :ढाबों से कारखानों तक मासूम हाथों का शोषण; कानून मौजूद, कार्रवाई भी संभव, तो फिर बालश्रम खत्म क्यों नहीं?

एस एस पी डॉ गौरव ग्रोवर ने किया रामदास नगर चौकी का लोकार्पण

WhatsApp Image 2026 08 10 at 7.57.57 PM

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

कविता – बच्चोँ क़ो मारें नहीं,प्यार से सँवारें

by Page 3 News International Desk
September 5, 2026
0
4

शरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,गलती को सीख...

3,800 बच्चों की मुक्ति ने खोला बड़ा सवाल: बचपन बिक रहा है,कानून देख रहा है? :ढाबों से कारखानों तक मासूम हाथों का शोषण; कानून मौजूद, कार्रवाई भी संभव, तो फिर बालश्रम खत्म क्यों नहीं?

by Page 3 News International Desk
September 5, 2026
0
2

बच्चे मजदूर नहीं,भारत का भविष्य हैं :नक्सल मुक्त, नशामुक्त भारत की तरह बालश्रम मुक्त भारत का संकल्प की डेट लाइन...

एस एस पी डॉ गौरव ग्रोवर ने किया रामदास नगर चौकी का लोकार्पण

by Page 3 News International Desk
September 5, 2026
0
7

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या। अयोध्या में थानाध्यक्ष कार्यालय व आदर्श मेस के नवीनीकरण कार्य और थाना मवई अंतर्गत नवनिर्मित चौकी 'रामदास नगर'...

अवधेश पांडेय बादल का सर्किट हाउस में जबरदस्त हुआ स्वागत

by Page 3 News International Desk
September 5, 2026
0
4

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या।भाजपा के नवनियुक्त क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पांडे बादल का सर्किट हाउस में जबरदस्त स्वागत हुआ। स्वागत के बाद उन्होंने...

ट्यूशन पढ़ने गयी किशोरी को टीचर रोहित पर लगा भगा ले जाने का आरोप

by Page 3 News International Desk
September 5, 2026
0
3

महेंद्र त्रिपाठीअयोध्या।ट्यूशन पढ़ने गई किशोरी लापता, ट्यूशन पढ़ने वाले टीचर रोहित पर बहला फुसला कर किशोरी को भगा ले जाने...

कविता – बच्चे मन के सच्चे

by Page 3 News International Desk
September 4, 2026
0
13

बच्चे मन के सच्चे,निर्मल इनके भाव,हँसी बाँटते जग में,मिटा देते हर घाव।न छल-कपट की भाषा,न मन में कोई भार,इनकी मासूमियत...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
« Aug    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.