• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Monday, May 25, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

दिल्ली आबकारी नीति आरोपी बरी प्रकरण- न्यायिक जवाबदेही अभियोजन की गुणवत्ता और राजनीतिक आरोप- प्रत्यारोप की सीमाओं पर उठते वैश्विक प्रश्न-एक समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
February 28, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
3
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

नीति निर्धारकों के लिए यह समय है कि वे एक सशक्त क्षतिपूर्ति और जवाबदेही तंत्र विकसित करें, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की लंबी यात्रा में आरोपी को जीवन का बहुमूल्य समय न गंवाना पड़े

निचिली से ऊपरी अदालत आरोपों को खारिज, अपील डिसमिस कर दे,तो क्या आरोपी को सामाजिक आर्थिक राजनीतिक क्षति,मानसिक आघात, इन सबकी भरपाई केवल “बरी” शब्द से हो सकती है? -नीति निर्धारकों को को इसपर कानून बनाने की ज़रूरत -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

RelatedPosts

कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) संशोधन नियम, 2026 लागू- सीएनजी, एलपीजी और हाइड्रोजन पंपों पर नहीं होगी माप-तौल में हेराफेरी :कानूनी मापन व्यवस्था में बड़े सुधार की ओर भारत का निर्णायक कदम -समग्र व्यापक विश्लेषण

शिक्षकों को चुनावी प्रक्रिया, जनगणना,आर्थिक सर्वेक्षण, पल्स पोलियो अभियान, स्थानीय निकायों के डाटा संकलन, आवारा कुत्तों की गणना जैसे कार्यों में लगाना- बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप- 31 जुलाई 2026 तक रोक-क्या शिक्षक शिक्षा दें या शासन के गैर- शैक्षणिक कार्य करें? -समग्र व्यापक विश्लेषण

इबोला का नया वैश्विक खतरा- कोरोना के बाद दुनियाँ फिर एक भयावह स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर?- डब्ल्यूएचओ ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया -भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई,2026 स्थगित-समग्र व्यापक विश्लेषण

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत सहित पूरी दुनियाँ के लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में आपराधिक न्याय प्रणाली बहु- स्तरीय,जटिल और प्रक्रिया- प्रधान होती है। निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय तक,हर स्तरपर साक्ष्य, गवाह,परिस्थितिजन्य तथ्य,अभियोजन की दलीलें और बचाव पक्ष की आपत्तियाँ विस्तार से परखी जाती हैं।यह प्रक्रिया विधि- राज (रूल ऑफ़ लॉ ) की रक्षा के लिए आवश्यक है, परंतु इसकी लंबी अवधि अक्सर आरोपित व्यक्ति के जीवन का बहुमूल्य समय निगल जाती है।जब कोई व्यक्ति वर्षों तक मुकदमे और कारावास झेलने के बाद अंततः निर्दोष सिद्ध होता है,तब मूल प्रश्न उठता है उसके बीते हुए समय,सामाजिक प्रतिष्ठा, आर्थिक क्षति और मानसिक आघात की भरपाई कौन करेगा?27 फरवरी 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत द्वारा दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपितों को बरी किए जाने के बाद यह प्रश्न और तीव्रता से उभरा है।अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला ठोस साक्ष्यों पर आधारित नहीं था और साजिश की थ्योरी अनुमानात्मक थी। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह फैसला केवल एक आपराधिक मुकदमे का अंत नहीं, बल्कि न्यायिक जवाबदेही, अभियोजन की गुणवत्ता और राजनीतिक आरोप- प्रत्यारोप की सीमाओं पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण सटीक प्रारंभ बिंदु बन गया है।
साथियों बात अगर हम दिल्ली आबकारी नीति मामले में न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियों क़ो समझने की करें तो राउज एवेन्यू अदालत ने हजारों पन्नों की चार्जशीट का विश्लेषण करते हुए पाया कि आरोप गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होते।अदालत ने कहा कि आबकारी नीति के निर्माण में व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा सिद्ध नहीं हुई।विशेष रूप से, अदालत ने यह भी कहा कि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति का नाम बिना ठोस प्रमाण जोड़ा जाना विधि- सिद्धांतों के विरुद्ध है।मुख्य आरोपी बताए गए कुलदीप सिंह के विरुद्ध भी कोई ठोस सामग्री न मिलने पर उन्हें बरी किया गया। मीडिया में ऐसा कहा जा रहा है क़ि अदालत ने जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश भी दिए,जो यह संकेत देता है कि न्यायालय ने जांच की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठाए।अभियोजन एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो नें 23 व्यक्तियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था,परंतु विशेष न्यायाधीश ने सभी के विरुद्ध आरोप तय करने से इनकार कर दिया। अब एजेंसी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय और संभावित रूप से सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की संभावना है, जिससे यह मामला आगे भी बहुत वर्षों तक प्रिक्रिया के तहत चल सकता है।
साथियों बात अगर हम राउज एवेन्यू कोर्ट की चार महत्वपूर्ण टिप्पणियों को समझने की करें तो एक मीडिया चैनल के अनुसार कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी किया। कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। चार्जशीट में विरोधाभास हैं, जो कथित साजिश (आरोपों) की पूरी थ्योरी को कमजोर करते हैं।अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी (आईओ) के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं (1) आबकारी नीति पर क्या कहा-आबकारी नीति के निर्माण में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी। अभियोजन पक्ष (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच पर खरा नहीं उतरता। सीबीआई ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसका सिद्धांत ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित था।(2)केजरीवाल पर क्या कहा- केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है (3) मुख्य आरोपी कुलदीप पर क्या कहा- मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को बरी करते हुए कहा कि हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी। (4) मनीष सिसोदिया पर क्या कहा- सिसोदिया पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन अदालत ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई।
साथियों बात अगर हम न्यायिक प्रक्रिया बनाम राजनीतिक परिणाम इसको समझने की करें तो इस प्रकरण ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा किया?क्या न्यायिक आरोप और राजनीतिक परिणामों के बीच कोई संतुलन होना चाहिए?आरोपों के दौरान व्यापक मीडिया कवरेज, 24 घंटे की बहसें,और चुनावी वातावरण में आरोपों की पुनरावृत्ति ने सार्वजनिक धारणा को प्रभावित किया। यदि बाद में अदालत आरोपों को खारिज कर दे, तो क्या पूर्व में हुई राजनीतिक और सामाजिक क्षति की भरपाई संभव है? लोकतंत्र में आरोप लगाना और उनकी जांच होना सामान्य प्रक्रिया है,परंतु यदि जांच की गुणवत्ता कमजोर हो और आरोप सिद्ध न हों, तो राजनीतिक जीवन पर उसका प्रभाव असमानुपाती हो सकता है। यह स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं; विश्व के अनेक लोकतंत्रों में भी अभियोजन और राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर हमेशा बहस होती रही है।निर्दोष व्यक्ति की क्षति: सामाजिक आर्थिक और नैतिक आयामयदि कोई व्यक्ति लंबी अवधि तक जेल में रहता है और अंततः बरी हो जाता है, तो उसकी क्षतिबहु-आयामी होती है। (1) सामाजिक क्षति:समाज में बदनामी,रिश्तों में दरार, और सार्वजनिक छवि का ह्रास।(2) आर्थिक क्षति:आय का नुकसान कानूनी खर्च,संपत्ति का अवमूल्यन। (3) मानसिक आघात: अवसाद, तनाव, और दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव। (4) राजनीतिक प्रभाव: यदि आरोपी सार्वजनिक पद पर हो, तो चुनावी हार या पद से हटना।इन सबकी भरपाई केवल “बरी” शब्द से नहीं हो सकती।भारत में ऐसा कोई समग्र केंद्रीय कानून नहीं है, यद्यपि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन पर न्यायालय क्षतिपूर्ति दे सकते हैं।
साथियों बात अगर हम क्या अभियोजन पर दंडात्मक लागत लगनी चाहिए? इसको समझने की करें तो एक महत्वपूर्ण नीति प्रश्न यह है कि यदि अभियोजन बार-बार अपील करता है और हर स्तरपर असफल होता है,तो क्या उस पर दंडात्मक लागत लगाई जानी चाहिए? इससे दो संभावित लाभ हो सकते हैं:(1) अनावश्यक या कमजोर मामलों में अपील की प्रवृत्ति घटेगी।(2) जांच एजेंसियाँ अधिक जिम्मेदारी और गुणवत्ता के साथ आरोपपत्र दाखिल करेंगी।हालाँकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि अपील का अधिकार न्यायिक प्रणाली का अभिन्न अंग है।अतः संतुलन आवश्यक है, दुरुपयोग पर रोक,परंतु न्याय पाने के अवसर का संरक्षण होना चाहिए।
साथियों बात अगर हम जांच एजेंसियों की जवाबदेही को समझने की करें तो,जब अदालत यह कहे कि साजिश की थ्योरी अनुमान पर आधारित थी, तो यह जांच की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न है। यदि जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच का आदेश दिया गया है, तो यह संकेत है कि न्यायालय जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है।नीति निर्धारकों को विचार करना चाहिए: (1) क्या जांच अधिकारियों के लिएस्वतंत्र निगरानी तंत्र हो?(2)क्या अभियोजन स्वीकृति से पूर्व स्वतंत्र विधिक समीक्षा अनिवार्य हो? (3) क्या राजनीतिक संवेदनशील मामलों में विशेष न्यायिक पर्यवेक्षण हो?
साथियों बात अगर हम मीडिया ट्रायल और सार्वजनिक धारणा इसको समझने की करें तो,आज के डिजिटल युग में मीडिया ट्रायल वास्तविक न्याय से पहले ही सामाजिक निर्णय सुना देता है। यदि बाद में अदालत आरोपों को खारिज कर दे, तो क्या मीडिया उसी तीव्रता सेनिर्दोषता का प्रचार करता है?मीडिया की स्वतंत्रता लोकतंत्र का स्तंभ है, परंतु प्रसमप्शन ऑफ़ इनोसेंस (निर्दोष मान्यता) सिद्धांत की रक्षा भी उतनी ही सटीक आवश्यक है।जितनी क़ि क्षतिपूर्ति की संभावित नीति रूपरेखा।
साथियों बात अगर हम नीति निर्धारकों के लिए कुछ ठोस सुझावों को समझने की करें तो उन्हें इन कानून को बनाने पर विचार करना चाहिए (1)राष्ट्रीय क्षतिपूर्ति कानून:निर्दोष सिद्ध व्यक्तियों के लिए प्रति वर्ष कारावास पर निश्चित राशि।(2)कानूनी खर्च की प्रतिपूर्ति: राज्य द्वारा संपूर्ण कानूनी व्यय की भरपाई। (3) प्रतिष्ठा पुनर्स्थापन आयोग: सार्वजनिक रूप से निर्दोषता की घोषणा और रिकॉर्ड शुद्धिकरण।(4) मानसिक स्वास्थ्य सहायता: दीर्घकालिक परामर्श और पुनर्वास कार्यक्रम। (5) अभियोजन जवाबदेही अधिनियम: दुर्भावनापूर्ण या लापरवाह अभियोजन पर दंड।(6) अपीलों की अनंत श्रृंखला: क्या सीमा होनी चाहिए?यदि हर स्तर परअपील और पुनरीक्षण चलता रहे,तो मुकदमा दशकों तक लंबित रह सकता है इसलिए:अपील की समय-सीमा तय हो।निराधार अपील पर लागत।,संवैधानिक पीठ द्वारा शीघ्र निस्तारण।,संविधान और न्यायपालिका पर विश्वास-बरी होने के बाद दिए गए वक्तव्यों में संविधान और न्यायपालिका पर विश्वास व्यक्त कियागयाहालांकि अपीलों और अन्य प्रक्रियाओं के संबंध में अनेक नियम बने हुए हैं फिर भी उनमें कुछ संशोधन की आवश्यकता है,यह लोकतंत्र की शक्ति है कि अंततः न्यायिक प्रक्रिया आरोपों को परखती है। परंतु यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रक्रिया स्वयं न्यायसंगत, त्वरित और सटीक स्तर पर उत्तरदायी हो।
साथियों बात अगर हम इस मुद्दे कोअंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में समझने की करें तो क्षतिपूर्ति की व्यवस्थाएँ कई देशों में रॉंगफुल प्रोसेक्युशन या मिस्कैरिज ऑफ़ जस्टिस के मामलों में क्षतिपूर्ति की व्यवस्था है।उदाहरण के लिए:यूनाइटेड किंगडम: क्रिमिनल जस्टिस एक्ट के अंतर्गत निर्दोष सिद्ध होने पर मुआवजा।संयुक्त राज्य अमेरिका: कई राज्यों में प्रति वर्ष कारावास के लिए निश्चित राशि का प्रावधान।कनाडा: संघीय स्तर पर विशेष समझौते के माध्यम से क्षतिपूर्ति।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि न्याय केवल निर्णय नहीं, पुनर्स्थापन भी है,दिल्ली आबकारी नीति प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया केवल दोष या निर्दोष तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य और नागरिक के बीच विश्वास का आधार है।यदि कोई व्यक्ति वर्षों तक कारावास झेलने के बाद निर्दोष सिद्ध होता है,तो केवल “बरी” शब्द पर्याप्त नहीं।न्याय का अर्थ है,समय पर निष्पक्ष सुनवाई,गुणवत्तापूर्ण जांच,और निर्दोष के लिए पूर्ण पुनर्स्थापन।नीति निर्धारकों के लिए यह समय है कि वे एक सशक्त क्षतिपूर्ति और जवाबदेही तंत्र विकसित करें, जिससे भविष्य में किसी भी नागरिक को अनावश्यक रूप से जीवन का बहुमूल्य समय न गंवाना पड़े। न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता तभी सुदृढ़ होगी जब वह त्रुटि होने पर उसे स्वीकार कर, उसकी भरपाई की स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित करे।

kishan2 2
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) संशोधन नियम, 2026 लागू- सीएनजी, एलपीजी और हाइड्रोजन पंपों पर नहीं होगी माप-तौल में हेराफेरी :कानूनी मापन व्यवस्था में बड़े सुधार की ओर भारत का निर्णायक कदम -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 25, 2026
0
2

कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) संशोधन नियम, 2026 केवल एक तकनीकी संशोधन नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा, उपभोक्ता संरक्षण...

शिक्षकों को चुनावी प्रक्रिया, जनगणना,आर्थिक सर्वेक्षण, पल्स पोलियो अभियान, स्थानीय निकायों के डाटा संकलन, आवारा कुत्तों की गणना जैसे कार्यों में लगाना- बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप- 31 जुलाई 2026 तक रोक-क्या शिक्षक शिक्षा दें या शासन के गैर- शैक्षणिक कार्य करें? -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 24, 2026
0
16

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्णय शिक्षा की गरिमा, संवैधानिक सीमाओं और विधि के शासन, तीनों की एक साथ रक्षा करने...

इबोला का नया वैश्विक खतरा- कोरोना के बाद दुनियाँ फिर एक भयावह स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर?- डब्ल्यूएचओ ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया -भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई,2026 स्थगित-समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 23, 2026
0
10

इबोला- दुनियाँ में भय का पर्याय-संक्रमण की बढ़ती रफ्तार, बड़े शहरों तक पहुंचना, अंतरराष्ट्रीय स्तरपर गंभीर चिंता का विषय व...

सुंदरता बनाम सुरक्षा-औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (सीडीएससीओ) की सख़्ती- कॉस्मेटिक इंजेक्शन के नाम पर बढ़ते स्वास्थ्य खतरे पर बड़ा प्रहार- समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 22, 2026
0
8

सुंदरता की अंधी दौड़ पर सरकार की रोक- औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और सीडीएससीओ की नई चेतावनी 21...

जातिगत जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक मुहर चुनौती याचिका 20 मई 2026 को खारिज- संवैधानिक वैधता, सामाजिक न्याय और भारत की नई नीति- व्यवस्था की दिशा क़ा व्यापक समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 21, 2026
0
10

भारत की जनगणना 2027 डिजिटल इंडिया और डेटा- आधारित गवर्नेंस के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियानों में से एक माना जा...

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख-19 मई 2026 को सभी याचिकाएं खारिज- संविधान के अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या- जनसुरक्षा बनाम पशु अधिकार की बहस में नया मोड़

by Page 3 News International Desk
May 20, 2026
0
14

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 मई 2026 को दिया गया निर्णय आने वाले समय में नगर निकायों, राज्य सरकारों, पशु कल्याण...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

May 2026
MTWTFSS
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
« Apr    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • E-Magazine
  • Management Team
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.