चेहरे की चमक पलभर में,समय कभी भी हर लेता है,
चरित्र का उजियारा लेकिन,युग-युग तक साथ रहता है।
रूप नहीं, व्यवहार बताता,इंसान कितना महान है,
चरित्र ही जीवन का सच्चा,सबसे ऊँचा सम्मान है।
चेहरा तो कुछ मिनटों में,दर्पण के आगे सँवर जाता,
चरित्र मगर हर दिन तपकर,जीवन भर में निखर पाता।
सत्य, दया, श्रम और विनय से,इसका रूप सँवारा जाए,
ऐसा जीवन जियो कि जग भी,सम्मान से शीश झुकाए।
रूप समय के साथ बदलता,यौवन भी ढल जाता है,
सच्चा चरित्र मृत्यु के बाद भी,लोगों में बस जाता है।
धन-दौलत सब यहीं रहेंगे,साथ नहीं कुछ जाएगा,
चरित्र का अमृत ही केवल,यश का दीप जलाएगा।
चेहरे पर मुस्कान सजाना,कोई कठिन कहानी नहीं,
मन को निर्मल रखना लेकिन,सबसे बड़ी साधना यही।
जिसके भीतर सत्य बसता,वही सदा महान कहलाता,
उसके हर छोटे से कर्म में,ईश्वर का आशीष समाता।
तारीफ़ कभी चेहरे की नहीं,चरित्र की पहचान बने,
हर इंसान के जीवन का बस,यही सबसे बड़ा धन बने।
ऐसे कर्म करो किशन कि दुनिया,नाम तुम्हारा गुनगुनाए,
सुंदर चेहरा नहीं,सुंदर चरित्र ही अमर हो जाए।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

