दीपावली की एक रात, विश्वभर में भारतीय संस्कृति का विराट प्रकाश! मां महालक्ष्मी की कृपा से संपन्नता की कामना, अयोध्या का दीपोत्सव और ट्रंप के व्हाइट हाउस तक दिवाली की गूंज !
लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त में माँ लक्ष्मी अपनी कृपा दृष्टि बरसाने निकली है, जिसपर नज़र पड़ी उसकी किस्मत निहाल धन धान्य से मालामाल ऐसी मान्यता है – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दीपावली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं,बल्कि भारतीय सभ्यता,आध्यात्मिक चेतना, आर्थिक समृद्धि,सामाजिक सद्भाव और विश्व सांस्कृतिक एकता का ऐसा महापर्व है,जिसकी रोशनी अब भारत की सीमाओं को पार कर पूरी दुनिया में फैल चुकी है रविवार 8 नवंबर 2026 को कार्तिक अमावस्या के अवसर पर भारत सहित विश्व के अनेक देशों में दीपावली मनाई जाएगी।इस अवसर पर करोड़ों भारतवंशी अपने घरों, मंदिरों व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों को दीपमालाओं से सजाकर मां महालक्ष्मी भगवान गणेश तथा भगवान श्रीराम की आराधना करेंगे।अयोध्या की पावन धरती से लेकर न्यूयॉर्क,लंदन,सिडनी,टोरंटो, सिंगापुर और दुबई तक भारतीय संस्कृति का प्रकाश दिखाई देगा। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इस वर्ष की दीपावली का विशेष महत्व इसलिए भी है कि एक ओर यह दरिद्रता से संपन्नता,अज्ञान से ज्ञान और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देती है,वहीं दूसरी ओर विश्व समुदाय के सामने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वैश्विक पहचान को प्रस्तुत करती है।
साथियों बात अगर हम दीपावली की धार्मिक मान्यता, मां महालक्ष्मी की कृपा और दरिद्रता से संपन्नता की ओर बढ़ने के आध्यात्मिक संदेश की करें तो भारतीय परंपरा में मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात्रि मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छता, पवित्रता, सदाचार तथा श्रद्धा से परिपूर्ण घरों में उनका स्वागत किया जाता है। भक्तजन विश्वास के साथ मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि उनके परिवार से आर्थिक संकट, दरिद्रता और कष्ट दूर हों तथा घर में सुख,शांति, स्वास्थ्य, धन-धान्य और समृद्धि का वास हो। दीपावली की रात्रि में लक्ष्मी पूजन का क्षण इसी आस्था का केंद्र होता है। मां महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों की अवधारणा भी समृद्धि के व्यापक दर्शन को सामने रखतीहैआदिलक्ष्मी विद्यालक्ष्मीसौभाग्यलक्ष्मीअमृतलक्ष्मी,कामलक्ष्मी,सत्यलक्ष्मी भोगलक्ष्मी और योगलक्ष्मी के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि वास्तविक संपन्नता केवल बैंक खाते, सोने-चांदी अथवा भौतिक संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्या,सदाचार, स्वास्थ्य, सौभाग्य, संतोष और आध्यात्मिक उन्नति भी लक्ष्मी के ही सटीकता से व्यापक स्वरूप हैं।
साथियों इस दर्शन को प्रातः काल की प्रचलित प्रार्थना ‘कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती’ भी सुंदर रूप में अभिव्यक्त करती है। इसका भावार्थ है कि मनुष्य के हाथों में कर्म, ज्ञान और सदाचार की शक्ति विद्यमान है। अर्थात केवल मां लक्ष्मी से धन मांगना पर्याप्त नहीं, बल्कि अपने हाथों से ईमानदार परिश्रम करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और किसी का अहित न करना भी आवश्यक है। दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा का भी यही गहरा संदेश है। लक्ष्मी समृद्धि की प्रतीक हैं और गणेश सद्बुद्धि, विवेक तथा शुभारंभ के अधिष्ठाता माने जाते हैं। धन के साथ सद्बुद्धि का संगम ही वास्तविक कल्याणकारी संपन्नता है। विवेकहीन धन अहंकार, अनैतिकता और विनाश का कारण बन सकता है,जबकि ईमानदारी से अर्जित संपत्ति परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देती है।
साथियों, बात अगर हम दीपावली के दूसरे महत्वपूर्ण धार्मिक पक्ष भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की करें तो मान्यता है कि भगवान श्रीराम,माता सीता और लक्ष्मणजी चौदह वर्षों का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर संपूर्ण नगरी को प्रकाशमय कर दिया था। तभी से दीपावली को धर्म, सत्य, न्याय और मर्यादा की विजय के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।इस प्रकार दीपावली के दो प्रमुख आध्यात्मिक संदेश सामने आते हैं। पहला, मां महालक्ष्मी की आराधना के माध्यम से आर्थिक और आध्यात्मिक समृद्धि की कामना तथा दूसरा,भगवान श्रीराम के आदर्शों के माध्यम से सत्य, कर्तव्य, न्याय और सुशासन की स्थापना। यही कारण है कि दीपावली घरों में पूजा का पर्व होने के साथ- साथ सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का भी महापर्व बन गई है।
साथियों, बात अगर हम भारत के शासकीय प्रशासनिक और सार्वजनिक अवकाश की करें तो केंद्र सरकार की वर्ष 2026 की राजपत्रितअवकाश सूची में 8 नवंबर को दीपावली का अवकाश दर्ज है।लेकिन इस बार यह रविवार को पड़ रही है।केंद्र सरकार के अवकाश संबंधी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि साप्ताहिक अवकाश के दिन पड़ने वाले त्योहार के लिए सामान्यतःअतिरिक्त प्रतिपूर्ति अवकाश नहीं दिया जाएगा।हालांकि अलग- अलग राज्यों में सरकारी कार्यालयों, बैंकों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और स्थानीय संस्थानों के अवकाश संबंधी आदेश अलग हो सकते हैं। डाक विभाग की अखिल भारतीय अवकाश सूची में भी 8 नवंबर को दीपावली का अवकाश दर्ज है। इसका अर्थ है कि रविवार होने के कारण सामान्यतःसरकारी कार्यालयों विद्यालयों और अधिकांश संस्थानों में पहले से ही साप्ताहिक छुट्टी रहेगी, जबकि निजी प्रतिष्ठानों के नियम सटीकता से अलग हो सकते हैं।
साथियों, बात अगर हम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस में दीपावली उत्सव की करें तो इस वर्ष एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 नवंबर 2026 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में भारतीय- अमेरिकी समुदाय के प्रमुख सदस्यों,अधिकारियों और उद्योगपतियों के साथ दीपावली समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक दीप प्रज्वलित किया। इस कार्यक्रम में भारत के अमेरिका स्थित राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, प्रसिद्ध भारतीय शेफ विकास खन्ना, उद्यमी विशाल गोंडल, आईबीएम के प्रमुख अरविंद कृष्णा, माइक्रोन के प्रमुख संजय मेहरोत्रा, एफबीआई निदेशक काश पटेल तथा अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक जय भट्टाचार्य सहित अनेक प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं। उद्यमी विशाल गोंडल ने राष्ट्रपति ट्रंप को तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा की प्रति भेंट की। इस आयोजन ने अमेरिकी प्रशासन के सर्वोच्च राजनीतिक कार्यालय में भारतीय संस्कृति की उपस्थिति को एक बार फिर रेखांकित किया।
साथियों बात अगर हम विश्व के विभिन्न देशों में बसे भारत वंशियों द्वारा दीपावली मनाने की करें तो भारतीय संस्कृति का यह पर्व अब अंतरराष्ट्रीय सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।अमेरिका में न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया, शिकागो और टेक्सास जैसे क्षेत्रों में भारतीय समुदाय के लोग मंदिरों, सामुदायिक केंद्रों और निजी आवासों में लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपदान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक भोज का आयोजन करते हैं।न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर सहित अनेक सार्वजनिक स्थलों पर भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों की चर्चा रहती है। कनाडा के टोरंटो, ब्रैम्पटन और वैंकूवर में भारतीय समुदाय दीपावली को परिवार,सामाजिक मेल- मिलाप, संगीत, नृत्य और सामुदायिक उत्सव के रूप में मनाता है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न में भी मंदिरों तथा भारतीय संगठनों के माध्यम से दीपावली के आयोजन होते हैं। सिंगापुर के लिटिल इंडिया क्षेत्र में दीपों, सजावट और भारतीय व्यंजनों से उत्सव का वातावरण बनता है।ब्रिटेन के संदर्भ में इस बार एक महत्वपूर्ण अपडेटहै।लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में 25 अक्टूबर को प्रस्तावित आधिकारिक दीपावली समारोह खराब मौसम और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण रद्द कर दिया गया था। इसलिए उसे 8 नवंबर को होने वाला निश्चित कार्यक्रम बताना सही नहीं होगा। दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात में दुबई के सुक अल सीफ में 7 और 8 नवंबर को नूर फेस्टिवल ऑफ लाइट्स आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रकाश की शोभायात्रा, ढोल, संगीत और नृत्य प्रस्तुतियां शामिल हैं। दुबई के मिरेकल गार्डन में भी 7 नवंबर को भारतीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों रंगोली, दीप सजावट और रोशनी से जुड़ा विशेष आयोजन निर्धारित है। इन आयोजनों से स्पष्ट होता है कि भारतवंशी जहां भी बसे हैं, उन्होंने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को जीवित रखा है और स्थानीय समाज को भी इस उत्सव से जोड़ने का प्रयास किया है।
साथियों बात अगर हम पर्यावरण संरक्षण और हरित दीपावली की करें तो उत्सव का वास्तविक आनंद तभी सार्थक है जब उससे दूसरे नागरिकों, बच्चों, बुजुर्गों, पशु-पक्षियों और प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली -एनसीआर के लिए 7 और 8 नवंबर को प्रमाणित हरित पटाखों की बिक्री तथा उपयोग की सीमित अनुमति दी है। पटाखे केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात्रि 8 से 10 बजे तक चलाए जा सकते हैं।अस्पतालों,वृद्धाश्रमों,शिक्षण संस्थानों औरअधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर रोक है। यह अस्थायी छूट केवल निर्धारित दो दिनों के लिए है और 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध फिर बहाल होना है। यह आदेश विशेष रूप से दिल्ली- एनसीआर के लिए है,इसे पूरे भारत में एक समान लागू आदेश नहीं समझना चाहिए। अन्य राज्यों में संबंधित स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करना जरूरी है। मिट्टी के दीपक, प्राकृतिक रंगोली, कम ध्वनि वाले उत्सव और जरूरतमंदों के बीच मिठाई तथा उपहार बांटना दीपावली की खुशियों को और सटिका से व्यापक बना सकता है।
साथियों, बात अगर हम दीपावली के वैश्विक सांस्कृतिक और कूटनीतिक महत्व की करें तो आज यह पर्व भारत की सांस्कृतिक पहचान,प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संवाद का माध्यम बन चुका है। अमेरिका के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप का दीप प्रज्वलन, अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की रामलीला,दुबई के सार्वजनिक उत्सव और विभिन्न देशों में भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी इस सांस्कृतिक विस्तार के उदाहरण हैं।दीपावली हिंदू समुदाय के साथ- साथ जैन और सिख परंपराओं में भी विशेष महत्व रखती है। जैन धर्म में भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में दीपावली का महत्व है, जबकि सिख इतिहास में यह बंदी छोड़ दिवस के रूप में स्मरण किया जाता है। इस प्रकार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रकाश, स्वतंत्रता, आत्मज्ञान और सद्भाव के संदेश को अपने- अपने तरीके से अभिव्यक्त करती हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि 8 नवंबर 2026 की दीपावली केवल दीपों की जगमगाहट,मिठाइयों की मिठास और लक्ष्मी पूजन तक सीमित नहीं है। यह भारत की आध्यात्मिक विरासत,भगवान श्रीराम के आदर्शों, मां महालक्ष्मी की आराधना, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक एकता और वैश्विक सांस्कृतिक पहचान का संगम है। हमें मां लक्ष्मी से केवल धन नहीं, बल्कि ऐसी समृद्धि मांगनी चाहिए जिसमें विद्या, स्वास्थ्य, ईमानदारी, सद्बुद्धि और दूसरों के प्रति संवेदना भी शामिल हो।भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र में सत्य, न्याय और सद्भाव के दीप जलाने चाहिए। आइए, इस दीपावली पर हम संकल्प लें कि किसी जरूरतमंद के घर भी खुशियों का दीप पहुंचे, किसी गरीब बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आए, किसी परिवार की निराशा दूर हो और मानवता का प्रकाश सीमाओं से ऊपर उठकर पूरी दुनिया को आलोकित करे।मां महालक्ष्मी सभी के घरों में सुख, शांति, स्वास्थ्य, सद्बुद्धि और समृद्धि का प्रकाश फैलाएं। भगवान श्रीराम के आदर्शों से विश्व में सत्य, न्याय और मानवता की स्थापना हो।सभी भारत वासियों, प्रवासी भारतीयों और विश्व समुदाय को दीपावली 2026 की हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएं!
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

