दूसरों के घरों की खुशियाँ से,अपना सुकून मत खोना,
हर चमकते आँगन को अपना पैमाना मत बनाना,
उसके घर में ऐसा है,तो हमारे घर में क्यों नहीं,
इसी एक सवाल से अपने रिश्तों को कभी मत जलाना।
किसी के घर में दौलत है,किसी के घर में शान,
किसी के हिस्से सुविधाएँ,किसी के हिस्से सम्मान,
हर घर की अपनी कहानी,हर जीवन की अपनी उड़ान,
तुलना की तराजू पर मत तौलो अपने घर का मान।
अपेक्षाओं की आँधी जब रिश्तों में उतर जाती है,
अपनों की छोटी-सी कमी भी पहाड़ बन जाती है,
जहाँ प्रेम था, वहाँ धीरे-धीरे शिकायतें पनपती हैं,
और जलन की एक चिंगारी पूरे घर को सुलगाती है।
घर ईंटों से नहीं,विश्वास और अपनत्व से बनता है,
जीतने से अधिक,एक-दूजे के लिए झुकना पड़ता है,
जो मिला है उसमें खुश रहना भी एक हुनर होता है,
तुलना छोड़ो, संतोष ही सुख का असली गहना होता है।
दूसरों के घर की रोशनी से अपना दीप मत बुझाना,
अपने रिश्तों की खुशबू को शिकायतों से मत मिटाना,
किशन जिस घर में प्रेम,धैर्य व सम्मान का वास होता है,
घर स्वर्ग बनता है,ज़हाँ तुलना नहीं,अपनत्व होता है।


