ख़ुश रहना है तो इतना आत्मनिर्भर बन जाओ,
दूसरों की तारीफ़ से न फूलो,न बुराई से घबराओ,
अपने मन की शांति को दुनियाँ के हाथों मत सौंपो,
अपने आत्मसम्मान की लौ से जीवन को जगमगाओ।
लोगों की बातें तो मौसम की तरह बदलती रहती हैं,
कभी प्रशंसा के फूल,कभी आलोचना के काँटे मिलते हैं,
जो हर शब्द को दिल पर लेकर बैठ जाता है,
उसके हिस्से में बेचैनियों के बादल ही रहते हैं।
तारीफ़ मिले तो विनम्रता से मुस्कुराना सीखो,
बुराई मिले तो धैर्य से ख़ुद को समझाना सीखो,
अपनी पहचान दूसरों के शब्दों में मत तलाशो,
अपने कर्मों से खुद की नज़र में उठना सीखो।
न प्रशंसा का नशा हो,न निंदा का घाव हो,
अपने विचारों में दृढ़ता,अपने मन में ठहराव हो,
दुनियाँ चाहे जो कहे,तुम अपने पथ पर चलते रहो,
तुम्हारे भीतर आत्मविश्वास का उजला प्रभाव हो।
जब लोगों की बातों से मन विचलित नहीं होगा,
तब सुख़ का दीपक कभी धुंधला नहीं होगा,
किशन तारीफ़ और बुराई दोनों से ऊपर उठकर देखो,
तुम्हारी ख़ुशी का मालिक कोई दूसरा नहीं होगा।

