घर में जब पशु-पक्षी बार-बार आने लगते हैं,
तो समझो आँगन में खुशियों के दीप जलने लगते हैं,
ये केवल संयोग नहीं,प्रकृति के सुंदर संकेत होते हैं,
जहाँ ममता बसती है,वहीं जीव बेखौफ ठहरते हैं।
जिस घर में दया हो,वहाँ डर टिक नहीं पाता,
जिस घर में शांति हो,वहाँ कलह लौटकर नहीं आता,
घमंड और अहंकार से रिश्तों का आँगन सूना होता है,
सच्चाई की खुशबू हो तो हर जीव अपना होता है।
पक्षियों का घोंसला घर की छत पर बन जाना,
मानो प्रकृति का प्रेम बनकर आँगन में उतर आना,
नन्हे पंखों को जहाँ सुरक्षित ठिकाना मिल जाता है,
वहाँ इंसानियत का दीप अपने आप जगमगाता है।
चींटी से चिड़िया तक,हर जीव में जीवन धड़कता है,
जिस हृदय में करुणा हो,वहीं सच्चा धर्म चमकता है,
ईश्वर को मंदिरों में ढूँढ़ने से पहले दिल को देख लेना,
किसी बेजुबान को अपनाकर प्रभु को पास पा लेना।
पशु-पक्षियों के घर आने को मामूली बात न समझना,
उनपर अपने घर के दरवाज़े पर थोड़ा प्रेम बसाए रखना
किशन जहाँ दया,शांति, सत्य करुणा का दीप जलता है
वहीं प्रकृति मुस्कुराती है, ईश्वर का आशीष बरसता है।
