ख़ुद के सम्मान की चाह है,तो दूसरों का मान करो,
अहंकार की ऊँची दीवार नहीं,विनम्रता का निर्माण करो।
जो इज़्ज़त अपने लिए चाहते हो,औरों को भी प्रदान करो
इंसान हो तो इंसानियत से,हर रिश्ते का सम्मान करो।
कहने को जब ज़ुबाँ मिली है,तो सुनने का हुनर भी रखो,
हर बात में अपनी ही नहीं,दूसरों की क़दर भी रखो।
संवादों में केवल शब्द नहीं,संवेदनाओं का असर भी रखो
किसी के मौन के पीछे छिपे,दर्द की ख़बर भी रखो।
हर सच तुम्हारी सोच नहीं,हर दृष्टि तुम्हारी नहीं होती,
हर ख़ामोशी सहमति नहीं,हर हँसी सुखदायी नहीं होती।
किसी को सुन लेना भी सेवा है,हर बात लड़ाई नहीं होती,
झुककर सुनने वालों की दुनियाँ,कभी पराई नहीं होती।
शब्दों से घाव देने वालों,ज़रा अपने भीतर झाँककर देखो,
किसी के टूटे मन को,अपने व्यवहार से आँककर देखो
सम्मान कोई उपकार नहीं,मानवीय अधिकार समझो,
दूसरों के दर्द को भी,अपनी संवेदना से परखकर देखो।
याद रखो,जीवन की गरिमा ख़ुद को ऊँचा करने में नहीं,
सच्ची महानता छिपी है,किसी को छोटा समझें नहीं
किशन बोलने का अधिकार है,सुनने की मर्यादा भी निभाओ
ख़ुद सम्मान पाना है,तो दूसरों को सम्मान देना सीख जाओ।
