ख़ामोश रहकर नेक कर्म करते रहिए,
हर दिल में प्रेम का दीप धरते रहिए।
दुनियाँ चाहे आपके कर्मों को न जाने,
आप रब की नज़र में नेक बनते रहिए।
न नेकी का शोर हो,न एहसान जताइए,
बस टूटे दिलों को थोड़ा-सा मुस्कुराइए।
जो दिया किसी को,उसे भूल जाइए,
दुआओं की छाँव में खुद भी खिलखिलाइए।
जब सच्चे कर्मों की खुशबू फैलती है,
तो बंद किस्मत की राह भी खुलती है।
दुआएँ जब दिल से निकलकर असर करती हैं,
तो सूनी जिंदगी भी बहारों से मिलती है।
दुआएँ न दिखाई देतीं,फ़िर भी क़माल करती हैं,
अंधेरी राहों में उम्मीदों के दीप ज़लाती हैं।
जहाँ इंसान की कोशिश थककर रुक जाती है,
वहीं दुआएँ नई राह दिखाती हैं।
इसलिए ख़ामोशी से नेकी की राह चुनते रहिए,
हर हाल में इंसानियत का हाथ थामे रहिए।
किशन दुआएँ गारंटी से जिंदगी सँवारेंगी,
जिंदगी भी गीत बनकर गुनगुनाएगी।

