पापा,आप तो चले गए,अब आवाज़ कहाँ से आएगी,
आपकी वो प्यार भरी डाँट,फिर कहाँ सुनाई दे पाएगी।
न सिर पर आपका हाथ रहा,न चेहरे की वो मुस्कान,
फिर भी हर धड़कन में बसता है,आपका ही प्यार महान।
जब राहों में अँधेरा छाता है,आपकी सीख़ राह दिखाती है,
मुश्किल चाहे जितनी आए,हिम्मत करना सिखाती है।
गिरकर फिर से उठना मैंने,आपसे ही तो जाना है,
आपके दिए संस्कारों को,जीवन भर निभाना है।
आपकी मेहनत की हर बूंद में,मेरे सपनों की पहचान है,
आपके त्याग की छाया में,आज भी मेरा जहान है।
आपने जो चरित्र दिया,वही मेरी सबसे बड़ी शान,
आप नहीं हैं पास मगर,हर कदम साथ आपका सम्मान।
गलत राह जब बुलाती है,आपकी बातें रोक लेती हैं,
सच्चाई की कठिन राह पर,आपकी यादें साथ देती हैं।
दुनिया चाहे कुछ भी कहे,मैं संस्कार नहीं छोड़ूँगा,
आपके नाम की गरिमा को,जीवन भर ऊँचा रखूँगा।
पापा,आपकी तस्वीर नहीं,आपकी सीख़ मेरे पास है,
आपकी यादों की ख़ुशबू में,आज भी आपका एहसास है।
सनमुख दूर चले गए लेकिन,दिल से कभी जुदा नहीं होंगे,
जब तक साँसें चलती रहेंगी,पापा आप मेरे साथ ही होंगे।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

