बच्चे मन के सच्चे,निर्मल इनके भाव,
हँसी बाँटते जग में,मिटा देते हर घाव।
न छल-कपट की भाषा,न मन में कोई भार,
इनकी मासूमियत में बसता सच्चा प्यार।
बच्चों की मुस्कान में,खुशियों की झंकार,
इनकी मीठी बातों से महके संसार।
न कोई भेदभाव है,न ऊँच-नीच का भेद,
इनके कोमल हृदय में प्रेम का निर्मल वेद।
बच्चे भगवान के रूप,पावन इनका मन,
इनकी भोली आँखों में चमके शुभ किरण।
जहाँ कदम ये रखते,खुशियाँ खिलती जाएँ,
सूने-सूने आँगन भी फूलों से मुस्काएँ।
इनके सपनों में छिपा,उज्ज्वल कल का द्वार,
इनके नन्हे हाथों में भविष्य का संसार।
संस्कारों की छाँव मिले,शिक्षा बने आधार,
बच्चों के उजले कल से,उजले देश-समाज।
बच्चों को प्यार दें हम,दें सपनों को उड़ान,
उनके हर अरमानों का रखें सदा मान।
किशन मासूम हृदय बचाएँ,यही सच्ची सेवा-धर्म,
बच्चों में ईश्वर देखें,यही जीवन का मर्म।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
